ब्रिटेन के महानतम शत्रु जॉर्ज वॉशिंगटन

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Image caption अमरीका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन

अमरीकी क्राँति के नेता जॉर्ज वॉशिंगटन को ब्रिटेन के खिलाफ सबसे सक्षम विरोधी कमांडर माना गया है.

नेशनल आर्मी म्यूजियम द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में वॉशिंगटन को आयरिश स्वतंत्रता के नायक माइकल कोलिंस, प्राँस के नेपोलियन बोनापार्ट, जर्मन फील्ड मार्शल इरविन रोमेल और आधुनिक तुर्की के निर्माता मुस्तफा कमाल पाशा से अधिक मत मिले.

पश्चिम लंदन में चेलसी में म्यूजियम में हुए एक विशेष समारोह में 70 अतिथियों ने वॉशिंगटन को ब्रिटेन का सबसे जबरदस्त प्रतिद्वंदी माना.जाने माने इतिहासकार डॉक्टर स्टीफेन ब्रमवेल ने कहा, ‘अमरीकी स्वाधीनता संग्राम में वॉशिंगटन की वजह से ही ब्रिटेन को उसके इतिहास की सबसे खराब पराजय का सामना करना पड़ा.’

उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन एक बहादुर और प्रेरणादायक कमांडर थे जिन्होंने आगे रह कर लड़ाई लड़ी. सबसे बढ़कर उन्होंने उस समय भी हिम्मत नहीं हारी जब लड़ाई उनके खिलाफ जा रही थी.वॉशिंगटन की जगह अगर कोई और होता तो वह मैदान छोड़ कर भाग खड़ा होता.

टीपू सुल्तान और रानी लक्ष्मीबाई भी शामिल

इस सूची मे पहले 20 कमांडरों को शामिल किया गया था. 20 कमांडरों की सूची में भारत से टीपू सुल्तान और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को भी शामिल किया गया था.

करीब 8000 लोगों ने एक ऑनलाइन मतदान में भाग ले कर इनमें से पाँच लोगों को चुना. फिर इनकी विशेषताओं पर खास तौर से बुलाए गए मेहमानों ने चर्चा की और फिर अंतिम मतदान कराया गया.

इस पूरी प्रक्रिया का मापदंड था कि इनमें से हर व्यक्ति ने 17 वीं शताब्दी के बाद ब्रिटेन के खिलाफ किसी न किसी लड़ाई में सेना का नेतृत्व किया हो.

इस सूची में वॉशिंगटन के बाद दूसरे स्थान पर माइकल कोलिंस रहे जिन्हें एक महान छापामार रणनीतिकार माना जाता है.उन्होंने देश के भीतर ही ब्रिटिश सेनाओं का न सिर्फ सामना किया बल्कि उन्हें हराया भी.

उनके बारे में बोलते हुए युनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के लेक्चरर गेब्रियल डोहेरटी ने कहा, ‘वह एक महान सैनिक नेता से कहीं बढ़ कर थे.उन्होंने एक बार में कई टोपियाँ पहनी लेकिन उनके राजनीतिक और प्रशासनिक गुणों को अक्सर नजरअंदाज किया गया.’

नेपोलियन और रोमेल भी

तीसरे स्थान पर फ्राँस के महान शासक नेपोलियन रहे.उन्होंने करीब एक चौथाई शताब्दी तक ब्रिटेन को चुनौती दी लेकिन अंतत: वॉटरलू की लड़ाई में उनकी हार हुई.

यॉर्क विश्वविद्यालय में आधुनिक इतिहास के प्रोफेसर एलन फॉरेस्ट ने कहा, ‘नेपोलियन काफी प्रतिभावान जनरल और सैनिक रणनीतिकार थे. वह ब्रिटेन को अपना सबसे प्रबल प्रतिद्वंदी मानते थे और उसे हराने के लिए उन्होंने अपनी सारी आर्थिक, राजनीतिक और सैनिक ताकत लगा दी थी.’

चौथे स्थान पर जर्मन जनरल एरविन रोमेल रहे.उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उत्तरी अफ्रीका की रेगिस्तान की लड़ाई में ब्रिटिश सैनिकों का सम्मान अर्जित किया.

लंदन के ब्रूनेल विश्वविद्यालय के मेथ्यू ह्यूग्स ने कहा, ‘हाँलाकि रोमेल और नेपोलियन दोनों महान सामरिक कमांडर थे लेकिन राजनीतिक तौर पर उनकी उपलब्धियाँ नगण्य थीं.’

पाँचवे स्थान पर तुर्की के मुस्तफा कमाल अतातुर्क रहे जिन्होंने 1915 में गालीपोली के खिलाफ एक कठिन रक्षात्मक लड़ाई लड़ी जिसकी वजह से ब्रिटिश सेनाओं को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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