सिर्फ एशियाई मूल के लोग ही दोषी नहीं

 गुरुवार, 10 मई, 2012 को 05:16 IST तक के समाचार

ये पुरुष बच्चियों को शराब और ड्रग्स देते थे ताकि उनका यौन शोषण किया जा सके.

ब्रिटेन की एक अदालत ने नाबालिग बच्चियों के बलात्कार और यौन शोषण के जुर्म में एशियाई मूल के नौ पुरुषों को दोषी पाया है और इन्हें चार से लेकर 19 साल तक की सजा सुनाई है.

इन नौ पुरुषों में से आठ पाकिस्तानी और एक अफगान नागरिक हैं.

इन पुरुषों ने शराब और ड्रग्स का इस्तेमाल कर किशोरियों को बहकाया और उनका यौन शोषण किया.

पिछले कुछ समय में ब्रिटेन में यौन अत्याचार के कई मामलों में एशियाई मूल के लोग दोषी पाए गए हैं.

लेकिन बच्चों के अधिकारों के लिए काम कर रहे आंदोलनकारियों का मानना है कि ये परेशानी सिर्फ एक नस्ल तक सीमित नहीं है.

'एक दिन में कई बार'

"ये शोषण इतने लंबे समय तक चलता रहा और इस दौरान मुझे इतने पुरुषों से संबंध बनाने पड़े कि अब मुझमें कोई अहसास नहीं बचा है. मुझे लगने लगा कि मैं किसी और इंसान में बदल गई हूं."

पीड़ित बच्ची

ब्रिटेन के ओल्डहैम और रॉकडेल इलाकों में रहनेवाले इन पुरुषों ने मिलकर पांच लड़कियों को अपना निशाना बनाया.

इनमें से सबसे छोटी लड़की की आयु केवल 13 वर्ष थी और बाकी सब भी 16 से कम आयु की ही थीं.

इन लड़कियों को प्यार और पैसे से नजदीक लाया गया. लेकिन कुछ ही समय में प्यार, अत्याचार में बदल गया.

इन किशोरियों को इन पुरुषों के साथ ही नहीं बल्कि और लोगों के साथ भी जबरदस्ती यौन संबंध बनाने पर विवश किया गया.

इन्हीं में से एक ने बीबीसी को अपनी आपबीती बताई.

उसने कहा, "ये शोषण इतने लंबे समय तक चलता रहा और इस दौरान मुझे इतने पुरुषों से संबंध बनाने पड़े कि अब मुझमें कोई अहसास नहीं बचा है. मुझे लगने लगा कि मैं किसी और इंसान में बदल गई हूं, और ऐसा एक हफ्ते में चार-पांच बार और हर दिन में पांच पुरुषों के साथ होता था."

'नस्ली समस्या नहीं'

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ब्रिटेन में एक हजार से ज्यादा बच्चे इस तरह के जाल में फंसने के खतरे में हैं.

खास तौर पर वो लड़कियां जो पारिवारिक समस्यों से ग्रस्त परिवारों से आती हों, जिन्हें मां-बाप की सुरक्षा और स्नेह ना मिला हो, उन्हें सड़कों या दुकानों के बाहर ऐसे पुरुष, दोस्त बनाने की कोशिश करते हैं.

बच्चों के अधिकारों के लिए काम कर रहे एक संगठन 'बारनार्डोस' के मार्टिन नारे के मुताबिक कि ये बच्चियां स्नेह की तलाश में ऐसे झांसों में फंस जाती हैं.

"जो अत्याचार कर रहे हैं और जो पीड़ित हैं वो किसी एक नस्ल या समुदाय से हों ऐसा नहीं है. बल्कि ये शोषण हर धार्मिक और नस्ली समुदाय में हो रहा है."

सू बरलोविट्ज, बच्चों की उप-पुलिस आयुक्त

मार्टेन कहते हैं, "मेरे ख्याल से ये श्वेत लड़कियों से ताल्लुक नहीं रखता है. ये दुख की बात है कि रात के समय सड़कों पर जो लड़कियां ऐसे लोगों का शिकार बन सकती हैं वो श्वेत होती हैं, बनिस्पद एशियाई लड़कियों के जो अपने ज्यादा चौकन्ने मां-बाप की निगरानी में उस वक्त घर पर होती हैं."

इस ताजा मामले की वजह से ऐसे पुरुषों का एशियाई होना और पीड़ित बच्चियों का श्वेत होना चर्चा का केन्द्र जरूर बना है.

लेकिन बच्चों की उप-पुलिस आयुक्त सू बरलोविट्ज के मुताबिक इस मुद्दे को नस्ल से जोड़ना सही नहीं होगा.

सू कहती हैं, "जो अत्याचार कर रहे हैं और जो पीड़ित हैं वो किसी एक नस्ल या समुदाय से हों ऐसा नहीं है. बल्कि ये शोषण हर धार्मिक और नस्ली समुदाय में हो रहा है."

कई वर्षों से ब्रितानी समाज इंटरनेट के जरिए बच्चों को यौन शोषण के जाल में फंसाने वालों पर नकेल कसने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन अब उसे सड़कों पर सरे आम मंडराते इस खतरे से निपटने के तरीके ढूंढने होंगे.

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