अफरा तफरी के बीच 9/11 का अहम मुकदमा

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Image caption सीआईए के दस्तावेज भी बताते हैं कि शेख खालिद मोहम्मद को कई बार प्रताड़ित किया गया

ग्वातांनामो बे के सैन्य अदालत में 9/11 को हुए हमलों के पाँच प्रमुख अभियुक्तों की पहली पेशी काफ़ी अफ़रा-तफ़री से भरी हुई रही.

पहले तो इन अभियुक्तों ने अपने ईयर फ़ोन हटा दिए, जिससे उन्हें आरोप अरबी में ज़ोर-ज़ोर से पढ़कर सुनाना पड़ा.

फिर इन लोगों ने जज जेम्स पॉल के सवालों के भी जवाब देने से इनकार कर दिया और चुप्पी लगाए बैठे रहे.

सात घंटे लंबी सुनवाई के दौरान इन पाँच लोगों में से एक विद्रोह की मुद्रा में आकर आरोप लगाया कि अमरीका सुनवाई पूरी होने से पहले ही उनकी हत्या कर देगा, तो एक दूसरा सुनवाई के दौरान अदालत में ही नमाज़ पढ़ने बैठ गया जिससे सुनवाई रोकनी पड़ी.

इससे पहले एक अभियुक्त ने अदालत में आने से ही इनकार कर दिया था तो उसे जबरदस्ती अदालत में लाया गया और उसके हाथ बांध कर कुर्सी पर बिठाए रखा गया.

हमलों के करीब 12 साल बाद शुरु हुई इस सुनवाई को कई सैन्य अड्डों पर वीडियो के जरिए दिखाया जा रहा है, जिससे कि उन हमलों में मारे गए लोगों के परिजन इस कार्यवाही को देख सकें. लेकिन इनमें से कई हताश और निराश दिखते हैं.

11 सितंबर, 2001 को हुए हमलों में 2,976 लोग मारे गए थे.

मुकदमे की अगली पेशी 12 जून को तय की गई है.

देर से शुरु हुआ मुकदमा

तीन साल पहले यानी वर्ष 2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि वो ग्वांतानामो बे को बंद कर देंगे और संदिग्ध शीर्ष आतंकवादियों के खिलाफ मामले नागरिक अदालतों में चलाए जाएँगे.

लेकिन विरोध के बाद उन्हें ग्वांतानामो बे को बंद करने की योजना रद्द करनी पड़ी थी और अब अदालती कार्यवाही दोबारा सैन्य अदालत में शुरु हुई.

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Image caption वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर एक के बाद एक दो विमान टकराए थे

खालिद शेख मोहम्मद के अलावा और चार लोगों पर वलीद बिन अत्ताश, रामजी बिन अलशिब, अली अब्दुल अजीज और मुस्तफा अहमद अल-हवसावीं पर आरोप हैं कि उन्होंने वर्ष 2001 में हुए हमलों का षडयंत्र रचा.

उन पर आतंकवाद, अपहरण, तोड़फोड़ और साजिश रचने के आरोप हैं.

अदालत में सुनवाई के बाद ये तय किया जाना है कि इनमें से किन आरोपों के तहत अभियुक्तों पर मुकदमे चलेंगे.

वलीद अदालत में एक कुर्सी पर बैठे हुए पेश हुए और उनके हाथ बंधे हुए थे. जब वलीद के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल सही तरीके से बर्ताव करेंगे तब उनके हाथ खोल दिए जाएँगे.

एक दूसरे अभियुक्त रामजी बिन अलशिब ने कई मिनटों तक अदालत में ही प्रार्थना जिसके कारण अदालत कार्रवाही शुरू होने में देरी हुई.

इसके बाद अभियुक्तों ने जज के सवाल का ही जवाब नहीं दिया कि वे अपनी ओर से कोई वकील तय करेंगे या सरकार की ओर से मुहैया कराए गए वकील ही बचाव पक्ष के वकील की भूमिका निभाएँ.

जब जवाब नहीं आया तो जज ने तय किया कि सरकार की ओर से मुहैया करवाए गए फौजी वकील ही बचाव पक्ष के वकील की भूमिका निभाएँ.

हो सकती है मौत की सजा

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Image caption खालिद शेख मोहम्मद पर मुख्य रुप से साजिश में शामिल होने के आरोप हैं

अभियुक्तों के इयरफोन हटाए जाने के बाद अदालत में मौजूद एक अरबी जानने वाले ने उन्हें यकीन दिलाया कि वे पूरी कार्रवाही को समझ सकेंगे उसके बाद ही अदालत ने काम करना शुरू किया.

अगर उन पर लगे आरोप साबित होते हैं तो अमरीकी कानून के मुताबिक उन्हें मौत की भी सजा दी जा सकती है.

बचाव पक्ष के एक वकील जेम्स कॉनेल ने कहा कि इस मुकदमे की कार्रवाई पूरी होने में कई महीनों का समय लग सकता है.

पाकिस्तानी मूल के खालिद शेख मोहम्मद की पैदाइश कुवैत में हुई थी. उन्हें 2003 में पाकिस्तान से गिरफ्तार किया गया था और 2006 में उन्हें ग्वांतानामो बे भेजा गया था.

खालिद शेख मोहम्मद आरोप लगाते हैं कि ग्वांतानामो बे में उन्हें लगातार शारीरित प्रताड़ना दी जाती रही है.

अमरीकी खुफिया विभाग सीआईए के दस्तावेज भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्हें 183 बार वॉटरबोर्डिंग यानी पानी के जरिए यातनाएं दी गईं थीं.

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