ईरान तेल विवाद क्या है?

Image caption अमरीका चाहता है कि भारत ईरान से तेल खरीदना बंद करे.

दुनिया में तेल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देशों में से एक, ईरान, रोजाना करीब 21 लाख बैरल तेल निर्यात करता है.

अमरीका और पश्चिमी देश चाहते हैं कि ईरान से तेल कम लिया जाए जिससे कि ईरान पर परमाणु कार्यक्रम बंद करने के लिए दबाव बढ़ाया जा सके.

पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मकसद परमाणु हथियार हासिल करना है, वहीं ईरान बार-बार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण मकसदों के लिए है.

ईरान द्वारा निर्यात की जाने वाली तेल की हर बूँद पर प्रतिबंध ईरान को तो प्रभावित करता ही है साथ ही विश्व बाजारों में तेल की कीमतें भी बढ़ाता है.

ये खबरों में क्यों है?

अमरीका ईरान के खिलाफ 28 जून से नए प्रतिबंध लागू करने जा रहा है.

इसके तहत उन देशों के बैंकों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो ईरान से तेल का आयात करते हैं.

इसी वजह से भारत से भी ईरान से तेल आयात कम करने की अपेक्षा की जा रही है. लेकिन इससे पहले जब ईरान से लिए जा रहे तेल के भुगतान के मामले में अंतरराष्ट्रीय माध्यमों में दिक्कतें आईं और भारत पर अमरीका का दबाव बना, उसके बावजूद भारत ने भुगतान के वैकल्पिक रास्ते ढूंढ लिए.

भारत से संबंध

भारत अपनी जरुरतों का 12 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आयात करता है और देश में अगर तेल की आपूर्ति कम होती है तो इससे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है.

इस विवादित स्थिति के चलते अब भारत ने तेल और गैस क्षेत्र के भंडारों का पता लगाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने के लिए कतर के साथ नए समझौते किए हैं.

भारतीय अखबारों और समाचार एजंसियों में पिछले दिनों भारत के खुफिया तरीके से ईरान से तेल का आयात कम करने की खबरें आती रही है.