अफगानिस्तान से जल्दी हटेंगे ऑस्ट्रेलियाई सैनिक

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Image caption अगले साल ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड को आम चुनाव का सामना करना है

ऑस्ट्रेलिया ने अफगानिस्तान में तैनात अपने सैनिकों को 2013 के अंत तक वहां से हटाने का ऐलान किया है. अगले साल ही ऑस्ट्रेलिया में चु्नाव होने हैं.

प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने कैनबरा में घोषणा की है कि तयशुदा समय से एक साल पहले ही ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी होगी.

गिलार्ड की यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब अगले महीने शिकागो (अमरीका) में अफगानिस्तान के मुद्दे पर नेटो की बैठक होगी.

अफगानिस्तान से वापसी

ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय सैनिक 2014 के अंत तक अफगानिस्तान छोड़ देंगे.

पश्चिमी सैन्य संगठन नेटो की सेनाओं ने अफगानिस्तान की सुरक्षा जिम्मेदारी स्थानीय सुरक्षा बलों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अफगानिस्तान में रणनीतिक रूप से अहम दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों की सुरक्षा अब अफगान बलों के हाथों में है.

इस वक्त अफगानिस्तान में 50 देशों के एक लाख 30 हजार सैनिक तैनात हैं जिनमें ऑस्ट्रेलिया के 1550 सैनिक भी शामिल हैं.

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Image caption अफगानिस्तान में 50 देशों की सैनिक नेटो के नेतृत्व में तैनात हैं

ज्यादातर ऑस्ट्रेलियाई सैनिक अफगान प्रांत उरुजगान में तैनात हैं. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के मुताबिक 2001 से अफगानिस्तान में उनके 32 फौजी मारे गए हैं.

'नेटो की नाकामी'

गिलार्ड ने कहा कि उरुजगान प्रांत में सुरक्षा की जिम्मेदारी अफगान बलों के सौंपे जाने के बाद ही ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की वापसी शुरू होगी.

रविवार को काबुल में हुए चरमपंथियों के हमलों के दो दिन बाद ऑस्ट्रेलिया ने वहां से अपने सैनिकों को समय से पहले हटाने का ऐलान किया है.

18 घंटों तक तालिबान चरमपंथियों और नेटो सेनाओं में चले घमासान में 50 लोगों की जानें गईं.

अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने इन हमलों को खुफिया एजेंसियां और खासकर नेटो की नाकामी बताया लेकिन उन्होंने अफगान सुरक्षा बलों की सराहना की.

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