हर घर में तिरंगे का अनूठा अभियान

झंडा
Image caption खालिद ने 'आई लव माई तिरंगा' अभियान शुरु किया

कहा जाता है कि तिरंगा हर भारतीय के जीवन का अहम हिस्सा है. शायद हर देश का झंडा उसके वासियों के लिए इतना ही अहम होता होगा.

लेकिन कई बार लोग इसके महत्व को भूल जाते हैं. कुछ ऐसा ही एहसास मुंबई के रहने वाले खालिद कुरैशी को दो साल पहले हुआ.

उस दिन को याद करते हुए खालिद कहते हैं कि वो, उनके पिता और भाई सभी सरकारी सेवा में है और सभी को उनके काम के लिए कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया है, जिसे उन लोगों ने अपने घर के ड्रॉइंग रूम में सजा कर रखा है.

वो बताते हैं कि एक दिन जब घर के सभी सदस्य इन पुरस्कारों की चर्चा कर रहे थे तब उन्हें एहसास हुआ कि घर हर चीज़ को सजा कर रखा गया है लेकिन तिरंगा कहीं नहीं है.

खालिद को बडा़ अजीब लगा. वे अपने दोस्तों के घर गए और उनसे पूछा कि क्या आपके घर में तिरंगा है, तो सबका जवाब नहीं में था. उनके दोस्तों ने उन्हें कहा कि देशभक्ति की भावना मन में होनी चाहिए, ये दिखाने या जताने की चीज़ नहीं है और और तभी खालिद ने तय किया कि वे देश भर में एक अभियान चलाकर लोगों को अपने घरों में राष्ट्रीय झंडे रखने को प्रेरित करेंगे.

खालिद चाहते हैं कि भारत में रहने वाला हर नागरिक चाहे वो जिस भी धर्म का हो जिस तरह से गीता, रामायण, बाइबिल और कुरान को अपने घर में सहेज कर रखता है वही स्थान भारतीय ध्वज को भी मिले ताकि हमारे मन में देश के प्रति भी वही निष्ठा की भावना हो जो हमारे धर्मों के प्रति होता है.

और यहीं से शुरु हुआ उनका ये 'आई लव माई तिरंगा' अभियान.

धार्मिक जगहों पर मिले सम्मान

खालिद कहते हैं कि देश के किसी भी धार्मिक स्थल पर राष्ट्रध्वज नहीं लहराया जाता है इसलिए वो चाहते हैं कि कम से 15 अगस्त और 26 जनवरी वाले दिन इन स्थलों पर झंडा फहराया जाए.

खालिद के अनुसार, ''हम भारतीय नागरिक कुछ अवसरों पर तिरंगे को फहराते हैं, चाहे वो भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई रैली हो या स्टेडियम में चल रहा कोई मैच हो, और जब ये खत्म हो जाते हैं उसी तिरंगे को रौंदते हुए निकल जाते हैं.''

इसका मतलब ये नहीं कि हमारे अंदर राष्ट्रीयता की भावना की कमी है, बल्कि उस भावना को मार्गदर्शन देने की ज़रुरत है.

इसके लिए खालिद ने 26 जनवरी 2012 को मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से एक दौड़ शुरु की. पांच राज्यों से होते हुए ये दौड़ दिल्ली के इंडिया गेट पर आकर खत्म हुई है.

Image caption खालिद कुरैशी ने 70 से ज्यादा धार्मिक संस्थानों को 15 अगस्त और 26 जनवरी वाले दिन झंडा फहराने के लिए राज़ी किया है

तीन लगभग चार महीने की इस दौड़ के दौरान उन्होंने लगभग 2000 किमी की दूरी तय की, 105 स्कूलों में बच्चों से मिले, 60 हज़ार छात्रों के घर पर तिरंगा रखने के लिए तैयार किया और 30 हज़ार से ज्यादा झंडे बांटे.

इस दौरान वे 70 से ज्यादा धार्मिक संस्थानों में भी गए और उन्हें 15 अगस्त और 26 जनवरी वाले झंडा फहराने के लिए राज़ी किया.

खालिद कहते हैं, ''इतनी लंबी यात्रा के दौरान मुझे एक भी शख्स ऐसा नहीं मिला जिसे तिरंगे से परेशानी थी. कोई ऐसा नहीं मिला जो मेरे इस अभियान से नाराज़ हुआ हो, क्योंकि तिरंगा ना तेरा है - ना मेरा, बल्कि सवा सौ करोड़ भारतीयों का स्वाभिमान है.''

खालिद कुरैशी की शब्दों में, ''तिरंगे को घर में रखने से हमारे भीतर ना सिर्फ हमारे देश के प्रति देशभक्ति की भावना जागेगी बल्कि हम ज्यादा जिम्मेवार नागरिक बनेंगे और आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर समाज और देश दे पाएंगे, जहां धर्म और जाति के मनमुटाव फलफूल नहीं पाएंगे, क्योंकि तब हमारे घर के ड्राइंग रुम में सजा तिरंगा हमें हमेशा ये याद दिलाता रहेगा, झंडा उंचा रहे हमारा....विजयविश्व तिरंगा प्यारा."

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