सू ची को 24 साल बाद मिला पासपोर्ट

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Image caption चुनाव जीतने के बाद आंग सान सू ची संसद की शपथ लेती हुई

बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची को 24 सालों में पहली बार पासपोर्ट दिया गया है.

पिछले दो दशकों से आंग सान सू ची को बर्मा में राजनीतिक बंदी के तौर पर नजरबंद रखा गया था.

लेकिन देश में हाल में हुए चुनावों और राजनीतिक सुधारों के बाद आंग सान सू ची और उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के कई नेताओं ने संसद में अपनी जगह बनाई है.

आंग सान सू ची की योजना जून में नॉर्वे जाने की है. नॉर्वे में वो उस नोबल शांति पुरस्कार को ग्रहण करने जा रही हैं जो उन्हें वर्ष 1991 में दिया गया था.

इसके अलावा वो ब्रिटेन भी जाना चाहती हैं जहां उन्होंने अपने दिवंगत पति और बच्चों के साथ कई साल बिताए थे.

घर में नजरबंद

वर्ष 1988 में जब वो अपनी बीमार मां को देखने बर्मा आई थीं, तभी विरोध प्रदर्शन हुए और तभी से उन्हें बर्मा से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है.

उन्होंने इसके पहले विदेश जाने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्हें इस बात की आशंका थी कि बर्मा के सैनिक शासक शायद उन्हें देश लौटने से रोक दें.

वर्ष 1999 में उनके पति की मौत हो गई थी. साथ ही उनका अपने बच्चों से भी बहुत कम सम्पर्क रहा है.

बर्मा सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि अब आंग सान सू ची बर्मा से बाहर जाने के लिए आजाद हैं.

आंग सान सू ची के प्रवक्ता न्यान विन का भी कहना है कि उनका पासपोर्ट अब उनके हाथों में है.

आंग सान सू ची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के निमंत्रण को भी मंजूर कर लिया है.

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