क्रिकेट, फेसबुक, ट्विटर:तालिबान का नया प्रचार अभियान

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Image caption समर्थक जुटाने के लिए तालिबान ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.

क्या आप जानते हैं कि तालिबान की वेबसाइट के सवाल-जवाब भाग में आपको चरमपंथी हमलों में मारे गए आम नागरिकों की संख्या से लेकर लड़कियों के स्कूल और क्रिकेट तक के बारे में जानकारी मिल सकती है?

तालिबान के इस सबसे नए आक्रामक प्रचार अभियान का विशलेषण कर रहे हैं बीबीसी अफगान सेवा के दावूद आजमी.

तालिबान की वेबसाइट का ये नया हिस्सा न केवल पहले से ज्यादा पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है बल्कि ये उनके प्रचार अभियान का नया हथियार भी बन रहा है.

इस चरमपंथी संगठन ने सवाल-जवाब भाग इस साल फरवरी के मध्य में चालू किया है और तब से, शांति वार्ता से लेकर खेल जैसे विभिन्न विषयों पर सवालों का सिलसिला जारी है.

'वॉयस ऑफ जिहाद' नाम की इस वेबसाइट पर ये नई सुविधा लाने का मकसद सवाल पूछने वाले अफगानियों से सीधे संपर्क बनाकर उनका दिल जीतना है.

इस पन्ने का शीर्षक है 'आपके सवाल और जबिहुल्ला मुजाहिद' के जवाब और ये दुनिया भर से पाठकों को सवाल पूछने के लिए आमंत्रित करता है. इस पर अब तक 120 सवालों के जवाब दिए जा चुके हैं. जवाब देने वाले तालिबान प्रवक्ता जबिहुल्ला मुजाहिद समय-समय पर पत्रकारों को ईमेल और एसएमएस के जरिए वक्तव्य भेजते रहते हैं.

लेकिन माना जाता है कि जबिहुल्ला एक फर्जी नाम है और दरअसल ये पन्ना कई लोग संचालित करते हैं.

एक सवाल के जवाब में वो लिखते हैं कि वो मध्यम आयुवर्ग का शादीशुदा व्यक्ति हैं लेकिन 'सुरक्षा कारणों' से अपने प्रांत का नाम नहीं बता सकते.

एक और व्यक्ति उससे मिलना चाहता है लेकिन जबिहुल्ला कहते हैं कि अफगानिस्तान के सुरक्षित होने के बाद अगर वो जिंदा रहा तो अपना चेहरा पूरे देश को दिखाएँगे.

ज्यादातर सवाल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में रहने वाले पाठकों के, पश्तो और दरी भाषा में होते हैं. अंग्रेजी में कुछ सवाल यूरोप और दुनिया के और हिस्सों में रह रहे अफगान भी भेजते हैं.

'विरोध भी'

तालिबान की वेबसाइट कई साल से चल रही है और अपना संदेश फैलाने के लिए संगठन इसका व्यापक इस्तेमाल करता रहा है. इस पर पाठन सामग्री के साथ ही विडियो और ऑडियो भी उपलब्ध है.

लेकिन सवाल-जवाब जैसी परस्पर क्रिया वाली सुविधा साबित करती है कि लोगों का दिल जीतने के लिए कैसे तालिबान नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है. यही नहीं, संगठन अब फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर भी मौजूद है.

एक प्रश्न के उत्तर में जबिहुल्ला लिखते हैं कि तालिबान के बारे में खबरों पर नजर रखने के लिए संगठन फेसबुक और यू ट्यूब पर कड़ी नजर रखता है.

वेबसाइट के कई विरोधी भी हैं और अब तक इसे कई बार हैक किया जा चुका है जिनमें हैकर तालिबान का विरोध करते हैं. इनमें हैकरों ने तालिबान द्वारा हिंसा की वारदातों की खबरें और महिलाओं को प्रताड़ित करने वाली तस्वीरों के खिलाफ संदेश भेजे हैं.

