अग्नि पर पाक और चीन की प्रतिक्रिया नर्म

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भारत के अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 के परीक्षण पर पाकिस्तान और चीन ने आशंकाओं के विपरीत नर्म प्रतिक्रिया दी है.

पहले चीन ने सधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये दोनों विकासशील देश प्रतिद्वन्द्वी नहीं बल्कि पारस्परिक साझीदार हैं. तो उधर पाकिस्तान ने कहा है कि भारत ने अग्नि-5 का परीक्षण करने से पहले सूचित किया था और इसको लेकर उसने नियमों का पालन किया है.

वहीं अमरीका ने इस परीक्षण से पहले सभी परमाणु शक्तियों से संयम बरतने की अपील की मगर भारत के इस परीक्षण की आलोचना नहीं की.

भारत ने गुरुवार को अपनी सबसे शक्तिशाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया जिसे अधिकारियों ने 'पूरी तरह से सफल' बताया है. अधिकारियों का कहना है कि 5000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली ये मिसाइल परमाणु क्षमता से लैस है.

इसका अर्थ ये है कि इस मिसाइल के साथ भारत के पास पहली बार बीजिंग और शंघाई तक मार करने की क्षमता हो गई है.

ग्राफ़िक्स में देखिए कहाँ कहाँ मार कर सकती है नई मिसाइल

इस पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिउ वेइनमिन ने कहा, "चीन ने भारतीय मिसाइल परीक्षण की ख़बरें देखी हैं. भारत और चीन दोनों ही उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ हैं. दोनों प्रतिद्वन्द्वी नहीं हैं बल्कि सहयोगी साझीदार हैं."

जापान और अमरीका

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोअज्जम अहमद खान ने साप्ताहिक ब्रीफिंग दौरान के एक सवाल के जवाब में कहा कि इन मामलों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जो प्रक्रिया और नियम हैं उसके तहत भारत ने पाकिस्तान को पहले सूचित कर दिया था.

ख़ान ने कहा, "भारत ने दोनों देशों के बीच मान्य नियमों का पालन किया है और वह इसको लेकर पाकिस्तान के पक्ष से भी बखूबी वाकिफ है."

उधर जापान के कैबिनेट महासचिव ओसामु फ़ुजिमारा ने कहा है कि पूरी प्रतिक्रिया देने से पहले जापान परीक्षण का ब्यौरा और उसके नतीजों के बारे में जानना चाहेगा.

क्या है अग्नि-5 की विशेषता

फ़ुजिमारा ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए भारत पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है. इसलिए जापान पहले क्षेत्र की सुरक्षा और स्थायित्व को लेकर इसका विश्लेषण करेगा और फिर देखेगा कि उसे क्या प्रतिक्रिया देनी है."

भारत ने गुरुवार की सुबह 8.07 बजे इसका प्रक्षेपण किया गया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों को अग्नि-5 के सफल परीक्षण के लिए बधाई दी है.

पहले इसका परीक्षण बुधवार की शाम को होना था लेकिन खराब मौसम की वजह से इसे गुरुवार की सुबह तक के लिए टाल दिया गया था.

परीक्षण टलने के बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर से जब भारत के इस प्रस्तावित परीक्षण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हम सभी परमाणु शक्ति संपन्न देशों से इस क्षमता को लेकर संयम बरतने की अपील करते हैं. वैसे भारत का परमाणु अप्रसार का रिकॉर्ड काफ़ी अच्छा है."

नई तकनीक

अग्नि-5 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने तैयार किया है और इसे तैयार करने में 2500 करोड़ रुपए की लागत आई है.

इस मिसाइल की कुल लंबाई 17.5 मीटर है और ये करीब 49 टन वजन की है.

भारत के पास उपलब्ध मिसाइलें

ये अपने साथ 1.5 टन तक के हथियार ले जाने में सक्षम है.

डीआरडीओ के अधिकारियों के अनुसार अग्नि-5 तीन रॉकेटों के सहारे काम करता है जिसमें ठोस ईंधन का प्रयोग होता है.

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2010 में अग्नि 3 के सफल प्रक्षेपण और उसके बाद 2011 में अग्नि 4 के सफल प्रक्षेपण के बाद उसी डिजाइन को अग्नि 5 के लिए विकसित किया गया है.

भारत की इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों में अग्नि 1, अग्नि 2 और अग्नि 3 शामिल है जिनकी मारक क्षमता 700-800 किलोमीटर, 2000-2300 किलोमीटर और 3500 किलोमीटर से ज्यादा है.

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