क्यों बढ़ रही है स्वालबार्ड में रुचि ?

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Image caption चीन से लेकर अमरीका तक जैसे देश उत्तरी ध्रुव पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते है

आर्कटिक द्वीप समूह में लगभग पूरे साल ही बेहद ठंड और अंधेरा होता है लेकिन नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप में लोगों की खास रुचि बनती दिख रही है.

बर्फ के पिघलने के साथ ही पर्यटक, व्यवसायी यहां तक की कई अंतरराष्ट्रीय राजनीतिज्ञ भी स्वालबार्ड की ओर रुख कर रहे हैं.

शाम के समय बर्फ में जमे इस द्वीप समूह की खूबसूरती देखते ही बनती है.

एक लंबे इतिहास का आंचल ओढ़े स्वालबार्ड द्वीप समूह अपनी खूबसूरती के लिए पर्यटकों का पसंदीदा स्थल बन गया है.

हालांकि आज जैसे हालात इस द्वीप समूह में है वैसे पहले नहीं थे.

अठ्ठारवीं शताब्दी में डच और डेनमार्क के कैदियों को सजा देने के लिए एक विकल्प के तौर पर स्वालबार्ड भेजा जाता था. उन्हें व्हेल मछली का शिकार करने वाली बड़ी नौकाओं को चलाने की सजा दी जाती थी.

इन देशों में सजा पाए ज्यादातर कैदी भी स्वालबार्ड की सर्दी में मौत पाने के विकल्प को चुनते थे.

बदलाव

लेकिन अब यहां के हवाई अड्डे पर उत्तरी ध्रुव पर घूमने के रोमांच की चाह रखने वाले पर्यटकों की भीड़ देखी जा सकती है.

एक पर्यटक ने कहा, "यहां पर एक नाइट क्लब है, सिनेमाहॉल है और नौकरियां भी है. एक सामाजिक जीवन जीने के लिए काफी कुछ है. ये सपनों में दिखने वाली दुनिया है. एक छोटे समुदाय के लिए ये बेहद शांतिपूर्ण जगह है."

पिछले कुछ वर्षों में स्वालबार्ड की शक्ल काफी बदली है. यहां छोटे बच्चों के लिए तीन स्कूल खुले है.

स्वालबार्ड में खास रूचि इसलिए भी है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग और ध्रुवीय तकनीक पर शोध के लिए दुनिया की इकलौती संस्था भी स्थापित की गई है.

यही कारण है कि चीन से लेकर अमरीका तक जैसे देश यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते है.

बर्फ पिघलने के साथ ही नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं जिससे संभावित तेल और गैस के भंडारों तक पहुंचना आसान बन जाएगा.

गतिविधियां

यूरोपीय संघ भी किसी मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता. यूरोपीय संघ के बड़े अधिकारी बैरोनेस एशटन भी अपने हेलिकॉप्टर से यहां पहुंची.

आर्कटिक पर्यावरण में ओजोन की मात्रा आंकने के लिए बने एक गुब्बारे का उन्होंने उद्घाटन किया.

बैरोनेस एशटन ने कहा, "यहां का पर्यावरण अदभुत और बेहद खूबसूरत है. आप यहां व्यवसायिक गतिविधियां भी देख सकते है जिसकी मैने उम्मीद नहीं की थी. यहां एक तरह से दोहरी सहायता देने की कोशिश की जा रही है जिससे यहां का प्रयावरण संरंक्षित रहे और व्यवसायिक तौर पर भी यहां का विकास हो सके."

पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धताएं दिखाने के लिए कई राजनीतिज्ञ, फिल्मी सितारे, और चर्चित लोग स्वालबार्ड में पहुंच रहे है.

ये कोई आश्चर्य नहीं है कि जो वैज्ञानिक यहां रहकर शोध कर कर रहें है उन पर राजनीतिक दबाव बना रहता है.

प्रोफेसर डो बेन कहते हैं, "दुनिया आर्कटिक के महत्व को समझ रही है. एक इलाके के तौर पर पहचान के साथ ही वैश्विक स्थिती पर भी इसके असर को अहमीयत दी जा रही है. दरअसल आर्कटिक के मुद्दों को लेकर ज्यादातर लोगों के खुद की सोच होती है, कुछ की नजर यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर होती है तो कुछ यहां के कमजोर पर्यावरण को संरक्षित करने की सोचते है. एक वैज्ञानिक होने के नाते हमें हर तरह के दबाव से आजाद रहकर स्वतंत्र शोध करनी चाहिए ताकी सच सामने आ सके."

उत्तरी ध्रुव में आधे साल तक रात रहती है और बाकी साल दिन. ये लोग कई महीनों की रात के बाद आए दिन का स्वागत कर रहें हैं.

ये उम्मीद करना बेमानी नहीं होगी कि दुनिया के सबसे उत्तरी कोने में बसा ये द्वीप अगले कई वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय जगत की रूचि बरकरार रहेगी.

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