ब्रिटेन में बौद्ध भिक्षु बलात्कार के दोषी पाए गए

पहलगाम सोमारत्ना
Image caption ब्रिटेन में इस मुकदमे को लेकर काफी चर्चा हो रही थी.

ब्रिटेन की एक अदालत ने देश के एक प्रमुख बौद्ध भिक्षु पहलगाम सोमारत्ना को बलात्कार और अश्लील हरकतें करने का दोषी करार दिया है.

पश्चिमी लंदन के आइसेलवर्थ क्राउन कोर्ट ने पहलगाम सोमारत्ना को बलात्कार के एक और अश्लील हरकत करने के छह मामले में दोषी पाया है.

अदालत इस मामले में एक जून 2012 को सजा सुनाएगी.

पहलगाम सोमारत्ना थेम्स बौद्ध मंदिर के मुख्य पुजारी हैं और ये मंदिर लंदन में रहने वाले बौद्धों के लिए एक लोकप्रिय प्रार्थना स्थल है.

दो पीड़ितों ने आरोप लगाए थे कि पहलगाम सोमारत्ना ने 70 और 80 के दशक में उनके साथ दुर्व्यवहार किया था.

उनके आरोप के बाद मामले की जांच की गई थी. अभियोजन पक्ष की प्रमुख गवाह और पीड़ित ने बयान दिया था कि 80 के दशक में उनके साथ क्या हुआ था.

एक दूसरे गवाह ने उस घटनाक्रम का पूरा विवरण देते हुए बयान दिया था कि 80 के दशक में जब वो केवल नौ या दस की थीं तभी से उनके साथ यौन प्रताड़ना शुरू हो गई थी.

गवाह

अदालत में गवाहों ने कहा कि ज्यादातर अश्लील हरकतें मंदिर में रविवार के दिन बच्चों के क्लास के बाद होतीं थीं.

पहलगाम सोमारत्ना अक्सर उन क्लासों में जाया करते थे जहां चार से 16 साल की उम्र के लगभग 20 बच्चे हर सप्ताह क्लास करने आते थे.

गवाहों ने कहा कि मंदिर के मामले में विचार विमर्श करने के बहाने कई बार उन्हें पहलगाम सोमारत्ना के कमरे में अकेले बुलाया जाता था.

एक गवाह ने अदालत को बताया कि किस तरह से उन्हें पुजारी के कमरे में ले जाया गया और उन्हें पुजारी ने अपनी गोद में बैठाया था.

एक दूसरे गवाह ने अदालत से कहा कि 70 के दशक में उनके साथ पुजारी ने बलात्कार किया था.

इस मामले की सुनवाई के कारण ब्रिटेन के बौद्ध भी आपस में बंट गए थे.

मुकदमें की सुनवाई के दौरान पुजारी मंदिर के सभी धार्मिक और सामाजिक कार्यों में शामिल रहते थे और ऐसे कई आयोजनों में बच्चे भी शामिल होते थे.

पहलगाम सोमारत्ना के कई शिष्यों ने उनके अच्छे आचरण के पक्ष में बयान दिया और लंदन स्थित श्रीलंका के उच्चायोग ने भी अदालत में पुजारी के समर्थन में एक बयान दिया था.

ऐसा माना जाता है कि पुजारी सोमारत्ना श्रीलंका के कई शक्तिशाली नेताओं के बहुत करीबी हैं.

अप्रैल महीने में थेम्स बौद्ध मंदिर में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में श्रीलंका सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री और विपक्ष के उपनेता ने हिस्सा लिया था.

कहा जाता है कि मुकदमें की सुनवाई के दौरान पहलगाम सोमारत्ना के समर्थकों ने दो पीड़ितों पर बहुत दबाव बनाया था और कथित तौर पर उन्हें धमकी भी दी गई थी.

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