अफगानिस्तान के भविष्य पर नेटो की बैठक

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Image caption ओबामा सरकार को उम्मीद है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान जाने वाली नेटो रसद पर लगी रोक उठाने पर राजी हो जाएगा

अफगानिस्तान से नेटो फौजों को वापस बुलाने पर अमरीका के शहर शिकागों में नेता आपस में मुलाकात कर रहे हैं.

वर्ष 2014 के अंत तक अफगान सेना को देश की रक्षा की जिम्मेदारी देने से पहले एक संयुक्त नीति बनाना इस बैठक का मक़सद है.

कुछ सदस्यों ने वायदा किया है कि वो तालिबान लड़ाकों से लड़ने के लिए अफगान सेनाओं की मदद करेंगे.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि आने वाले दिन मुश्किल हो सकते हैं, उधर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ाई ने कहा कि उनके देश को जिम्मेदारियों का पूरा अंदाज़ा है.

इससे पहले कुछ नेटो नेताओं ने वाशिंगटन में जी-8 बैठक के दौरान यूरोपियन यूनियन में आर्थिक संकट को लेकर बैठक की थी.

प्रमुख सवाल

शिकागो में होने वाली बैठक में 50 से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं.

इनमें 20 नेटो देशों के नेताओं के अलावा अफगानिस्तान राष्ट्रपति हामिद करजाई और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी शामिल हैं.

ये बैठक ऐसे वक्त हो रही है जब नेटों देशों पर घरेलू दबाव है कि वो 2014 से पहले अफगानिस्तान से फौजें वापस बुला लें.

फ्रांस के नए राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड ने इस साल के अंत तक सेनाओं को वापस बुला लेने का वायदा किया है.

उधर नेटो महासचिव एंडर्स फोग रासमसन ने बीबीसी से कहा कि ये कदम नीति का हिस्सा था.

अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने अफगान सेनाओं की मदद के लिए धन देने की बात कही है.

उम्मीद की जा रही है कि अमरीका आर्थिक जरूरत का करीब आधा हिस्सा, यानी चार बिलियन डॉलर, इस कोष में देगा.

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को हटाने के 10 साल से ज्यादा के बाद भी वहाँ हिंसा लगातार जारी है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ओबामा सरकार को उम्मीद है कि राष्ट्रपति जरदारी अफगानिस्तान में जाने वाले नेटो रसद पर लगी रोक हटाने पर राजी हो जाएंगे.

नवंबर में एक पाकिस्तानी चौकी पर हमले में पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने के बाद नेटो रसद के जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

अफगानिस्तान में अमरीका के नेतृत्व में करीब 1.3 लाख सैनिक तैनात हैं.

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