ओसामा की जगह चाइल्ड पोर्नोग्राफ़र

एरिक जस्टिन टोथ एफ़बीआई की सूची में इमेज कॉपीरइट BBC World Service

पिछले वर्ष मई में अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के मारे जाने से पहले तक उनका नाम अमरीकी जाँच एजेंसी एफबीआई की मोस्ट वांडेट की सूची में था.

लेकिन अब ओसामा का नाम वहाँ से हटा है तो उसकी जगह ले ली है एक पूर्व अमरीकी अध्यापक ने. यह अध्यापक कोई चरमपंथी नहीं है बल्कि बच्चों की पोर्नोग्राफी से जुड़ा एक व्यक्ति है.

30 वर्षीय एरिक जस्टिन टोथ पर बच्चों की अश्लील सामग्री तैयार करने के आरोप हैं.

लादेन का वारिस!

अधिकारियों का कहना है कि स्कूल का यह पूर्व अध्यापक वर्ष 2008 से फरार है.

उसी समय उनके खिलाफ अमरीकी राज्य मैरीलैंड में आरोप तय किए गए थे. जिस कैमरे का इस्तेमाल यह शिक्षक स्कूल में करता था, उस पर बच्चों की पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री पाई गई.

एफबीआई ने उसे इलिनॉइन और इंडियाना से लेकर पश्चिमी राज्य एरिजोना तक ढूंढा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला.

इसके बाद एक तरह से उसका मुकदमा ठंडा पड़ गया.

लेकिन मंगलवार को एफबीआई ने टोथ को बिन लादेन की जगह दस सर्वाधिक वांछितों की अपनी सूची में शामिल कर लिया.

एफबीआई के प्रवक्ता ने माइक कोर्टन ने कहा, "भगोड़ों को पकड़ने और मामलों को हल करने के लिए हमें हमेशा आम जनता की मदद की जरूरत होती है. दस वांछितों की सूची में एरिक टोथ का आना इस बात को दर्शाता है कि उस आदमी की गिरफ़्तारी कितनी जरूरी है."

दशकों पुराना सिलसिला

एफबीआई ने सबसे पहले 1950 में दस सर्वाधिक वांछितों की सूची तैयार की थी. यह कदम तब उठाया गया जब एक प्रेस रिपोर्टर ने एफबीआई से यह पूछा कि फरार लोगों में "सबसे खूँखार लोग" कौन हैं और वे कैसे दिखते हैं.

एफबीआई अधिकारी बताते हैं कि तब से आम लोगों की मदद से उन्हें अपने अभियान में बेहद कामयाबी मिली है.

वर्ष 1950 से अब तक वांछितों की इस सूची में 495 लोगों के नाम आए हैं जिनमें से 465 को या तो पकड़ लिया गया या उनका पता लगा लिया गया.

एफबीआई के मुताबिक इनमें से 153 लोगों को आम लोगों की तरफ से दी गई जानकारी के आधार पर पकड़ा गया.

इस सूची में शामिल दस लोगों को कोई संख्या नहीं दी जाती.

यानी यह केवल मिथक है कि ओसामा इस सूची में शीर्ष स्थान पर था.

टॉप 10 सूची में कौन आता है?

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Image caption 9/11 के हमले बाद से पूरी दुनिया में ओसामा बिन लादेन की तलाश की जा रही थी

इस सूची में उन लोगों को शामिल किया जाता है जिनके खिलाफ गिरफ्तारी का संघीय या केंद्र सरकार की ओर से वारंट जारी हो और वे समाज के लिए वाकई खतरा हों.

लोगों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम और भगोड़े व्यक्ति को इस सूची में रखा जाता है.

इसके अलावा एक शर्त ये भी है कि उस व्यक्ति के ऊपर एक डॉलर लाख का इनाम भी होना चाहिए.

किसी भगोड़े की तलाश में जुटे एजेंट जब तमाम सुरागों के बाजवूद उसे नहीं पकड़ पाते तो उन्हें लगता है कि आम लोगों को इसकी जानकारी देकर उस व्यकित बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है.

उन मामलों को टॉप 10 में नहीं रखा जाता जिनमें एफबीआई को लगता है कि वे भगोड़े व्यक्ति को पकड़ने के करीब हैं और प्रचार की वजह से वह भूमिगत हो सकता है.

एफबीआई भगोड़े लोगों को वांछितों की सूची में शामिल करने से पहले उनसे जुड़े मामलों का पूरा विश्लेषण करती है और अपने फील्ड दफ्तरों के सुझावों को जांचती परखती है.

इसके बारे में एजेंसी की पूरी कमांड को इसकी जानकारी दी जाती है और निदेशक की मंजूरी मिलने के बाद ही किसी को इस वांछित सूची में रखा जाता है.

एफबीआई के आधिकारिक इतिहासकार जॉन फॉक्स का कहना है, "अब तक की टॉप 10 सूची एक तरह से एजेंसी की आपराधिक जांच से जुड़ी दिलचस्पी और प्राथमिकताओं को दिखाती है."

1960 और 1970 के दशक में बेर्नार्डिन डार्न, कैथरीन पावर और लियो बुर्ट जैसे हिंसक वियतनाम युद्ध-विरोधी कट्टरपंथी इस सूची में शामिल रहे हैं.

1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय चरमपंथियों को इस सूची में जगह दी गई जबकि वर्ष 2000 के बाद से इसमें बाल पोर्नोग्राफी और बाल यौन शोषण के आरोपियों को शामिल किया गया.

लंबी प्रक्रिया

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Image caption अमेरिकी अपराधी बलगर को पिछले साल जून में एफबीआई ने पकड़ लिया

फॉक्स बताते हैं, "बेशक इसमें वे सारे लोग नहीं होते जो एफबीआई की प्राथमिकताओं में शामिल हैं."

उनके मुताबिक सारे वांछितों के बारे में सार्वजनिक तौर पर जानकारी नहीं दी जा सकती.

जब भगोड़े लोग पकड़े जाते हैं, मर जाते हैं (या मार दिए जाते हैं) तो उनके नाम सूची से हटा लिए जाते हैं. उस व्यक्ति का नाम भी सूची से बाहर कर दिया जाता है जिसके बारे में समझा जाता है कि अब उससे समाज को कोई खतरा नहीं है.

इतने बरसों में, छह लोगों का नाम इसी तरह से वांछित लोगों की सूची से हटाया गया है.

इनमें कई लोग तो वियतनाम युद्ध विरोधी थे जिन पर हिंसक गतिविधियों के आरोप थे. लेकिन जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, उन्होंने इन गतिविधियों से खुद को दूर कर लिया.

किसी व्यक्ति का नाम दस वांछितों की सूची में शामिल करना काफी लंबी प्रक्रिया है.

सूची में बिन लादेन की जगह किसी और को देने में एफबीआई को 11 महीने लग गए.

अमरीका में संगठित अपराध से जुड़े व्हाइटी बलगर को पिछले साल जून में गिरफ़्तार कर लिया गया था लेकिन उसका नाम दस सबसे वांछित लोगों की सूची में बुधवार तक मौजूद था.

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