जर्मनी-फ्रांस रिश्तों की चुनौतियां

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Image caption फ्रांस कई वर्षों से जर्मनी का अहम राजनयिक सहयोगी रहा है.

यूरोपीय देशों में संकट किस हद तक गहरा गया है इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि शपथ लेने के 24 घंटों के भीतर ही फ्रांस के नए राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से मिले.

माना जाता है कि फ्रांस और जर्मनी के आपसी रिश्ते यूरोपीय संघ की जान हैं.

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोला सार्कोजी के लिए जर्मनी की नीतियों का समर्थन करते हुए उसके साथ चलना यूरोप में फ्रांस का प्रभाव बनाए रखने के लिए जरूरी था.

आधुनिक यूरोपीय नीतियों में फ्रांस और जर्मनी के रिश्ते का अहम स्थान है.

इन देशों के इतिहास पर अगर नजर डालें तो फ्रांस और जर्मनी के बीच तकरार या जंग जैसी स्थिति को बनने देने से रोकना यूरोपीय संघ की एक बड़ी उपलब्धी है.

लेकिन वक्त के साथ फ्रांस और जर्मनी के आपसी रिश्तों के आयाम भी बदले हैं. फ्रांस कई वर्षों से जर्मनी का अहम राजनयिक सहयोगी रहा है.

जर्मनी से रिश्ते

फ्रांस के नवनियुक्त समाजवादी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड जर्मनी के साथ एक तनावपूर्ण रिश्ते में एक जूनियर सहयोगी के तौर पर वहां की यात्रा पर हैं.

एंगेला मर्केल ने फ्रांस के राष्ट्रपति के पद पर निकोला सार्कोजी के बने रहने की खुले तौर पर इच्छा जताई थी.

हालांकि एक अहम बात ये है कि शुरुआत में सार्कोजी और मर्केल के बीच रिश्ते काफी तल्ख थे और समय के साथ दोनों ने इसे बेहतर किया था.

लेकिन दक्षिण यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहें खतरे को देखते हुए ये जाहिर है कि फ्रांस के नए राष्ट्रपति और एंगेला मर्केल के पास रिश्तों की बेहतरी के लिए उतना समय नहीं है जितना पहले था.

अब भविष्य में दोनों देशों के बीच किस तरह के संबंध होंगे इसका अंदाजा लगाने के लिए संकेत खोजने की कोशिश की जाएगी.

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