शराब के ख़िलाफ़ लड़ती एक जनजाति

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Image caption अमरीका के पाइन रिज इलाके के लोग शराब की लत के शिकार हैं.

अमरीका के दूसरे सबसे बड़े आरक्षित क्षेत्र, दक्षिणी डकोटा के पाइन रिज इंडियन रिज़र्वेशन के बाशिंदों ने शराब पीने की लत के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है.

अब कई साल की कोशिशों के नाकाम रहने के बाद आरक्षित भूमि में रहनेवाली ओगलाला लकोटा जनजाति ने शराब की आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं.

इन्होंने पास के ह्वाइट क्ले शहर की शराब की दुकानों में शराब की आपूर्ति करनेवाली भट्ठियों और उसके वितरकों के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ दी है.

छूटा घर

पाइन रिज इंडियन रिजर्वेशन में अपना बचपन गुजारने वाले बेन मेसटेथ ने चार साल पहले अपनी शराब की लत छुड़ाने के लिए इलाके को छोड़कर जाने का फैसला कर लिया. अपने परिवार को लेकर वो दूसरे शहर चले गए. यहां से जाने के बाद अपराधियों ने उनके घर में तोड़फोड़ कर डाली.

वो कहते हैं, '' ये सब शराब पीने की बुरी लत की वजह से हुआ है.लोगों को यहां शराब के सिवा कुछ भी नहीं सूझता.''

बेन को अब आरक्षित भूमि का ये इलाका असुरक्षित सा लगता है.

यहां अस्सी फीसदी लोग बेरोज़गार हैं, लोगों की औसत उम्र 45 से 52 वर्ष के बीच है जो कि अमरीकी जनसंख्या की औसत आयु से 30 वर्ष कम है और यहां रहनेवाले लोगों के परिवार में कम से कम एक व्यक्ति शराब की लत का शिकार है.

लुई जेनीस 12 बच्चों के पिता हैं और शराब की लत छोड़ने का प्रयास कर रहे हैं.

वो कहते हैं, ''हम ये मानकर पीते हैं कि कल किसने देखा है. हम तब तक पीते हैं जब तक हमारे पैसे खत्म नहीं हो जाते. हमारे पीने का यही अंदाज़ है. हम पास के शहर व्हाइट क्ले तक बीयर खरीदने जाते हैं. पैदल जाने में आधे घंटे का वक्त लगता है. कुछ लोग तो ह्विल चेयर और बैसाखी के सहारे भी वहां तक पहुंचते हैं.''

गैर कानूनी

पाइन रिज इंडियन रिजर्वेशन में शराब खरीदना, बेचना और पीना गैर कानूनी है.

इसीलिए लोग शराब खरीदने पास के सीमावर्ती शहर ह्वाइट क्ले तक जाते हैं. हालांकि शहर की आबादी कम है लेकिन यहां की शराब की दुकानों ने साल 2010 में पचास लाख शराब की बोतलें बेच डालीं.

टॉम पूअर बियर ओगलाला सियोक्स जनजाति परिषद के उपाध्यक्ष हैं. इस परिषद ने ह्वाइट क्ले की चार दूकानों, वितरकों और शराब की आपूर्ति करने वाली बड़ी भट्ठियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला लिया है.

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Image caption इलाके में लोग सार्वजनिक रूप से शराब पीते हैं

पचास करोड़ डॉलर के मुकदमे में ये कहा गया है कि जिस भारी मात्रा में शराब बेची जा रही है उसके बारे में कंपनियों को पता होना चाहिए कि किस तरह गैरकानूनी तरीके से शराब का सेवन हो रहा है.

वो कहते हैं, ''हमने ह्वाइट क्ले में शराब की बिक्री पर रोक लगाने की भरपूर कोशिश की. लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी.''

ह्वाइट क्ले में लोग सार्वजनिक रूप से शराब पीते हैं. बाहर से आने वाले कई लोग तो रात में यहीं रुक जाते हैं ताकि सुबह उठते ही शराब पी सकें.

शराब की दुकानों पर कबीलाई लोगों से भरी गाड़ियां आती रहती हैं. बीबीसी ने जब शराब भट्ठी मालिकों और बीयर बेचने वालों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया.

ऐसा लगता है कि ह्वाइट क्ले में शराब बेचनेवाले लोग मुकदमे की बात को शायद ही तवज्जो देते हैं.

कमजो़र कोशिश

विक क्लार्क ह्वाइट क्ले में खाने-पीने की चीजें बेचनेवाले दुकानदार हैं. उनका मानना है कि शराब की बिक्री पर रोक लगाने की कोशिश कमज़ोर सी लगती है.

''ये गैर कानूनी नहीं है. जहां शराब बेचना कानूनन सही हो वहां खरीदना गैर कानूनी कैसे हो सकता है. अगर जनजातीय लोग वाकई शराब बंदी को लेकर गंभीर हैं तो सड़कों पर नाकेबंदी क्यों नहीं की जाती. नेता लोग खुद यहां शराब खरीदने आते हैं और वहां जाकर मुकदमा की बात करते हैं. ये तो चुनाव का मामला है. लोगों के पास खरीदारी के विकल्प मौजूद हैं. लोग ह्वाइट क्ले में किराने का सामान लेने आ सकते हैं और अगर चाहें तो बीयर भी खरीद ही सकते हैं.''

पाइन रिज इंडियन रिज़र्वेशन में लोगों में शराब की लत सिर्फ ह्वाइट क्ले में बीयर स्टोर होने की वजह से नहीं है.

लेकिन कबीलाई नेताओं को लगता है कि जबतक शराब बेचकर लाखों डॉलर कमानेवाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक इस समस्या का हल नहीं निकलेगा क्योंकि इससे इलाके की संस्कृति प्रभावित हो रही है.

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