झारखंड से भाजपा के अहलूवालिया राज्यसभा चुनाव हार गए

Image caption गुरूवार को हुए राज्यसभा के चुनाव में झारखंड से बीजेपी के एसएस अहलूवालिया हार गए हैं.

भारतीय जनता पार्टी के नेता एसएस अहलूवालिया को गुरूवार को झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है. जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के प्रत्याशी विजयी घोषित हुए.

राज्य की दो सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रदीप कुमार बालमुचू को सबसे ज्यादा 25 वोट पड़े. जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा के संजीव कुमार को 23 वोट मिले और एसएस अहलूवालिया को मात्र 23 वोट मिले.

नतीजों के बाद अहलूवालिया ने कहा कि उन्होंने विधायकों की खरीद फरोख्त करने की कोशिश नही कि इसीलिए उनकी हार हुई.

इस बारे में अहलूवालिया का कहना था, ''तीनों उम्मीदवारों में मैं अकेला था जो शुरू से पहले पायदान पर था और बाकी उम्मीदवार पीछे थे. लेकिन वे कैसे आगे आए, क्यों आए, किसके माध्यम से आए ये जांच का विषय है.''

गौरतलब है कि पहले भाजपा ने अंशुमन मिश्रा को समर्थन देने की घोषणा की थी लेकिन यशवंत सिंहा और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के विरोध के कारण अंशुमन मिश्रा ने अपना नाम वापस ले लिया था.

बाद में पार्टी ने एसएस अहलूवालिया को अपना उम्मीदवार बनाया.

लेकिन भाजपा की हार और कांग्रेस तथा झामुमो की जीत से राज्य सरकार के भविष्य पर भी सवाल उठने लगें हैं.

रांची से निकलने वाले अखबार प्रभात खबर के न्यूज एडिटर सत्यप्रकाश का मानना है कि अहलूवालिया की हार प्रदेश ईकाई के बजाए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की विफलता है.

सत्यप्रकाश के मुताबिक कांग्रेस लंबे समय से प्रदेश की सत्ता हासिल करने के लिए प्रयासरत है और राज्यसभा में उसकी जीत उसी दिशा में एक कदम है.

सत्यप्रकाश का कहना है कि आने वाले दिनों में झारखंड में सत्ता के समीकरण में बदलाव आ सकता है.

झाविपा ने वोट नहीं डाले

इस चुनाव में 68 विधायकों ने हिस्सा लिया जबकि राज्य विधानसभा में सदस्यों की संख्या 82 है. बाबू लाल मरांडी के नेतृत्ववाली झारखंड विकास पार्टी (झाविपा) के 11 विधायकों और भाकपा माले के एक मात्र सदस्य विनोद कुमार सिंह ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

हालांकि भारतीय जनता पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा मिलकर राज्य में सरकार चला रही है और दोनों पार्टियों के 18-18 विधायक हैं.

झामुमो शुरू से भाजपा पर दबाव बना रही थी कि वो अपना उम्मीदवार ना खड़ा करें.

झामुमो ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को एक पत्र भी लिखा था लेकिन भाजपा नहीं मानी और दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार खड़ा किए थे.

विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर पिछले महीने 30 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव को रद्द कर दिया गया था. फिर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार गुरूवार को हुए मतदान में राष्ट्रीय जनता दल के सभी पांच और सभी सात निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस को वोट दिया.

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