अंतिम समय में 'निराश' थे लादेन

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Image caption दस्तावेज ओसामा बिन लादेन की कई चिंताओं को जाहिर करते हैं

अमरीकी सेना के अनुसार पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने से मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि लादेन कमजोर पड़ते जा रहे अपने संगठन को लेकर हताश थे.

लादेन के घर पर कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए कुछ चुनिंदा दस्तावेजों को यूएस मिलिटरी एकेडेमी कम्बैटिंग टेरेरिज्म सेंटर ने ऑनलाइन जारी किया है.

इनसे पता चलता है कि अल कायदा नेता इस बात को लेकर काफी चिंतित थे कि उनके कई वरिष्ठ सहयोगी मारे गए हैं और शायद अब उनका संगठन नहीं चल पाए.

छह हजार से ज्यादा दस्तावेजों में से अभी 17 जारी किए जा रहे हैं. इन 175 पन्नों में वो पत्र भी शामिल हैं, जो ओसामा बिन लादेन अपने साथियों को लिखते थे. इसके अलावा लादेन की हाथ से लिखी डायरी भी शामिल है.

जारी किए गए दस्तावेज सितंबर 2006 से अप्रैल 2011 तक के हैं. इनमें अल कायदा के अन्य नेताओं के पत्र भी शामिल हैं.

बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का कहना है कि इन दस्तावेजों को वाजिब संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

संवाददाता के अनुसार ये अमरीका के हित में है कि वो लादेन को एक विफल नेता के रूप में दिखाए ना कि मजबूत विरोधी समझे जानेवाली एक ताकत के रूप में.

चिंतित लादेन

ये दस्तावेज ओसामा बिन लादेन की चिंताओं को जाहिर करते हैं. लादेन इस बात को लेकर चिंतित थे कि जिहाद की विचारधारा के कारण मुसलमान अलग-थलग हो रहे हैं.

उन्होंने इस्लामिक जगत में हमले न करने की भी सलाह दी थी. इन दस्तावेजों से पता चलता है कि वे अमरीका पर ही ध्यान केंद्रित रखने की बात करते थे.

2010 के एक पत्र में वे - पिछली गलतियों के सुधार के लिए एक नई शुरूआत - का उल्लेख करते हैं.

इसमें लिखा है,"ऐसा करके, हम, इंशाअल्लाह, उस बड़े तबके के खोए भरोसे को दोबारा हासिल कर लेंगे जिनका जिहादियों में भरोसा खत्म हो चुका है".

अप्रैल 2011 के एक पत्र में लादेन अरब देशों में हुई क्रांति की चर्चा करते हैं और इसे महत्वपूर्ण घटना माना.

कुछ दस्तावेज ये भी इशारा करते हैं कि संगठन के ईरान के साथ तनावपूर्ण रिश्ते थे और अल कायदा बंदियों की रिहाई के मुद्दे को लेकर ईरान के रूख से नाखुश था.

पाकिस्तान

मगर इन दस्तावेज़ों में पाकिस्तानी सत्ता की ओर से किसी तरह के समर्थन का कोई जिक्र नहीं मिलता जहाँ लादेन नौ वर्ष तक रहे थे.

दस्तावेजों में "भरोसेमंद पाकिस्तानी भाइयों" का जिक्र है, मगर एक दस्तावेज से पता चलता है कि लादेन पाकिस्तानी खुफिया तंत्र को लेकर सतर्क थे.

उन्होंने पाकिस्तान जानेवाले अपने रिश्तेदारों को निर्देश दिए थे कि वे ये देख लें कि पाकिस्तानी जासूस उनका पीछा तो नहीं कर रहे.

कुछ अन्य दस्तावेज़ों में कहा गया है कि लादेन ने चरमपंथियों को ऐसे मौकों की ताक में रहने के लिए कहा था जिससे कि वे राष्ट्रपति ओबामा या जेनरल डेविड पेट्रियस को उनके पाकिस्तान या अफगानिस्तान दौरे के समय मार सकें.

मगर लादेन ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे उपराष्ट्रपति जो बाइडेन की हत्या करने की परवाह ना करें क्योंकि वे राष्ट्रपति बनने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं क्योंकि ऐसा हुआ तो अमरीका संकट में फँस जाएगा.

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