नग्नता पर एक, सेक्स और लिंग भेद पर मतभेद

 रविवार, 13 मई, 2012 को 09:20 IST तक के समाचार

जर्मनी में कई लोगों का मानना है कि निर्वस्त्र शरीर बिल्कुल स्वाभाविक है

जर्मनी में नग्नता की प्रतिष्ठित संस्कृति है. पहले के पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी में ये व्यवहार लोकप्रिय भी है. लेकिन क्या नग्नता के पीछे महिलाओं की आजादी से जुड़ा सवाल भी है जो जर्मनी को बांट रहा है?

नग्नता पर जर्मनी के दोनों हिस्से एक हो सकते हैं लेकिन सेक्स और लिंग-भेद पर शायद वो एक नहीं है.

जर्मनी के लोग कहते हैं कि नग्नता आम जिंदगी का हिस्सा है. खासकर जर्मनी के उत्तरी हिस्से में रहने वाले गैर-कैथोलिक लोगों का मानना है कि निर्वस्त्र शरीर बिल्कुल स्वाभाविक है और प्राकृतिक भी. इसमें सेक्स या कामुकता के प्रति कोई भाव नहीं होता.

नाजी और कम्युनिस्ट जर्मनी में इस बात को संदेह की नजरों से देखा जाता था. पूर्वी जर्मनी में नग्नता विरोध प्रकट करने का जरिया जैसा बन गया था.

महिलाएं ज्यादा

दरअसल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले 70 लाख ज्यादा हो गई थी.

ऐसे माहौल में एक ऐसे उद्योग ने जड़ पकड़ा जो दूसरे पश्चिमी देशों से अलग था और महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया था.

पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के बीच की सांस्कृतिक दरार नग्नतावाद पर दिखने लगी है.

जर्मनी में डाक से सामान मंगवाने का उद्योग जिसे 'मेल ऑर्डर' भी कहते हैं काफी विकसित था.

बिएट उहसे एक महिला पायलट थी और एक डॉक्टर की बेटी. महिलाएं अक्सर उनसे गर्भवती बनने से बचने के बारे में सलाह लिया करती थी.

इसी को देखते हुए उहसे ने मेल ऑर्डर पर कंडोम बेचने और पुरुषों को खुश रखने पर अपने विचारों की सलाह देने का उद्योग शुरु किया.

ये व्यापार जर्मनी के सबसे सफल उद्योगों में एक बनकर विकसित हुई.

इतिहासकार एलिजाबेथ हाइनेमेन इस परंपरा को समझाते हुए कहती हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में पुरुषों की बड़ी कमी हो गई थी जिसके बाद वहां की महिलाएं ज्यादा आजाद और मजबूत हो कर उबरीं.

बहस

हालांकि बाद में पश्चिमी जर्मनी में पुरुष और महिलाओं की पारंपरिक भूमिका वापस लौट आई लेकिन पूर्वी जर्मनी में ऐसा नहीं था.

महिलाओं की मैगजीन 'डाइ मैग्जीन' में लिखने वाली सिमोन शोमोलॉक का कहना है कि पूर्वी जर्मनी में महिलाओं के पास आर्थिक आजादी थी जिससे वो पुरुषों के सामने कमजोर नहीं पड़ती थी.

लेकिन बर्लिन की दीवार गिरने के बाद पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के बीच की सांस्कृतिक दरार अब दिखने लगी है.

एलिजाबेथ कहती हैं, "जब पश्चिमी पुरुष पूर्वी जर्मनी की महिलाओं के साथ संबंध बनाते है तो कुछ दिक्कते आती हैं. पुरुष सोचते हैं कि पूर्वी महिलाएं बड़ी आजाद-ख्याल है और सेक्स के प्रति भी स्वच्छंद है. लेकिन इसके साथ पुरुष ये भी चाहते हैं कि महिलाएं घरों की चाहरदीवारी में ही रहे."

जर्मनी में पुरुष और महिलाओं की समाज में भूमिका को लेकर कुछ भ्रम है और बहस जारी है.

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