अंडरवियर चरमपंथी ‘अमरीकी जासूस था’

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Image caption साल 2009 के अंडरवियर बम साजिश के बाद दुनियाभर के हवाई अड्डों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई.

अमरीका से मिल रही खबरों के अनुसार अंडरवियर बम धमाके की साजिश में शामिल आत्मघाती चरमपंथी दरअसल एक जासूस था.

अमरीकी अधिकारियों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार इस एजेंट ने अलकायदा के यमन में स्थित गुट में सेंध लगाकार जानकरियां जुटाई थी.

माना जा रहा है कि अंडरवियर बम को भी एजेंट अपने साथ लेकर यमन से निकल गया जिसके बाद उसने इसे अमरीकी खुफिया विभाग सीआईए को सौप दिया.

इस बीच पेंटागन ने कहा है कि अलकायदा चरमपंथियों से निबटने के लिए वो अपने सैन्य प्रशिक्षकों को यमन भेज रहा है.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार अमरीकी खुफिया विभाग को पिछले महीने इस बात का पता चला कि यमन में स्थित अलकायदा के कुछ चरमपंथी एक विशेष तरह के अंडरवियर बम से एक यात्री विमान को उड़ाने की साजिश रच रहें हैं. साल 2009 में भी इसी तरह की एक साजिश रची गई थी जो कि नाकाम कर दी गई.

साजिश

अधिकारियों ने अमरीकी मीडिया को बताया कि साजिश में शामिल हमलावर सउदी अरब की खुफिया एजेंसी के लिए काम करता था और उसने ही हमलावर को अलकायदा के गुट में सेंध लगाने के लिए यमन भेजा था.

बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता स्टीव किंगस्टोन ने कहा कि प्राप्त की गई जानकारी के अनुसार जासूस को चरमपंथी गुट का विश्वास जीतने के लिए यमन भेजा गया था.

इस दौरान बम मिलते ही एजेंट ने उसे सीआईए को सौंप दिया.

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Image caption यमन से लाए गए बम की जांच की जांच की जा रही है.

न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार का दावा है कि एजेंट फिलहाल बिल्कुल सुरक्षित है और सउदी अरब में है.

अमरीकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के जासूस अब इस उन्नत अंडरवियर बम की जांच कर रहें है.

अधिकारियों का कहना है कि ये बम इस तरह से बनाया गया है कि सावधानी से सुरक्षा जांच किए जाने के बावजूद इसका पता लगा पाना मुश्किल है.

बताया जा रहा है कि इस बम में विस्फोट करने के लिए दो डेटोनेटर है. इस तरह के पहले बनाए गए बमों में एक ही डेटोनेटर हुआ करता था.

न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि इस तरह के बम का प्रयोग अगर किसी जहाज में हमला करने के लिए किया जाता तो इससे भारी नुकसान होता.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भारत में कहा, “इस साजिश से साबित होता है कि चरमपंथी निर्दोष लोगों को मारने के लिए तरह-तरह के तरीके खोजते है.”

ड्रोन हमले

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार एजेंट से मिली जानकारी के आधार पर ही सीआईए ने यमन में रविवार को ड्रोन हमला किया जिसमें चरमपंथी गुट एक्यूएपी के नेता फहद-अल-क्यूसो मारे गए थे.

बारह साल पहले यमन में अमरीकी विमान यूएसएस कोल पर हमले के लिए क्यूसो को ही जिम्मेदार माना जाता है. अमरीका ने क्यूसो पर 50 लाख अमरीकी डॉलर का ईनाम भी रखा था.

अमरीकी अधिकारियों ने एबीसी न्यूज से कहा कि क्यूसो साल 2009 के यात्री विमान उड़ाने की साजिश की ही तरह के एक चरमपंथी हमले की योजना बना रहें थे.

चरमपंथी गुट में सेंध लगाकर यमन से लाए गए बम अधिकारियों को उसके कुछ तथ्यों के बारे में पता चला है. इस बम को छद्म आत्मघाती हमलावर उमर फारूक अब्दुलमुतल्लिब के अंडरवियर में सिला जाना था.

पेंटागन के प्रवक्ता कप्तान जॉन किर्बी ने कहा कि अमरीका ने यमन में सैन्य प्रशिक्षकों का दल भेजना शुरू कर दिया है.

उन्होंने कहा, “हम यमन की सरकार और सेना के साथ मिलकर काम कर रहें हैं ताकि यमन में अलकायदा के प्रभाव को बढ़ने से रोका जा सके.”

यमन में कई महीनों तक राजनीतिक हलचल के बाद चरमपंथी देश के कई भागों में फैल चुके है.

साल 2011 में यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के एक रॉकेट लॉंचर हमले में घायल होने के बाद से ही वाशिंगटन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम बंद कर दिया गया था.

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