पुतिन के लिए बना एक बंगला न्यारा

Image caption कुछ लोगों का आरोप है कि पुतिन ने सरकारी खजाने का दुरुपयोग कर अपने लिए निजी महल बनवाया है.

विवादों के चलते भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को कुछ समय पहले सेवानिवृत्ति के बाद उनके रहने के लिए पुणे में बन रहे मकान को छोड़ना पड़ा था. लेकिन क्या वर्तमान रूसी प्रधानमंत्री और सात मई को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने वाले व्लादिमीर पुतिन भी ऐसा करेंगे?

रूस में काले सागर के तट पर पिछले दिनों एक अनोखी इमारत बन कर तैयार हुई है. माना जा रहा है कि ये एक महल है जो व्लादिमीर पुतिन के निजी इस्तेमाल के लिए बनाया जा रहा है और इसके लिए बड़े पैमाने पर सरकारी कोष का अवैध इस्तेमाल हो रहा है.

कहा जा रहा है कि शुरुआत में योजना स्विमिंग पूल वाले एक छोटे से अवकाश गृह बनाने की थी लेकिन अब इसका स्वरूप 18वीं सदी में रूसी राज घराने के सम्राटों के महलों की याद दिलाता है.

इस इमारत में एक निजी थियेटर, हेलिकॉप्टर उतारने के लिए लैंडिग पैड, तीन हेलिकॉप्टरों को रखने की जगह और सुरक्षा गार्डों के रहने की जगह का इंतजाम है.

पुतिन के लिए बन रहे इस आलीशान मकान की सारी जानकारी सैटेलाइट छवियों और इंटरनेट पर तस्वीरों से मिली हैं. इसका विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये तस्वीरें वहां काम कर रहे कारीगरों ने लीक की हैं.

लेकिन इस महल को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी और इसे बनाने के लिए इतनी रकम का इंतजाम किसने किया, इन बातों पर से इतनी आसानी से पर्दा नहीं उठ पाया है.

'सरकारी खजाने का दुरुपयोग'

लेकिन अब पुतिन के एक पूर्व व्यापारिक सहयोगी, सर्गेई कोलस्निकोव, ने बीबीसी न्यूजनाइट को इस बात की जानकारी दी है कि कैसे ये भवन रूसी राष्ट्रपति के मापदंडों के मुताबिक बनाया गया.

रूस से भाग कर अब इस्टोनिया की राजधानी ताल्निन में काम कर रहे कोलस्निकोव उन लोगों में से हैं जिनपर कई सालों तक पुतिन के महल के निर्माण की जिम्मेदारी थी.

पुतिन के अंदरूनी खेमे के वो पहले सदस्य हैं जिन्होंने उच्च-स्तर पर हो रहे इस भ्रष्टाचार को उजागर किया जिससे, उनके मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था को नुक्सान पहुंच रहा था.

कोलस्निकोव कहते हैं कि रूसी अस्पतालों में नए उपकरणों के लिए पुतिन ने एक सुझाव दिया था जिसमें वो और पुतिन के दो और दोस्त-निकोलाई शामालोव और दिमत्रि गोरेलोव-शामिल थे. इस काम के लिए इंग्लिश फुटबॉल क्लब चेल्सी के रूसी मालिक रोमन अब्रामोविच सहित कई रूसी उद्यमियों ने करोड़ो डॉलर का चंदा दिया.

कोलस्निकोव ने चिकित्सा उपकरण आयात किए और वो कहते हैं कि उनकी कंपनी को इसमें काफी डिस्काउंट मिले. कोलस्निकोव के मुताबिक इस तरह से करोड़ों डॉलर की बचत हुई और व्लादिमिर पुतिन के सुझाव पर इसमें से काफी पैसा और निवेश परियोजनाओं के लिए ऑफशोर कंपनियों में लगा दिया गया.

इन परियोजनाओं में नुकसान में चल रहे जहाज निर्माण जैसे उद्योग शामिल थे लेकिन कोलस्निकोव का कहना है कि ज्यादातर पैसा ‘प्रोजेक्ट साउथ’ में लगाया गया यानी प्रास्कोवीका गांव के नजदीक काले सागर के तट पर बन रहे पुतिन के महल के बनाने में.

