कम बच्चे पैदा कर रहे हैं अमरीकी गोरे

अमरीका अल्पसंख्यक
Image caption कुछ लोगों का मानना है कि चार दशकों में श्वेत समुदाय के लोग अमरीका में अल्पसंख्यक हो जाएंगे.

अमरीकी जनगणना ब्यूरो के अनुसार देश में जितने बच्चे पैदा हो रहे हैं उनमें गोरे नस्ल के स्त्री-पुरूष से होने वाले बच्चों की तादाद 50 प्रतिशत से भी कम है. वहीं काले और दूसरी नस्ल के परिवारों की जन्म दर लगातार ऊपर जा रही है.

ये नतीजे जुलाई 2010 और जुलाई 2011 के बीच की एक साल की अवधि में देश में पैदा होने वाले बच्चों के आंकड़ों के आधार पर बताए गए हैं.

इस अवधि में अमरीका में कुल जितने बच्चों का जन्म हुआ उसमें 50.4 फीसद काले, लातिनी अमरीकी और एशियाई मूल के जोड़ों के थे.

अमरीका में ऐसा पहली बार हुआ है कि गोरे बच्चों की तादाद अन्य नस्ल के बच्चों से कम हुई है.

ये बदलाव पिछले एक दशक में धीरे-धीरे हुआ है. साल 1990 में कुल पैदाइश में गैर-गोरे नस्लों के बच्चों की संख्या 37 प्रतिशत ही थी.

समाज का चेहरा

चार साल पहले यानी साल 2008 में पहली बार अमरीकियों ने एक काले नस्ल के व्यक्ति को अपना राष्ट्रपति चुना. कुछ लोगों का मानना है कि अब बच्चों के जन्म दर के आंकड़ों से भी ये प्रतीत होता है कि अमरीकी समाज का चेहरा बदल रहा है.

भारतीय मूल के डॉ पीयूष अग्रवाल पिछले 30 साल से अमरीका में रह रहे हैं और वे पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के जनगणना मामलों के सलाहकार भी रह चुके हैं.

डॉ अग्रवाल कहते हैं, “अमरीका में यह एक ऐतिहासिक मोड़ है. सरकार को पता है कि यह हो रहा है और वह होने दे रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि वह होने दे रही है वरना और किसी दूसरी सभ्यता में जाकर देखें तो वहां ऐसा चक्कर नहीं हैं. लेकिन इस देश की बुनियाद ही अलग है.”

गोरे लोगों की जन्मदर में कमी के कई कारण बताए जा रहे हैं.

कुछ समाजशास्त्री मानते हैं कि चूंकि गोरे अमरीकियों में नौजवानों की संख्या घट रही है, वो देर से शादी करते हैं या परिवार देर से शुरू करते हैं. फिर उनके एक या दो बच्चे ही होते हैं.

न्यूयॉर्क में मौजूद डॉ हरिकृष्ण शुक्ला कहते हैं, “लातिनी लोगों में सामान्यत: जन्म दर अधिक होती है. दूसरी मूल के अमरीकी भी अधिक बच्चों में यकीन रखते हैं और दक्षिण एशिया के देश जैसे भारत, पाकिस्तान और बांगलादेश से आकर यहां बसने वाले कई दफा इसलिए भी बच्चे जल्द पैदा करना चाहते हैं ताकि कम से कम बच्चों को अमरीकी नागरिकता तो मिल जाए.”

हालांकि हाल के वर्षों में लातिन अमरीका के देशों से लोगों के यहां बसने की संख्या में कमी आई है.

कुछ गोरे लोगों में चिंता

दूसरे मुल्कों के लोगों के अमरीका में बसने का विरोध करने वाले गोरे समुदाय के लोग अपने मूल के जन्मदर में कमी से चिंतित हैं. वो इसके लिए मुख्य तौर पर उस एक करोड़ से अधिक की जनसंख्या की तरफ इशारा करते हैं जो गैर कानूनी तौर पर यहां रह रहे हैं.

सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज नामक अप्रवासन संबंधित संस्था के नीति निदेशक जॉन फ़्रीयर कहते हैं, “वर्तमान में अमरीकी अस्पतालों में भर्ती होते समय सोशल सिक्योरिटी नंबर नहीं बताना पड़ता है. इसका फायदा उठाकर गैर-कानूनी निवासी भी अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं. न उनसे कोई पूछ ताछ होती है और न ही उन्हें गिरफ्तार होकर देश से निकाले जाने का भय होता है. ऐसे लोगों के बच्चों का जन्म अगर अमरीका में होता है तब भी उन्हें नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए.”

लेकिन भारतीय मूल की प्रिया मुर्थी कहती हैं कि ये देश के लिए बेहतर है.

प्रिया मुर्थी अप्रवासियों की अमरीका में मदद करने वाली संस्था सोल्ट की नीति निर्देशक हैं.

“ये आंकड़े अपनी कहानी आप ही कह रहे हैं. यह साफ हो गया है कि अब यह देश बदल रहा है और इस देश को इससे मजबूती मिली है. हर जगह की प्रतिभाओं का मुल्क बेहतर इस्तेमाल कर सकता है.”

प्रिया बताती हैं कि अमरीका के कई इलाकों जैसे हवाई, न्यू मेक्सिको, टेक्सास जैसे राज्यों में पूर्व का अल्पसंख्यक समुदाय अब बहुसंख्यक है.

राजनीतिक बदलाव

वे कहती हैं कि अब काले मूल के लोग अमरीकी राजनीति में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक स्वरूप में भी तब्दीली आएगी.

नए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष के दौरान कुल पैदा होने वाले बच्चों का करीब 26 प्रतिशत लातिनी, 13 फीसद काले और 4.4 एशियाई मूल के थे.

डॉ पीयूष अग्रवाल कहते हैं, “काले लोगों की बढ़ती संख्या पर एतराज करने वालों की सामाजिक मान्यता सही नहीं है. वो प्रभुत्व बनाए रखना चाहते है जो संविधान के खिलाफ़ है.”

सन 2010 की जनगणना के मुताबिक अमरीका में गोरे समुदाय की तादाद कुल जनसंख्या का करीब 64 फीसद है और बाकी की हिस्सेदारी महज 36.6 प्रतिशत.

लेकिन अमरीकी शोध संस्था पियू रिसर्च सेंटर के मुताबिक साल 2050 तक गोरे अमरीकियों की संख्या कुल जनसंख्या का 47 प्रतिशत ही रह जाएगी.

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