भैरवी के इशारे पर न्यूयॉर्क में चलती हैं टैक्सियाँ

भैरवी देसाई

टैक्सी चालकों की किसी यूनियन के नेता के बारे में अगर बात की जाए, तो आपको शायद ख्याल आएगा दबंग आवाज में किसी प्रदर्शन में अपनी मांग रखते हुए किसी पुरूष नेता का.

लेकिन आज आपकी मुलाकात कराते हैं एक ऐसी भारतीय मूल की अमरीकी महिला से, जो अमरीका में राष्ट्रीय स्तर पर टैक्सी चालकों की नेता हैं.

भैरवी देसाई अमरीका की नेशनल टैक्सी वर्कर्स अलाएंस की अध्यक्ष हैं.

न्यूयॉर्क की टैक्सी वर्कर्स अलाएंस से शुरुआत करने वाली भैरवी देसाई, चाहे कोई प्रदर्शन हो या कोई और कार्यक्रम हमेशा भारतीय महिलाओं की परंपरागत वेशभूषा में नज़र आती हैं. वे दुबली पतली, करीब 5 फुट लंबी हैं और नर्म आवाज में बोलती हैं.

लेकिन उन्होंने टैक्सी चालकों के हित में आवाज उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

हड़ताल

इस महीने राष्ट्रीय टैक्सी वर्कर्स अलाएंस की अध्यक्ष बनने से पहले न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स अलाएंस की अध्यक्ष की हैसियत से उन्होंने शहर के टैक्सी चालकों के विभिन्न मुद्दों पर मांगें न माने जाने पर कई बार शहर में टैक्सी की हड़ताल भी कराई है.

38 वर्षीय भैरवी देसाई ने कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ही न्यूयॉर्क शहर के टैक्सी चालकों की मदद करना शुरू कर दिया था.

वह बताती हैं, “करीब 16 साल पहले मैंने सामाजिक कार्यकर्ता की हैसियत से टैक्सी चालकों के साथ काम करना शुरू किया और जब मैंने टैक्सी चालकों की मुश्किलें देखीं तो मैंने तय किया कि मैं इनकी मदद करूंगी. न्यूयॉर्क में टैक्सी का यह धंधा ही ऐसा है कि जिसमें टैक्सी चालकों का शोषण होता है.”

गुजरात के सूरत शहर के पास एक छोटे से गांव बदेली में जन्मी भैरवी देसाई सिर्फ छह वर्ष की आयु में अपने माता-पिता और दो बड़े भाइयों के संग अमरीका आकर बस गईं थीं.

वे बताती हैं कि 1979 में अमरीका आने के बाद न्यू जर्सी के हैरिसन शहर में रहते हुए उनके परिवार ने गरीबी मे दिन गुजारे.

वे कहती हैं, “मैं गरीबी में पली बढ़ी हूं और हमने तो अंग्रेजी भी यहीं आकर सीखी. मेरी मां न्यू जर्सी में एक फैक्टरी में काम करती थीं और मेरे पिता ने कुछ दिनों बाद एक छोटी सी परचून की दुकान खोली थी. लेकिन हमें हमेशा सिखाया गया कि हम न्याय के लिए आवाज उठाएं.”

शुरुआत

Image caption भैरवी देसाई अन्य टैक्सी यूनियनों से भी संपर्क में रहती हैं

भैरवी देसाई ने रट्गर्ज़ कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की और पढ़ाई खत्म करके जब उन्होंने टैक्सी चालकों के साथ काम करना शुरू किया तो उन्हें ख्याल आया कि इन चालकों की मांगों के लिए आवाज उठाने के लिए एक यूनियन बनाना जरूरी है. और तब उन्होंने ही न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स अलाएंस की शुरुआत की.

लेकिन जैसा अधिकतर भारतीय मूल के अमरीकी माता पिता बच्चों को परंपरागत पेशेवर करियर में देखना चाहते हैं तो क्या कभी उनके माता पिता ने उनसे कोई और करियर चुनने के बारे में नहीं कहा?

भैरवी कहती हैं, “मैं इस मामले में काफी भाग्यशाली रही कि मेरे माता-पिता ने कभी भी मुझे डॉक्टर या इंजीनियर वगैरह बनने के लिए जोर नहीं डाला. उन्होंने पूरी आजादी दी कि मैं अपना करियर खुद चुनूं. और उन्हें मुझ पर फख्र है.”

वे कहती हैं कि वे अपने दादा-दादी से भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने की कहानियां बचपन से सुनती रही थीं. और उनके मन में भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का शौक पनपा.

