नाकाम रहा उत्तर कोरिया का रॉकेट प्रक्षेपण

 शुक्रवार, 13 अप्रैल, 2012 को 10:41 IST तक के समाचार

उत्तर कोरिया का दावा है कि रॉकेट के जरिए वो अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़ना चाहता था.

उत्तर कोरिया ने इस बात की पुष्टि की है कि उसका बहुप्रतीक्षित रॉकेट प्रक्षेपण नाकाम रहा है.

शुक्रवार तड़के उत्तर कोरिया के पूर्वोत्तर इलाके से इस रॉकेट को छोड़ा गया. प्योंगयांग सरकार का कहना है कि उसके वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि इसकी विफलता की क्या वजह रही.

कम्युनिस्ट सरकार के मुताबिक उसका उद्देश्य अंतरिक्ष में एक उपग्रह प्रक्षेपित करना था.

लेकिन अमरीकी और अन्य देशों का कहना है कि उत्तर कोरिया का इरादा लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण करना था और वह भी उस तकनीक के आधार पर जो संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक प्रतिबंधित है.

इससे पहले जापान और दक्षिण कोरिया ने कहा कि उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों में ये कोरियाई प्रायद्वीप में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

ये रॉकेट प्रक्षेपण उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय संस्थापक माने जाने वाले किम इल-संग की सौंवी वर्षगांठ के मौके पर किया जा रहा था.

‘मिनट-भर उड़ान’

रॉकेट की तय दिशा के मुताबिक उड़ान भरने के बाद वो कोरियाई प्रायद्वीप के पश्चिम की ओर से होता हुआ जापान और फिलिपींस के बीच से निकलता.

जापान और दक्षिण कोरिया ने चेतावनी दी थी कि अगर रॉकेट उनके क्षेत्र में प्रवेश किया तो वे उसपर हमला कर देंगे.

"दक्षिण कोरिया और अमरीकी खुफिया तंत्र के अधिकारियों का मानना है कि ये प्रक्षेपण असफल रहा है."

किम मिन-सिओक, दक्षिण कोरिया रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता

प्रक्षेपण के कुछ ही देर बाद दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता किम मिन-सिओक ने कहा, “दक्षिण कोरिया और अमरीकी खुफिया तंत्र के अधिकारियों का मानना है कि ये प्रक्षेपण असफल रहा है.”

जापान के रक्षा मंत्री नाओकी तनाका ने कहा, “स्थानीय समयानुसार सुबह करीब सात बजकर चालीस मिनट पर उत्तर कोरिया से एक उड़नेवाला यंत्र ने उड़ान भरी, लेकिन एक मिनट बाद ही वो गिर गया. इसका जापान की भूमि पर कोई असर नहीं पड़ा.”

दक्षिण कोरिया के मुताबिक रॉकेट का मलबा कोरियाई प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर कुनसान बंदरगाह के पास समुद्र में जा गिरा.

‘उकसाने वाला कदम’

अमरीका की ओर से जारी एक बयान में उत्तर कोरिया की प्रक्षेपण की कोशिश को ‘उकसाने वाला कदम’ बताया गया.

फरवरी में उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम में आंशिक रोक लगाने पर सहमत हुआ था. इसके बदले में अमरीका ने उसे खाद्य सहायता देने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन इस प्रक्षेपण के साथ वो करार टूट गया.

उत्तर कोरिया के लिए ये असफलता एक चुनौती होगी. खास तौर पर इस वक्त जब सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी ने इस बुधवार एक बैठक की थी और शुक्रवार को देश की संसद का विशेष सत्र आयोजित है.

माना जा रहा है कि इन दोनों बैठको का मकसद किम जोंग-उन को सत्ता की कमान देने की क्रिया पूरा करना था.

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