ब्रिटेनः चुनाव में गठबंधन को झटका

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Image caption लेबर नेता एड मिलिबैंड ने इन परिणामों को सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ संदेश बताया है

ब्रिटेन में इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड में हुए स्थानीय चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है जबकि विपक्षी लेबर पार्टी की जबरदस्त जीत हुई है.

लेबर पार्टी ने अभी तक 550 से अधिक नई सीटों पर जीत पाई है जबकि सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख दल कंजर्वेटिव पार्टी की 330 और उसकी सहयोगी लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी की 163 सीटें उनके हाथों से निकल गई हैं.

मतगणना अभी जारी है. देश भर में कल यानी गुरूवार को कुल 181 काउंसिलों की 4700 सीटों के लिए चुनाव हुआ था जिनमें अभी स्कॉटलैंड के परिणाम आने बाकी हैं.

काउंसिलों के अतिरिक्त कल राजधानी लंदन में भी महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय के चुनाव हुए थे. लंदन के मेयर पद और लंदन की एसेम्बली की मतगणना अभी चल रही है.

ताजा रूझानों के अनुसार लंदन में वर्तमान कंजर्वेटिव मेयर बोरिस जॉन्सन अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी लेबर पार्टी के नेता केन लिविन्ग्स्टन से आगे चल रहे हैं मगर लंदन असेंबली में लेबर पार्टी आगे है.

स्थानीय चुनावों में अपनी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद ब्रिटेन के विपक्षी दल लेबर पार्टी के नेता एड मिलिबैंड ने कहा है कि ये परिणाम दिखाते हैं कि उनकी पार्टी अपना खोया आधार फिर हासिल कर रही है.

लेबर नेता ने कहा कि ये चुनाव सरकार के लिए एक नींद से जगानेवाले एक अलार्म की तरह की घटना है ताकि सरकार अपनी नीतियों को बदले मगर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इसे खारिज कर दिया है.

नीतियाँ

लेबर नेता एड मिलिबैंड ने कहा,"हर जगह लोगों ने ये कह दिया है कि वे सरकार जो कर रही है उसे पसंद नहीं करते. इस सरकार ने बदलाव का वादा किया था और उन्होंने चीज़ों को बदतर बना दिया है. ये सरकार अमीरों और ताकतवरों के साथ खड़ी है, उन लाखों साधारण लोगों के साथ नहीं जिन्हें मदद की जरूरत है.

"इस चुनाव का संदेश ये है कि जब आपके सामने एक ऐसी सरकार हो जो कि आर्थिक नाकामी के साथ-साथ निष्पक्ष भी नहीं है, तो लोग ऐसे सरकार का समर्थन नहीं कर सकते."

मगर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपनी सरकार की नीतियों में किसी परिवर्तन की माँग को खारिज कर दिया है.

कैमरन ने कहा कि उन्हें एक कठिन राष्ट्रीय परिस्थिति के कारण अपने काउंसिलरों के हारने का अफसोस है मगर उनकी सरकार अपनी आर्थिक नीतियों में कोई परिवर्तन नहीं करेगी और वे घाटे से निबटने के लिए कठिन फैसले लेते रहेंगे.

उन्होंने कहा,"ये मुश्किल समय है और इनके समाधान आसान नहीं. हमें कर्ज, घाटे और अपनी उस आहत अर्थव्यवस्था से निबटने के लिए कठिन फैसले लेते रहने होंगे जो कि हमें विरासत में मिली है."

कंजर्वेटिव पार्टी के नेताओं ने इन परिणामों को अधिक महत्व नहीं देते हुए कहा है कि सरकारों की मध्यावधि में इसी तरह के परिणाम आया करते हैं और लेबर का प्रदर्शन अच्छा है मगर शानदार नहीं.

वैसे इस बार स्थानीय चुनावों में मात्र 32 प्रतिशत वोटरों ने मतदान किया जो वर्ष 2000 के बाद अभी तक हुआ सबसे कम मतदान है.

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