ईरान से बातचीत से क्या हासिल हुआ?

छह विश्व शक्तियों और ईरान के बीच बातचीत इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पिछली बैठकों से अलग इस बार बैठक सहयोग के माहौल में हुई

ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर 15 महीनों के बाद इस्तांबुल में हुई बातचीत को ईरान के साथ-साथ विश्व की छह प्रमुख ताकतों ने सकारात्मक बताया है.

चाहे इस बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने अगले महीने बगदाद में मिलने की घोषणा की है लेकिन इस्तांबुल में हुई बातचीत से क्या कुछ हासिल भी हुआ है?

इस बातचीत के दौरान इस्तांबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता जेम्स रेयनलड्स का कहना है, "इस बातचीत और परमाणु कार्यक्रम के मसले का मुख्य मुद्दा ईरान और पश्चिमी देशों के बीच भरोसे की कमी था. इसी कारण से ईरान के परमाणु लक्ष्यों के बारे में सहमति बन पाना मुश्किल हो गया है."

गौरतलब है हाल के महीनों में इसराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में शंका जाहिर की है और संकेत दिया है कि वह बचाव के लिए हमला कर सकता है. उधर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि यदि कोई कूटनीतिक हल खोजना है कि इस्तांबुल की बातचीत आखिरी मौका है.

महत्वपूर्ण है कि ईरान ये लगातार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण लक्ष्यों के लिए है.

'अगले चरण में होगी खींचतान'

इस्तांबुल में बातचीत पर नजर रखने वाले बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड का कहना है, "इस बातचीत में न तो किसी पक्ष ने रियायत दी और न ही किसी के ऐसा करने की संभावना थी. कूटनीतिज्ञों का कहना है, ये पूरी चर्चा मूड के बारे में थी. जहाँ पिछली बैठकों में गुस्सा और सहमति का अभाव था, वहीं ईरानी वार्ताकार सईद जलीली और मध्यस्थ कैथरीन एशटन, दोनों ने ही बातचीत को सकारात्मक और मूड को सहयोगपूर्ण बताया."

जहाँ दिन के शुरुआती दौर में ढाई घंटे की बातचीत हुई और फिर द्विपक्षीय बातचीत हुई और इसके बाद देर रात तक संयुक्त बैठक का दौर चला.

कैथरीन एशटन ने कहा, "ईरान को शांतिपूर्ण मकसदों के लिए परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकार है. अगली बातचीत का आधार परमाणु अप्रसार संधि होनी चाहिए."

ईरानी प्रतिनिधि सईद जलीली ने कहा, "बातचीत में मतभेद थे लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति भी बनी...हमें उम्मीद है कि बगदाद में होने वाली बातचीत में अतिरिक्त सकारात्मक कदम उठाए जाएँगे."

जोनाथन हेड का कहना है, "बातचीत का अगला चरण और मुश्किल होगा. उस समय सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और जर्मनी - छह बड़ी ताकतें - ये जानने की कोशिश करेंगी कि ईरान किस हद तक रियायत देने को तैयार है और ये दर्शाना चाहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसदों के लिए है. साथ ही ईरान ये जानना चाहेगा कि उसे इसके बदले में क्या मिलेगा."

जोनाथन हेड के अनुसार ईरान ये भी जानना चाहेगा कि उस पर लगाए गए प्रतिबंध कब उठाए जाएँगे.

उधर चाहे सईद जलीली ने जोर देकर कहा कि ईरान को यूरेनियम संवर्द्धन करने का आधिकार है लेकिन उसे अपने परमाणु केंद्रो का और व्यापक निरीक्षण भी स्वीकार करना होगा और हो सकता है कि कुछ यूरेनियम त्यागना भी पड़े.

इसलिए दोनों पक्षों के लिए आगे की राह काफी कठिन है क्योंकि दोनों के बीच अब भी भरोसे की खासी कमी है.

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