ईरान पर बातचीत सकारात्मक

छह विश्व शक्तियों और ईरान के बीच बातचीत इमेज कॉपीरइट AFP

ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर 15 महीनों के गतिरोध के बाद शुरू हुई महत्वपूर्ण बातचीत को सकारात्मक और पिछली कई बातचीतों से भिन्न बताया गया है.

इस मुद्दे पर छह विश्व शक्तियों अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन , रूस और जर्मनी और ईरान की तुर्की के इस्तांबुल में बैठक हो रही है.

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है जबकि उसके आलोचकों को संदेह है कि वह परमाणु हथियारों को विकसित कर रहा है. हाल के महीनों में इसराइल ने संकेत दिए हैं कि वह ईरान के इस कार्यक्रम को नष्ट करने के लिए उस पर हवाई हमला कर सकता है.

यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख कैथरीन एशटन के प्रवक्ता मिशेल मान ने बातचीत के बारे में बताया, ‘पिछली बार के ठीक विपरीत इस बार वातावरण सकारात्मक है.’

इस्तांबुल में बीबीसी के जेम्स रेनॉड्स का कहना है कि पिछली बार वार्ताकारों ने यह सोचकर काफी नीचे लक्ष्य रखे थे क्योंकि उन्हें किसी भी पक्ष से विस्तृत और सारगर्भित प्रस्तावों की उम्मीद नहीं थी.

उनका कहना है कि वह देखना चाहते थे कि क्या ईरान इस बातचीत के प्रति गंभीर भी है या नहीं. और अगर वह है तो चार से छह सप्ताहों के बीच बातचीत का एक दौर और हो सकता है.

बातचीत आगे बढ़ी

सुबह के ढाई घंटे के सत्र के बाद दुनिया की छह शक्तियों के बीच आम सहमति थी कि बातचीत में प्रगति हुई है. पश्चिमी पर्यवेक्षकों को इस बात पर चिंता है कि ईरान ने चुपके से भूमिगत बंकर बना तो लिये लेकिन इसके उद्देश्य को लेकर वह लगातार अपना बयान बदलता रहा.

एक राजनयिक ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ऐसा लगता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर बातचीत करने के लिए तैयार है.

बातचीत से पहले बेरोनीज एशटन ने कहा, ‘हम यहाँ पर आपस में विश्वास बहाल करने के रास्ते और तरीके तलाशने आए हैं जिससे हम यह दिखा सकें कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम से दूर हट रहा है. ’

इससे पहले अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस बातचीत को कूटनीति के लिए ‘अंतिम मौका ’ बताया. इन शक्तियों को उम्मीद है कि अंतत: ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन को कम करेगा और अपने परमाणु संयंत्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के निरीक्षकों के लिए खोल देगा.

इस तरह के संकेत हैं कि अगर ईरान इस अनुरोध को मानता है तो उसके ऊपर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को कम किया जा सकता है. इस विषय पर हुई पिछली बातचीत जनवरी 2011 में टूट गई थी क्योंकि दोनों पक्ष किसी विषय पर सहमत नहीं हो पाए थे.

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