अपने सैनिकों पर फिर शर्मसार हुआ अमरीका

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Image caption अफ़गानिस्तान में तैनात अमरीकी सैनिकों पर फिर लगे गंभीर आरोप.

अमरीकी सरकार ने साल 2010 में अफ़गानिस्तान में तैनात कई अमरीकी सैनिकों द्वारा संदिग्ध अफ़गान चरमपंथियों के शवों का अपमान करने के मामले की आलोचना की है.

अमरीका के रक्षामंत्री लियोन पनेटा के प्रवक्ता ने कहा है कि इस घटना में शामिल सैनिकों को सज़ा दी जाएगी.

प्रवक्ता का ये बयान उन तस्वीरों के सामने आने के बाद आया है जिनमें अमरीकी सैनिकों को संदिग्ध आत्मघाती हमलावरों को शवों के साथ तस्वीरें खिंचाते हुए देखा जा सकता है.

रक्षामंत्री पनेटा के प्रवक्त जॉर्ज लिटल ने एक बयान में कहा, "रक्षामंत्री पनेटा दो साल पुरानी तस्वीरों में सैनिकों के व्यवहार की कड़े शब्दों में आलोचना करते हैं. ये तस्वीरें किसी भी प्रकार से अफ़गानिस्तान में तैनात अधिकतर अमरीकी सैनिकों के पेशेवराना मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं. "

'दोषियों को सज़ा मिलेगी'

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Image caption इससे पहले भी अफ़गानिस्तान में तैनात कुछ अमरीकी सैनिक विवादों में रहे हैं.

बयान में कहा गया है कि जिस किसी को भी इस अमानवीय कृत्य के लिए दोषी पाया जाएगा उसे सैन्य न्याय व्यवस्था के हिसाब से सज़ा दी जाएगी.

इस बीच अफ़गानिस्तान में अमरीका के राजदूत रायन क्रोकर ने सैनिकों की हरकत को अनैतिक करार दिया है.

राजदूत क्रोकर ने कहा है कि ये तस्वीरें हज़ारों अमरीकी सैनिकों और आम लोगों के बलिदानों का अपमान है जिन्होंने बड़ी काबिलियत से अफ़गानिस्तान में ड्यूटी की है.

अमरीका के लॉस एंजेलिस टाइम्स अख़बार में छपी इन तस्वीरों में अमरीकी सैनिकों को ज़ाबोल प्रांत में आत्मघाती हमलावरों के अवशेषों के साथ तस्वीरे खिंचवाते देखा जा सकता है.

इनमें से कुछ शवों के साथ खड़े मुस्करा रहे हैं जबकि कुछ सैनिक हाथ में मृतकों के अवशेष लिए हुए हैं.

'संवेदनशील दौर'

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Image caption काबुल में नेटो अड्डे पर कुरान जलाने की घटना का भारी विरोध हुआ था.

ये चित्र अफ़गान-अमरीकी रिश्ते के एक संवेदनशील दौर के बीच सामने आई हैं.

मार्च में कंधार प्रांत में नौ बच्चों समेत 17 आम लोगों की मौत हो गई थी. बाद में अमरीकी सैनिक सार्जेंट रॉबर्ट बेल्स पर 17 हत्याओं का मुकदमा चलाया गया था.

फ़रबरी में काबुल स्थित एक नेटो अड्डे पर अमरीकी सैनिकों पर कुरान को आग लगाने के आरोप लगने के बाद हज़ारों अफ़गानियों ने प्रदर्शन किए थे. इन प्रदर्शनों में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.

इस घटना के एक महीने बाद एक वीडियो सामने आया था जिसमें अमरीकी सैनिक मृत अफ़गानों पर पेशाब करते हुए देखे जा सकते थे.

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