पाकिस्तानी कैदियों की हालत पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित

Image caption उच्चतम न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि सजा काटने के बाद भी क्यों कैद हैं पाकिस्तानी नागरिक

भारत के उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर अफसोस जताया है कि भारतीय जेलों में ऐसे पाकिस्तानी भी बंद हैं जो मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और अपनी सजा भी पूरी कर चुके हैं.

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा का कहना है कि जब दोनों देशों के नेता आपस में मिलते हैं तो इस तरह के मामलों को उच्च प्राथमिकता देनी चाहिए.

न्यायमूर्ति लोढ़ा ने उन 21 पाकिस्तानी कैदियों के बारे में सरकार से जवाब माँगा, जिनमें 21 मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं जबकि 5 कैदी बोलने और सुनने में अक्षम हैं.

अदालत ने सरकार को इन लोगों की स्वदेश वापसी का रास्ता निकालने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है.

रविवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी संक्षिप्त यात्रा पर भारत आए थे. इस दौरान दोपहर के भोजन पर उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी.

इसके एक दिन बाद, उच्चतम न्यायालय ने पाकिस्तान के 80 वर्षीय डॉक्टर को जमानत दे दी थी जो 1992 में हुई एक हत्या के मामले में दोषी हैं.

हालांकि अदालत ने खलीली चिश्ती नाम के इस वैज्ञानिक को तब तक भारत छोड़ने की अनुमति नहीं दी है जब तक कि उनकी अपील पर फैसला नहीं हो जाता.

इस बीच न्यायमूर्ति आरएन लोढ़ा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मंगलवार को सरकार से कहा, “मानसिक रूप से अस्वस्थ उन कैदियों को वापस उनके देश क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है.”

प्राथमिकता

न्यायमूर्ति लोढ़ा ने सरकार से ये सवाल भी किया कि, “जब दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष मिलते हैं तो क्या इस तरह के मामलों को उच्चतम प्राथमिकता में नहीं लिया जाना चाहिए?”

अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि इन कैदियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन समस्या ये है कि इन्हें इनके घर क्यों नहीं भेजा जा रहा है.

इस बारे में सरकार का कहना है कि भारत की जेलों में तमाम पाकिस्तानी कैदी अपनी सजा काटने के बाद भी इसलिए बंद हैं क्योंकि उनकी पहचान अभी तक ठीक से नहीं हो पा रही है.

सरकार का कहना है कि बिना सही पहचान के इन्हें स्वदेश नहीं भेजा जा सकता है.

इस तरह के कम से कम 250 पाकिस्तानी नागरिक भारतीय जेलों में कई सालों से बंद हैं. एक कैदी तो चालीस साल से भी ज्यादा समय से जेल में है.

पिछले साल दोनों देशों ने ऐसे कई कैदियों को आपसी सद्भाव के चलते रिहा किया था.

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