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Image caption पाठकों ने वेबसाइट पर आत्मघाती और बम हमलों में मारे गए नागरिकों की संख्या के बारे में सवाल पूछे हैं.

हालांकि कई सवाल तालिबान समर्थकों के भेजे हुए लगते हैं लेकिन कुछ सवाल ऐसे भी होते हैं जिनसे लगता है कि वो इस चरमपंथी संगठन के नकारात्मक पहलू को उजागर करने के लिए किए गए हैं.

जैसे तालिबान हमलों में मारे गए आम नागरिकों की संख्या, संगठन की पाकिस्तानी प्रशासन से निकटता और शिक्षा से वंचित किए जा रहे अफगान बच्चों के बारे में सवाल.

हसीब-उर-रहमान नाम से एक प्रश्नकर्ता ने पूछा है, "तुम्हें नहीं लगता कि प्रतिदिन आत्मघाती और बम हमलों में निर्दोष लोगों का मारना पाप है?"

प्रवक्ता का जवाब था कि तालिबान लड़ाकों को साफ तौर पर निर्देश हैं कि वे हर हाल में आम नागरिकों को नुकसान न होने दें. लेकिन अगर फिर भी ऐसा होता है, तो ये जानबूझ कर नहीं किया जाता.

ये सवाल, तालिबानी विचारधारा से जुड़े अफगान लोगों की कुछ मुख्य चिंताओं को दर्शाते हैं. और फिलहाल ये कहना मुश्किल है कि इनके जवाबों पर लोग यकीन करते हैं या उन्हें स्वीकार भी करते हैं या नहीं.

ऐसा भी महसूस होता है जैसे इस नए माध्यम के जरिए कुछ खास तरह के प्रश्नों के जवाब दिए जाते हैं. कई बार पूरे सवाल का जवाब नहीं दिया जाता.

एक प्रश्न में कहा गया कि तालिबान सिर्फ वही सवाल छापते हैं जिनसे उनका मकसद पूरा होता है. जवाब कुछ यूं था, " जाहिर है कि हम उन सवालों को नहीं छापते जो हमारी क्षेत्रीय अखंडता, एकता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हों, जिनसे लोगों में भेद-भाव बढ़े या फिर हमारे धार्मिक मूल्यों के खिलाफ हों."

लेकिन इस नए प्रयोग से तालिबान को फायदा भी हो रहा है. कुछ लोग तालिबान में भर्ती होने के तरीके के बारे भी जानकारी मांगते हैं.

क्रिकेट प्रेमी

इस सुविधा से तालिबान को एक व्यक्तित्व मिल रहा है और उसे इंटरनेट उपभोक्ताओं यानी वर्च्यूल वर्ल्ड में एक पहचान बनाने में मदद मिल रही है.

Image caption वेबसाइट पर सवाल-जवाब भाग में तालिबान ने लिखा है कि वो क्रिकेट का समर्थन करते हैं.

कुछ पाठक खेलों के बारे में भी सवाल भेजते हैं. एक का सुझाव था कि ज्यादातर हिंसा के बारे खबरें देने वाली इस वेबसाइट पर खेल समाचार भी होने चाहिए.

अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की सफलता की बात करते हुए एक और पाठक ने पूछा, "तालिबान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को किस तरह से देखती है?"

जबिहुल्ला का जवाब था, "हम सब उन खेलों को बढ़ावा देते हैं जो सेहत के लिए अच्छे हों और जिनका महान उद्देश्य हो. तुम्हें और बाकी खेल प्रेमियों को पता होना कि जब तालिबान सत्ता में था तब उसने क्रिकेट को आधिकारिक दर्जा दिया था."

ये सब तालिबान का बढ़ता आत्मविश्वास और उनके मीडिया प्रचार की तीव्रता दर्शाता है.

लेकिन वेबसाइट की हैकिंग से पता चलता है कि इंटरनेट पर तालिबान की बढ़ती मौजूदगी ने उसके विरोधियों का भी ध्यान खींचा है और इस विरोध के कम होने संभावना नहीं है.

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