कोलस्निकोव का कहना है कि पुतिन ने उप प्रधानमंत्री इगोर सेचिन से मामला देखने के लिए कहा जिसके बाद सेचिन ने उन्हें इस पर बातचीत के लिए बुलाया. वो ये भी कहते हैं कि उन्होंने फेडरल सिक्यूरिटी सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ ऐसी कई बैठकें की जिनमें महल में लगने वाले सामान के बारे में पुतिन के निर्देशों पर विचार हुआ.

कोलस्निकोव कहते हैं कि ज्यादातर पुतिन ये निर्देश अपने दोस्त और उनके पार्टनर निकोलाई शामालोव के जरिए देते थे. और शामालोव ने इन पर कभी भी सवाल नहीं उठाए.

भ्रष्टाचार के आरोप

लेकिन इस महल को बनाने में हो रहे खर्च से कोलस्निकोव को अंत में इस कदर नफरत हो गई कि उन्होंने इससे अलग होने का फैसला कर लिया. वो कहते हैं, “मैंने 10 साल तक हर रोज 15 घंटे महल बनाने के लिए काम नहीं किया था. मुझमें इसमें कोई रूचि नहीं थी.”

दिसंबर 2010 में कोलस्निकोव ने तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव को खुला पत्र लिखकर इस मामले में अपनी और बाकी लोगों की भूमिका के बारे में बताया और साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अपने आरोपों की जानकारी भी दी.

शामालोव और कोलस्निकोव के दूसरे पूर्व सहयोगी दिमित्री गोरेलोव से उनका पक्ष जानने के लिए बीबीसी न्यूजनाइट ने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन ये कोशिशें असफल रहीं.

व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता ने भी न सिर्फ सर्गेई कोलस्निकोव के आरोपों से इंकार किया है बल्कि पुतिन की बाकी निजी संपत्ति के बारे में दावों को भी खारिज किया है.

आधिकारिक तौर पर कुछ समय पहले तक ये महल उस कंपनी की मिल्कियत था जिसमें शामालोव की भी हिस्सेदारी है. अब इसका मालिक एक ऐसा कारोबारी है जिसका पुतिन से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है.

लेकिन रूस के एक विपक्षी अखबार नोवाया गज़ेटा को मिले दस्तावेजों से, जिन्हें बीबीसी न्यूजनाइट ने भी देखा है, ऐसा लगता है कि महल बनाने में शामिल न होने के सरकार के दावे झूठे हैं.

सरकारी जमीन पर ये भवन बनाने के लिए समझौते पर राष्ट्रपति से जुड़े मामलों के विभाग के अध्यक्ष व्लादिमीर कोजिन ने दस्तखत किए थे जिन्होंने बाद में जमीन के बारे में किसी भी जानकारी से इंकार किया.

हालांकि इन दस्तावेजों से साबित नहीं होता कि ये महल पुतिन के लिए बनाया गया था या फिर वो इसके निर्माण में निजी रूप से शामिल थे. लेकिन इस बारे में अब भी रहस्य बना हुआ है.

पिछले साल जब भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता इस महल में घुसने में कामयाब हुए, उनका सामना न सिर्फ निजी सुरक्षा गार्ड बल्कि आधिकारिक क्रेमलिन गार्ड सेवा के वर्दी पहने सदस्यों से भी हुआ.

बाद में निजी सुरक्षा कंपनी ने दावा किया कि उसके कर्मचारियों ने वर्दी और सरकारी पहचान पत्र एक दुकान से खरीदे थे.

लेकिन इन कार्यकर्ताओं और सर्गेई कोलस्निकोव के लिए, महल में क्रेमलिन सुरक्षागार्डों की मौजूदगी और इसका विशाल ढांचा इसके असली मकसद और बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने के गैरकानूनी इस्तेमाल की ओर इशारा करते हैं.

कोलस्निकोव का कहना है, ”एक आम आदमी को इन सब चीजों की जरूरत नहीं होती. लेकिन एक राष्ट्रपति के लिए ये सब जरूरी है.”

संबंधित समाचार