ऑपरेशन ओसामा के पीछे का दिमाग

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Image caption ओबामा ने मैकरैवन का शुक्रिया अदा किया

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक ख़ास मुलाक़ात कर उस शख़्स का शुक्रिया अदा किया है, जिसने ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई की योजना तैयार की थी.

ओबामा ने गुरुवार को अमरीकी नौसेना अधिकारी वाइस एडमिरल विलियम मैकरैवेन को व्हाइट हाउस में निमंत्रित किया था.

ओबामा ने इतने सफल मिशन की योजना तैयार करने के लिए एडमिरल मैकरैवेन को धन्यवाद दिया.

अमरीकी राष्ट्रपति ने दूसरे दिन मिशन में शामिल हुए दूसरे सैनिकों से मुलाक़ात की. लेकिन आख़िर वाइस एडमिरल विलियम मैकरैवेन कौन हैं?

निर्देश

ख़बरों के मुताबिक़ राष्ट्रपति ओबामा से बिन लादेन के ऐबटाबाद परिसर पर गुप्त हमले की इजाज़त मिलने के बाद तत्कालीन सीआईए प्रमुख लियोन पनेटा के ज़हन में इस मिशन को अंजाम देने के लिए एक ही आदमी का नाम था.

पनेटा ने कहा, "एडमिरल मैकरैवेन को मेरा सीधा निर्देश था, जाएं और बिन लादेन को पकड़ें और अगर वो वहाँ मौजूद नहीं हैं तो फ़ौरन वहाँ से निकलें."

न्यूयार्क टाइम्स अख़बार ने कहा है कि ओसामा के घर पर हमले की तैयारी का ज़िम्मा पनेटा ने फ़रवरी में मैकरैवेन के हवाले किया था. अमरीका ने इसे गुप्त सेना ऑपरेशन के इतिहास में सबसे कामयाब कार्रवाई बताया है.

एडमिरल मैकरैवेन अफ़गानिस्तान में संयुक्त कमान के प्रमुख हैं. ओसामा के ख़िलाफ़ किए गए ऑपरेशन में अमरीकी नौसेना के नेवी सील्स को लगाया गया था. कार्रवाई में ऐसे हेलिकॉप्टरों यूएच-60 का इस्तेमाल किया गया था, जिन्होंने पाकिस्तानी सेना के रडार को चकमा दे दिया.

करियर

पचपन साल के मैकरैवेन के बारे में कुछ अधिक पता नहीं है. वे कभी-कभार ही सुर्ख़ियों में आते हैं.

मूल रूप से टैक्सस के सैन अनतोन्यो के रहने वाले मैकरैवेन ने प्रारंभिक शिक्षा रूज़वेल्ट स्कूल से प्राप्त की. कॉलेज की पढ़ाई के लिए उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली.

उन्होंने पत्रकारिता के विषय में ग्रेजुएशन किया था. हालांकि उन्होंने बाद में सेना में जाने का निर्णय किया लेकिन पत्रकारिता की उनकी डिग्री व्यर्थ नहीं गई. उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की कुछ चुनिंदा लड़ाइयों पर एक विश्लेषणात्मक पुस्तक लिखी है.

ये पुस्तक स्पेशल ऑपरेशन कमांडर्स के लिए एक अहम किताब मानी जाती है. एक पूर्व कमांडर ने कहा, "वो अब तक के सबसे तेज़ तर्रार नेवी सील हैं."

उन्होंने 1991 के इराक़ युद्ध में भी हिस्सा लिया था. हाल के वर्षों में वो अफ़गानिस्तान में कमान संभालते रहे हैं.

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