9/11 हमले के अभियुक्तों ने उठाया निष्पक्षता का सवाल

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Image caption वकीलों का कहना है कि कैद के दौरान अभियु्क्तों के साथ दुर्व्यवहार हुआ था.

ग्वांतानामो बे की अमरीकी जेल में बंद अभियुक्तों ने 9/11 को हुए अमरीकी हमले की सुनवाई कर रहे सैन्य न्याधिकरण की निष्पक्षता को चुनौती दी है. इस मामले में पांच अभियुक्तों के वकीलों ने कहा है कि सुनवाई में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है.

इस मामले में खालिद शेख मोहम्मद भी शामिल है जिन पर पहले हत्या और अन्य कई मामले चल रहे थे.

शनिवार को सुनवाई के दौरान सभी प्रतिवादी चुपचाप मामले को सुन रहे थे.

छुपा रही सबूत

प्रतिवादियों के वकीलों का कहना है कि कोर्ट में यातना के सबूत छुपाए जा रहे है.

मुकदमें की सुनवाई में प्रतिवादियों की तरफ से मिलिट्री और दीवानी दोनों तरह के वकील शामिल हैं.

संयुक्त पत्रकार सम्मेलन ने वकीलों ने कहा कि वे इसे ‘एसेंबली लाइन जस्टिस’ कहते हैं जिसमें ‘गोपनीयता छुपाई’ जा रही है.

खालिद शेख भी अभियुक्त

खालिद शेख मोहम्मद के बारे में बताया जाता है कि सीआईए ने ग्वांतानामो बे में सुनवाई शुरु होने से पहले उन्हें लगातार छुपाकर कैद में रखा हुआ था.

उनके वकील डेविड नेविन ने कहा, “इस न्यायाधिकरण को सच्चाई जानने से रोकने के लिए सबकुछ किया जा रहा है.” वकील डेविड नेविन ने इसे ‘पुलिसिया विचारधारा’ की संज्ञा दी है.

जबकि दूसरे अभियुक्त वालिद बिन अतश के वकील ने कहा है कि उनके मुक्कविल कोर्ट में अपना शर्ट उतारने लगे, ताकि वो अपनी बांह की खरोंच के निशानों को अदालत में दिखा सके.’

अतश के वकील शेरील ब्रोमन ने कहा, “कोर्ट में हम इस मामले को रखेगें जिससे कि निष्पक्ष सुनवाई हो सके.”

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Image caption गुआंटोनामो बे जेल से अक्सर कैदियों की यातनाओं की खबरें आती रहती हैं.

उन्होंने आगे बताया, “मुझे पूरा यकीन है कि कैद के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ था.”

लेकिन अमरीका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता ने इस आरोप को पूरी तरह नकार दिया है.

सरकार का इंकार

अमरीका के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल टोड ब्रेसेल ने कहा, “हम बंदियों के अभियोग को काफी गंभीरतापूर्वक लेते हैं और इस तरह के मामले की जांच अच्छी तरह से करते हैं.”

उन्होंने कहा,“इस काम में लगे सभी सदस्य अपने काम में काफी दक्ष हैं और उन लोगों पर हमेशा कड़ी नजर रखी जाती है. इसलिए उन पर कैदियों को प्रताड़ित करने का अभियोग लगाने का प्रश्न ही नहीं उठता है.”

वाहीद बिन अतश के वकील ने भी सुनवाई के कानून के तहत ही इस मसले को उठाया है.

शेरील ब्रोमन ने कहा, “यह बिल्कुल सही बात है कि सुनवाई पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं है, इसलिए हम ये सब कहने के लिए बाध्य हैं. ”

अब्दुल अजीज अली के वकील जेम्स कॉनेल का कहना है, “ इन लोगों को वर्षों से लगातार यातनाएं दी जा रही हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है. उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार सैन्य न्यायाधिकार की महत्ता को बुरी तरह प्रभावित करेगा.”

न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई अगले महीने होनी हैं, लेकिन कई वकीलों को आशंका है कि मामले की पूरी सुनवाई होगी ही नही.

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