क्या पार्किंग वैश्विक समस्या बन गई है?

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Image caption कार पार्किंग दुनिया भर में बड़ी समस्या बनती जा रही है

एक नई किताब के लेखक की मानें तो आने वाले दिनों में लोगों को कार पार्किंग को लेकर अपने रवैए में बदलाव करना होगा.

लेखक के मुताबिक दुनिया भर में पार्किंग का मुद्दा बेहद गंभीर होता जा रहा है और वास्तुविदों को ऐसे पार्किंग स्थलों को डिजाइन करना चाहिए जो कि सुविधाजनक हों, कम जगह घेरने वाले हों और साथ में पर्यावरण के अनुकूल भी हों.

इस समय करीब 60 करोड़ कारें हैं और इनकी संख्या बड़ी तेजी से बढ़ भी रही है, खासकर चीन जैसे दुनिया के बढ़ते हुए बाजारों में.

इस किताब के लेखक और मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर एरन बेन-जोसेफ के मुताबिक अकेले अमरीका में कार पार्किंग में करीब नौ हजार वर्ग किलोमीटर के बराबर जमीन खप जाती है. ये पूर्टो रिको जैसे द्वीप के कुल क्षेत्रफल के बराबर है.

अमरीका में कुछेक शहरों को छोड़कर जमीन की कोई किल्लत नहीं है.

अमरीका में शॉपिंग मॉल्स, सिनेमाघर, स्टेडियम, फैक्ट्रियों और दफ्तरों के चारों ओर जमीन का एक बड़ा हिस्सा डामर से ढका मिल जाएगा, जो कि पार्किंग क्षेत्र होता है.

‘रीथिंकिंग अ लॉट’ नामक अपनी किताब में प्रोफेसर बेन-जोसेफ इस बात पर जोर देते हैं कि कार पार्किंग को पर्यावरण के प्रति ज्यादा जवाबदेह और खूबसूरत होनी चाहिए.

तो सवाल उठता है कि ऐसा करने के लिए क्या किया जा सकता है?

'नीरस कार पार्किंग एक धोखा'

इसके लिए सबसे पहले बहुमंजिली कार पार्किंग के बारे में सोचा जा सकता है, जो कि शहर की खूबसूरती को भी बढ़ाएगा.

लंदन में पुरस्कार जीतने वाली कार पार्किंग के डिजाइनर एरिक कुहने का कहना है कि नीरस पार्किंग स्थल लोगों के साथ धोखा करना जैसा है.

एरिक कुहने ने लंदन के ब्ल्यू वॉटर शॉपिंग सेंटर की कार पार्किंग को डिजाइन किया था.

अपनी किताब में प्रोफेसर बेन-जोसेफ लिखते हैं कि जब ऑटोमोबाइल की खोज हुई थी, उस वक्त लोग अपनी गाड़ियों को घोड़ों के अस्तबल जैसी जगहों पर रखते थे.

पहली पार्किंग लॉस एंजिलिस में

ऐसा माना जाता है कि दुनिया का पहला पार्किंग स्थल साल 1917 में एक इटालियन ने लॉस एंजिलिस शहर में बनवाया था.

उसके अगले साल शिकागो स्थित ला सेले होटल में पहला बहुस्तरीय पार्किंग स्थल का निर्माण हुआ.

अमरीका में ही वर्ष 1920 में पहले स्वचालित कार पार्किंग का निर्माण हुआ.

लेकिन वास्तव में पहली रोबोटिक कार पार्किंग का निर्माण 1970 में जापान में हुआ, जहां जगह की कमी के चलते पार्किंग बहुत बड़ी समस्या है.

रोबोटिक सिस्टम हालांकि काफी खर्चीला है, लेकिन इसमें एक जगह पर बहुत सी कारों को आसानी से पार्क किया जा सकता है. इस पर करीब बीस लाख पौंड का खर्च आता है.

ब्रिटेन स्थित एक कंपनी ने पार्किंग के लिए एक नई तकनीक विकसित की है जिसमें सेंसर्स के जरिए ये पता लगाया जा सकता है कि पार्किंग में कितनी जगह बची है और कौन सी जगह कितनी देर में खाली हो जाएगी.

भूमिगत या छत पर कार पार्क बनाएँ

ऐसा देखना में आया है कि डामर युक्त सड़कें सूर्य की किरणें अवशोषित करके शहरी इलाकों में काफी गर्मी पैदा करती हैं.

इस गर्मी या ऊष्मा को इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा रहा है.

एरीजोना में इस तरह की एक परियोजना पर काम चल रहा है.

इसके अलावा वैज्ञानिक डामर की वजह से होने वाली गर्मी को कम करने पर भी विचार कर रहे हैं और इस पर शोध कार्य जारी है.

किताब में सुझाव दिया गया है कि भूमिगत कार पार्क या फिर छतों पर कार पार्किंग ये कुछ ऐसे तरीके हैं जो कि जमीन की भी बचत करेंगे और पर्यावरण की दृष्टि से भी उपयुक्त होंगे.

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