ईरान पर हमले की योजना ‘तैयार’: अमरीकी दूत

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Image caption ईरान का कहना है कि वो यूरेनियम संवर्धन का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा के असैनिक उपयोग के लिए कर रहा है.

इसराइल में अमरीकी दूत के मुताबिक अगर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने की अन्य कोशिशें रंग नहीं लातीं हैं तो अमरीका के पास ईरान पर हमले की योजना तैयार है.

डैन शपीरो ने ये बयान इसराइल की बार एसोसिएशन को मंगलवार को दिया जिसके बाद एसोसिएटिड प्रेस समाचार एजंसी ने इस बयाक की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की.

डैन शपीरो ने कहा कि अमरीका को उम्मीद है कि कूटनीति और आर्थिक प्रतिबंध की मदद से ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम में तब्दीली लाने के लिए मनाया जा सकेगा, लेकिन साथ ही एक सैन्य विकल्प ‘तैयार’ है.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी कह चुके हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प मौजूद है.

अमरीका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु बम विकसित कर रहा है, हालांकि ईरान ने इसका खंडन किया है.

सैन्य विकल्प

एसोसिएटिड प्रेस के मुताबिक शपीरो ने कहा, “सैन्य कार्रवाई की जगह हम कूटनीतिक तरीकों से दबाव बनाकर इस समस्या का हल ढूंढना पसंद करेंगे, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि ये विकल्प मौजूद नहीं है. बल्कि मौजूद ही नहीं, ये तैयार है और इस तैयारी के लिए जरूरी योजना पर काम भी किया जा चुका है.”

इसराइल और अमरीका दोनों ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को आखिरी विकल्प बताते आए हैं, लेकिन इसराइल ने ईरानी हमले के अंदेशे को देखते हुए उसपर ऐहतियातन कार्रवाई करने की ओर इशारा भी किया है.

बीबीसी के ईरान संवादादाता जेम्स रेनॉल्ड्स के मुताबिक शपीरो का बयान ओबामा के बयान से एक कदम आगे जाता है.

रेनॉल्ड्स के मुताबिक इस्राइल में दिया गया ये बयान ईरान समेत अन्य देशों में भी चर्चा का विषय बनेगा.

प्रतिबंध

ईरान और विश्व के छह बड़े देशों में 23 मई से इस मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू होगी. अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी की कोशिश है कि ईरान, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजंसी को अपने परमाणु संयंत्रों की जांच करने की अनुमति दे.

जबकि ईरान ये मानने को तैयार नहीं है, उसका कहना है कि वो यूरेनियम संवर्धन का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा के असैनिक उपयोग के लिए कर रहा है.

यूरोपीय यूनियन, अमरीका और संयुक्त राष्ट्र, सभी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से उसपर प्रतिबंध लगाए हैं.

भारत ईरान से तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है लेकिन उसपर भी ईरान के साथ व्यापार कम करने का दबाव है.

इसी महीने भारत आईं अमरीकी विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन ने भी इस बात पर बल दिया था.

इस दौरे के कुछ ही दिन बाद भारत ने कहा कि वो इस वित्त वर्ष में ईरान से आयात होने वाले तेल में 11 फीसदी की कटौती करेगा.

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