वे कहती हैं कि वे न्यू जर्सी में ऐसे इलाके में रहती थी जहां कर्मचारी वर्ग के लोग रहते थे और न उनके घरों में बच्चों को देखने वाली दाई होती थी और न ही दूसरी आराम की चीजें.

बचपन में वह अपने स्कूल में भी इसलिए चर्चित रहती थीं क्योंकि उनके स्कूल के अधिकतर बच्चे स्कूल छूटने के बाद उनके पिता की दुकान के आसपास समय गुजारते थे.

टैक्सी चालकों की समस्याएं

न्यूयॉर्क में करीब 50 हजार टैक्सियाँ चलती हैं, टैक्सी चालन का यह रोजगार भी करोड़ों डॉलर का उद्योग बन चुका है.

करीब 10 लाख लोग रोजाना टैक्सी का प्रयोग करते हैं और इसीलिए शहर की अर्थव्यवस्था में भी टैक्सी चालकों का बड़ा योगदान रहता है.

इन टैक्सी चालकों में अधिकतर लोग आप्रवासी लोग हैं जिनमें बहुत से टैक्सी चालक भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे विभिन्न देशों से आकर अमरीका में अपने और अपने परिवार को पालने के लिए मेहनत करते हैं.

इनमें से अधिकतर लोग ज्यादा शिक्षित नहीं होते और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी सीमित होता है. जिससे उन्हें कोई और काम ढूंढने में भी मुश्किल होती है.

लेकिन टैक्सी चालकों को टैक्सी चलाने से पहले ही टैक्सी हासिल करने के लिए ही हजारों डॉलर भरना पड़ता है. और शहर में टैक्सी इंडस्ट्री में चालकों को कई अन्य मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

भैरवी देसाई की संस्था न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स अलाएंस में इस समय सदस्य के तौर पर 15 हजार टैक्सी चालक हैं.

टैक्सी चालकों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए भैरवी देसाई बताती हैं, “टैक्सी चालकों का शोषण किया जाता है. उनके पास कोई लगातार कमाई का जरिया नहीं होता, कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं होता. उनको कोई छुट्टी नहीं मिलती. उनको कई मामलों में हिंसा का निशाना बनाया जाता है. इसके अलावा पुलिस और टैक्सी कमीशन की तरफ से अलग शोषण होता है.”

लेकिन टैक्सी चालकों की यह मुश्किलें कई वर्षों से जारी हैं. इन्हीं मुश्किलों को उजागर करने के लिए भैरवी देसाई ने 1998 में एक हड़ताल का ऐलान किया. और न्यूयॉर्क में उस दिन पूरे शहर में टैक्सी की हड़ताल हुई.

भैरवी देसाई उस हड़ताल के सफ़ल होने के बाद खबरों में छा गईं.

शक्ति

भैरवी कहती हैं कि इन टैक्सी चालकों के संगठित रहने से ही उनको शक्ति मिलती है. और इसमें वे विभिन्न देशों से आए लोगों को साथ मिलाकर उनके संघर्ष को आसान बनाने की कोशिश करती हैं.

Image caption न्यूयॉर्क में करीब 50 हजार टैक्सियाँ चलती हैं

वह कहती हैं, “मुझे तो भारत, पाकिस्तान और बंग्लादेश से आए इन टैक्सी चालकों को साथ में काम करते देख बहुत खुशी होती है और इन लोगों का मकसद एक है इसलिए साथ में काम करने में कोई मुश्किल भी नहीं होती है. सब एक दूसरे की मदद करने को तैयार रहते हैं.”

भैरवी देसाई को इतने वर्षों से टैक्सी चालकों को संगठित कर उनकी मांगों के लिए आवाज उठाने में उनकी मदद के लिए कई संस्थाओं की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है.

लेकिन वे कहती हैं कि इन टैक्सी चालकों द्वारा अपनाए जाने में महिला होने के कारण उन्हें कुछ समय लगा.

वे कहती हैं कि शुरू में कई ड्राइवर यह समझते थे कि वह कोई पत्रकार या किसी संस्था की कार्यकर्ता हैं और कई लोग उन्हे संजीदगी से नहीं लेते थे.

लेकिन वे कहती हैं कि उन्होंने अपना काम पूरे जोर-शोर से जारी रखा और धीरे-धीरे टैक्सी चालक, शहर के अधिकारीगण और यहां तक की पत्रकार भी उन्हें पूरी गंभीरता से लेने लगे. अब वह अमरीका के कई शहरों में टैक्सी चालकों की यूनियन बनाने में मदद भी करती हैं.

संबंधित समाचार