वर्षों से टूटी गर्दन का पता नहीं था सैनिक को

फिलिप लोवडे
Image caption फिलिप लोवडे की गर्दन चालीस साल से टूटी हई है लेकिन वे कई क्लबों के लिए फुटबॉल खेलते रहे हैं.

उत्तरी आयरलैंड और खाड़ी देश में तैनात रहे 59 वर्षीय सैनिक फिलिप लोवडे की गर्दन 40 साल से टूटी हुई है. लेकिन उन्हें पता ही नहीं था कि उनकी गर्दन टूटी हुई है.

फिलिप लोवडे की गर्दन उस वक्त टूट गई थी जब वह 16 साल की उम्र में सेना की तरफ से फुटबॉल खेल रहे थे. फुटबॉल खेलते समय एक खिलाड़ी उनके उपर गिर गया था.

खिलाड़ी के गिरने से उन्हें चोट लगी लेकिन एक्स-रे किए जाने पर गर्दन की हड्डी में हुए फ्रेक्चर का तभी पता ही नहीं चला.

ब्रिजगेंड के पूर्व सैनिक लोवडे को इसकी जानकारी तब मिली जब वो कंधे में लगी चोट का एमआरआई कराने के लिए अभी कुछ दिन पहले अस्पताल पहुंचे.

खेलते हैं फुटबॉल

सक्रिय जीवन शैली में भरोसा रखने वाले फिलिप लोवडे आज भी कई क्लबों की तरफ से फुटबॉल खेलते हैं. यही कारण है कि उन्हें गर्दन में हुए फ्रैक्चर से होने वाली पीड़ा का पता नहीं चल पाया.

डॉक्टरों ने फिलिप लोवडे को बताया कि उन्हें अब आजीवन टूटे हुए गर्दन के साथ ही जीना पड़ेगा क्योंकि डॉक्टर इसका इलाज खोजने में असमर्थ हैं.

पूर्व सैनिक फिलिप लोवडे का कहना है, “यह अविश्वसनीय सा लगता है कि मैं अब भी जिंदा हूं और घूम-टहल रहा हूं.”

मजबूत हैं नसें

लोवडे ने कहा, “मैं सिर्फ यह सोचता हूं कि गर्दन की मजबूत नसों की बदौतल ही मेरा सर कंधे पर है और मैं 20 वर्षों तक सेना में रहने के अलावा अभी भी विभिन्न कल्बों के लिए फुटबॉल खेल पा रहा हूं.”

उस घटना के बारे में पूछे जाने पर लोवडे ने बताया कि मुझे तो बस इतना याद है कि उस समय गोल करने के चक्कर में दौड़ते हुए मैं बॉंउड्री लाइन पर चला गया था और वहां एक विपक्षी खिलाड़ी मुझसे टकराकर मेरे उपर ही गिर गया था.

मुझे कुछ टूटने की आवाज सुनाई पड़ी थी और फिर मुझे अस्पताल ले जाया गया था.

पता नहीं था

जहां तक मेरी बात है, सबकुछ ठीक ही था, लेकिन अगर अब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो पता चलता है कि उस समय एक्स-रे आज की तरह साफ-सुथरा नहीं दिखाई पड़ता था.

उसने कहा कि सेना में मुझे बताया गया कि अगर मुझे नौकरी जारी रखनी है तो बोझा उठाना पड़ेगा.

पूर्व सैनिक ने बताया, “सेना में भर्ती होते समय मैं कोई दुबला-पतला आदमी नहीं था. जब मैं वहां भर्ती हुआ था तो मेरी गर्दन 22 इंच की थी. मेरे गर्दन की नसें लंबी और मजबूत होती चली गई और वह मेरी गर्दन और सर को सपोर्ट करता रहा.

उनका कहना है कि गर्दन की मजबूत नसें उसके स्पाईन के भार को अपने उपर ले लिया. लोवडे ने बताया कि उन्हें तो अस्पताल जाने से पहले तक पता ही नहीं था कि उनकी गर्दन टूटी हुई है.

पूर्व सैनिक फिलिप लोवडे ने कहा, “जब मैंने अपने कंधे और गर्दन का एमआरआई स्कैन करवाया तो डॉक्टर ने पूछा कि क्या आपको पता है कि आपकी गर्दन टूटी हुई है, इसपर मैंने जवाब दिया नहीं.”

अभी भी है फ्रैक्चर

उनका कहना था, “फ्रैक्चर आज भी है और अब साफ-साफ दिख रहा है. यह डरावना है लेकिन मुझे खुशी है कि मैं जिंदा हूं.”

हालांकि ट्रॉमा होने के चलते नींद की बीमारी से जुझ रहे लोवडे मरीजों के लिए शिक्षा कार्यक्रम (इपीपी) से ट्रेनिंग ले रखी है.

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