क्यूबा में भारतीय खाने का पहला रेस्तराँ

क्यूबा करी हाउस
Image caption क्यूबा में पहला करी हाउस यानी भारतीय खाने का रेस्तराँ हाल ही में खुला है.

क्यूबा की कम्यूनिस्ट सरकार के अर्थव्यव्स्था पर से धीरे-धीरे नियंत्रण खत्म होने की वजह से पैदा हो रहे नए मौकों का फायदा उठाकर एक ब्रितानी आदमी और उनकी पत्नी ने क्यूबा का पहला करी हाउस खोला है.

बीबीसी की साराह रेन्सफोर्ड पहुंची बॉलीवुड नाम के इस रेस्तराँ में.

से़ड्रिक फर्नान्डो ने अपने घर में ही रेस्तराँ बनाया है क्योंकि क्यूबा में अब भी अलग से किराए पर दुकान लेने पर प्रतिबंध है. क्यूबा में सभी निजी रेस्तराँ घरों में ही खोले गए हैं.

सेड्रिक ब्रितानी-श्रीलंकन मूल के हैं और कारोबार उनकी पत्नी ओयाकी के नाम पर पंजीकृत है जो क्यूबा से ही है. से़ड्रिक और उनकी पत्नी को की उम्मीद है कि उनका काम खूब चलेगा.

बदलाव

सेड्रिक कहते हैं, "ये एक बड़ा बदलाव है. मैं मानता हूं कि समय अच्छे के लिए बदल रहा है. मेरे रेस्तराँ में पचास टेबल हैं और ये बड़ी बात है. और अब आप यहां थोड़ा बहुत कमा भी सकते हैं."

क्यूबा की कम्यूनिस्ट सरकार का कहना है कि सीमित निजी उद्यमों की संख्या बढ़ाना देश की साम्यवादी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.

सेड्रिक की पत्नी ओयाकी कहती है, "मैं अपने आस-पास बहुत गतिविधियां देख रही हूं. लोग खरीद-फरोख्त की बातें कर रहे हैं—घर बेचने की, गाड़ी खरीदने की. अब ऐसी बातें करने में डर नहीं लगता."

फिलहाल क्यूबा में 1618 निजी रेस्तराँ चल रहे हैं. इन रेस्तराँओं को पैलाडार कहते हैं.

सेड्रिक की ही तरह उनके कर्मचारी राफा के लिए भी क्यूबा में हो रहे आर्थिक सुधार एक वरदान की तरह है.

राफा बताते हैं, " जब लोगों के पास अपना व्यवसाय शुरु करने के लिए पैसा होगा, तो उन्हें कर्मचारियों की भी ज़रूरत होगी और इससे नौकरियां पैदा होंगी. युनिवर्स्टी में पढ़ने वाले युवा पार्ट-टाइम नौकरी कर पैसा बचा सकते हैं. ये अच्छा है."

चुनौतियां

लेकिन भारतीय खाने के एकमात्र रेस्तराँ को चलाने की कुछ दिक्कतें भी हैं.

सिर्फ़ सही भारतीय व्यंजन पेश करना ही काफी नहीं है. एक अलग-थलग पड़े कम्यूनिस्ट देश में व्यवसाय करने में लगातार चुनौतियां आती हैं जैसे भारतीय खाने में इस्तेमाल होने वाले मसालों को जुटाना.

इस दिक्कत से निपटने के लिए सेड्रिक फर्नान्डो ने बताया, "जो कोई भी इंग्लैंड या कहीं और से आता है, हम उनसे मसाले लाने के लिए कहते हैं. और इसी तरह काम चला रहे हैं. लेकिन अगर हमारे एक से ज़्यादा रेस्तराँ होते, तब हमें बहुत मुश्किल हो जाती."

Image caption बॉलीवुड नाम के ये रेस्तराँ इसके मालिक सेड्रिक फर्नान्डो के घर में ही बनाया गया है.

वैसे भी क्यूबा में एक से अधिक संपत्ति का मालिक होने पर प्रतिबंध है. साथ ही विज्ञापनों के मौके भी सीमित हैं.

इंटरनेट पर नियंत्रण और टीवी पर विज्ञापनों पर प्रतिबंध होने की वजह से सेड्रिक को अपने रेस्तराँ का प्रचार करने के लिए नए उपाय निकाले हैं. उन्होंने अपनी स्पोर्ट्स कार पर एक तरफ रेस्तराँ का पोस्टर चिपका दिया है ताकि जब वो गाड़ी लेकर निकलें, तो ये पोस्टर लोगों की नज़र में आए.

क्यूबा में थोक बाज़ार नहीं हैं और खुदरा में महंगा सामान खरीदने से उनकी कमाई पर असर पड़ता है. या फिर कभी-कभी आलू जैसे ज़रूरी खाद्य पदार्थ महीनों तक बाज़ार से ग़ायब रहते हैं.

लोकप्रिय

लेकिन इन कठिनाइयों और दिक्कतों के बावजूद क्यूबा के पहले करी हाउस की लोकप्रियता बढ़ रही है. रात होते ही सेड्रिक फर्नान्डो का रेस्तराँ लोगों से भरने लगता है और इनमें सिर्फ़ पर्यटक या राजदूत हीं नहीं हैं.

सेड्रिक के मुताबिक, "हमारे यहां सब तरह के लोग आते हैं. अभी कुछ दिन पहले एक अस्सी साल के बुज़ुर्ग आए और उन्होंने समोसे का ऑर्डर दिया. उन्हें समोसा इतना पसंद आया कि उन्होंने कहा वो वापस आएंगे."

साफ है कि क्यूबा के पुराने तरीकों के साथ ही पुराने लोगों में भी बदलाव आ रहा है और लोग इन्हें अपना रहे हैं.

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