तेल की कीमतें तर्कसंगत होनी चाहिए: प्रधानमंत्री

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Image caption पेट्रोल के दामों के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह डीजल के दामों पर से नियंत्रण हटाने की बात कही.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ाने की जरूरत की ओर इशारा किया है.

उन्होंने भारत में पेट्रोल आदि के दामों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से तर्कसंगत बनाने की जरूरत की बात कही है. लेकिन साथ ही उन्होंने आम आदमी को इसके असर से बचा रखने की बात भी की.

शनिवार को भटिंडा में 20 हजार करोड़ रूपये की लागत से बनी गुरु गोबिंद सिंह रिफाइनरी को देश को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा," देश के कुल आयात में पेट्रोलियम पदार्थों की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल पर दबाव डाल रही हैं."

मनमोहन सिंह ने कहा, “हमें दामों को तर्कसंगत बनाना होगा और साथ ही ये सुनिश्चित करना होगा कि गरीब और जरूरतमंद पर इनका प्रभाव न पड़े.”

सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले एक साल से डीजल, रसोई गैस और मिट्टी की तेल के दाम नहीं बढ़ाए हैं हालांकि इस दौरान कच्चे माल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है.

प्रधानमंत्री का कहना था , “हमें उचित दामों पर ऊर्जा आपूर्ति की जरूरत है. कच्चे तेल और गैस के घरेलू स्रोत हमारी तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के लिए काफी नहीं हैं."

जून 2010 में पेट्रोल पर से सरकारी नियंत्रण हटने के बाद पिछले सप्ताह सरकार ने डीजल से भी सरकारी नियंत्रण हटाने की बात कही थी.

फिलहाल डीजल, रसोई गैस और मिट्टी के तेल की कीमतें सरकार तय करती है.

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