इसराइल: प्राचीन फलस्तीनी गांव को ख़तरा

 मंगलवार, 15 मई, 2012 को 05:09 IST तक के समाचार
इसराइल की विवादास्पद सुरक्षा दीवार

इसराइल की विवादास्पद सुरक्षा दीवार से एक प्राचीन गांव को खतरा

एक प्राचीन फलस्तीनी गांव के रहने वालों ने इसराइल से उनके विवादास्पद सुरक्षा दीवार का रास्ता बदलने की अपील की है.

इसराइल का कहना है कि 400 किलोमीटर लंबी दीवार लोगों की जान बचाने के लिए बनाई जा रही है और उसके रास्ते को केवल सुरक्षा कारणों से तय किया गया है.

बीबीसी संवाददाता वायर डेविस पश्चिमी किनारे पर बसे बातिर नाम के इस गांव पहुंचे जो कि प्रस्तावित इसराइली दीवार के रास्ते में पड़ने वाला है.

वायर डेविस के अनुसार बातिर इस इलाके का शायद सबसे समृद्ध गांव हैं, यहां साफ और ताजा पानी की कोई कमी नहीं और इसी पानी की वजह से गांव में सदियों से खुशहाली रही है और इसका नाम रहा है. बातिर में पैदा होने वाले फल और सब्जियां पूरे इलाके में मशहूर हैं.

इस गांव के प्रधान अकरम बदिर के अनुसार इस जमीन के बगैर इस गांव और यहां रहने वाले लोगों का कोई महत्व नहीं है.

अकरम बदिर कहते हैं, ''हमारी जिंदगी में जमीन सबसे महत्वपूर्ण चीज है. जमीन के बगैर हम फलस्तीनियों की जिंदगी का कोई मतलब नहीं, क्योंकि हमारे पास दूसरे और कोई साधन नहीं हमारे पास सिर्फ अपनी जमीनें हैं.''

"हमारी जिंदगी में जमीन सबसे महत्वपूर्ण चीज है. जमीन के बगैर हम फलस्तीनियों की जिंदगी का कोई मतलब नहीं, क्योंकि हमारे पास दूसरे और कोई साधन नहीं हमारे पास सिर्फ अपनी जमीनें हैं."

अकरम बदिर, गांव के प्रधान

इस गांव में खेती और सिंचाई की व्यवस्था बिल्कुल आसान है. झरने से आने वाले पानी को एक बड़े से तालाब में जमा किया जाता है और फिर यहां से हर गांववासी को उसकी जरूरत के हिसाब से पानी पहुंचाया जाता है.

इसराइली फरमान

लेकिन सदियों पुरानी ये व्यवस्था इसराइल के जरिए बनाई जा रही सुरक्षा दीवार के कारण अब शायद खतरे में है.

गांव के एक वकील गेथ नासिर कहते हैं, ''इसराइली सरकार ने एक फरमान जारी कर कहा है कि बातिर गांव के पास सुरक्षा दीवार बनाने के कारण गांव की ज्यादातर खेती की जमीन इसराइल की तरफ चली जाएगी और बातिर के निवासी इसराइली अधिकारियों की इजाजत के बगैर अपने खेतों में नहीं जा सकेंगे. हमलोग इसका विरोध कर रहें हैं और हमें लगता है कि हमारी दलील में काफी दम है.''

बातिर गांव का लगभग 30 फीसदी हिस्सा ग्रीन लाइन के उस पार यानी कि इसराइल की तरफ पड़ता है. ग्रीन लाइन 1967 से पहले इसराइली और फलस्तीनी इलाके को अलग करती है. इसराइल की आजादी के बाद बातिर गांव के अरब लोगों को अपनी जमीन रखने की इजाजत दे दी गई थी लेकिन इसके बदले उन्होंने उसी घाटी से होकर गुजरने वाली इसराइली रेलों को नुकसान नहीं पहुंचाने का वादा किया था.

लेकिन इसराइल की ये विवादास्पद सुरक्षा दीवार उस गांव के बहुत करीब पहुंच गई है. बातिर गांव के पास ही फलस्तीनी गांव वलाजा के पास कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े ले जाए जा रहें हैं.

इससे बातिर गांव का एक बड़ा हिस्सा दीवार की दूसरी तरफ चला जाता है.

"खेती का ये तरीका बहुत पुराना है, लगभग चार हजार साल पुराना और यही तरीका आज भी जारी है जो कि सचमुच में एक अनूठी मिसाल है. साथ ही साथ इसका एक सामाजिक महत्व भी है. इसके कारण पूरा गांव एकजुट है और लोगों की जिंदगी एक दूसरे से काफी जुड़ी हुई है. इसलिए लोगों को उनकी जमीन से अलग करने के कारण गांव की सामाजिक जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा."

गिओवानी सोनताना, यूनेस्को अधिकारी

इस बारे में इसराइल से किए गए पुराने समझौते के बावजूद गावंवाले और इसके लिए अभियान चला रहे लोगों को इस बात का डर है कि प्रस्तावित इसराइली दीवार बातिर के गावं वालों को उनके जमीन और खेतों से अलग कर देगी.

सामाजिक महत्व

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को में काम करनेवाले एंथ्रोपोलॉजिस्ट गिओवानी सोनताना के अनुसार बातिर गांव के बीच सुरक्षा दीवार बनने से गांव के पारंपरिक तौर तरीके नष्ट हो जाएंगें.

सोनताना कहते हैं, ''खेती का ये तरीका बहुत पुराना है, लगभग चार हजार साल पुराना और यही तरीका आज भी जारी है जो कि सचमुच में एक अनूठी मिसाल है. साथ ही साथ इसका एक सामाजिक महत्व भी है. इसके कारण पूरा गांव एकजुट है और लोगों की जिंदगी एक दूसरे से काफी जुड़ी हुई है. इसलिए लोगों को उनकी जमीन से अलग करने के कारण गांव की सामाजिक जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.''

लेकिन बातिर गांव और उसकी जमीन को बचाने के लिए इसराइल को वो करना होगा जो उसने अब तक नहीं किया है मतलब ये कि इसराइल को दीवार का कुछ हिस्सा अपनी जमीन पर बनाना होगा.

इसराइली रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में सीधी बात करने की अपील को ठुकराते हुए एक बयान जारी किया.

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार दीवार का रास्ता पूरी तरह से सुरक्षा जरूरतों का ख्याल रख कर तैयार किया गया है और दीवार के कारण उस इलाके को होने वाले खतरे को कम से कम करने की कोशिश की जाएगी.

लेकिन बहुत से लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि सैंकड़ों सालों से चली आ रही जीवन शैली अब शायद खत्म हो जाएगी.

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