पर्यावरण बचाने के लिए आगे आए मिस्र के लोग

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Image caption पिछले साल के जन आंदोलन के बाद मिस्र की राजनीति में बदलाव आया है

इस महीने 23 और 24 मई को मिस्र में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं जो उस देश के इतिहास में शायद पहले स्वतंत्र राष्ट्रपति चुनाव होंगे.

एक ओर पिछले साल के जन आंदोलन के बाद मिस्र की राजनीति में बदलाव आया है, तो दूसरी ओर स्थानीय कार्यकर्ता इन नए अधिकारों और स्वतंत्रता का इस्तेमाल आर्थिक स्थिति सुधारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए कर रहे हैं.

कार्यकर्ताओं ने तटवर्ती शहर डेमिएटा में एक उर्वरक कारखाना बंद कराया है. उनका कहना है कि इस कारखाने से शहर का पर्यावरण दूषित हो रहा था.

उमर अब्देल सलाम एक कार्यकर्ता हैं. वो कहते हैं कि कारखाने के बनने से पहले नील नदी के मुहाने पर बसा उनका शहर बहुत खूबसूरत था.

वो कहते हैं, "पहले यहां सबकुछ बहुत अच्छा था, यहां पक्षी थे, मछलियां थीं लेकिन उर्वरक कारखाना बनने से पहले. लेकिन पिछले एक साल में सब कुछ बदल गया है. पानी में रसायन है, मछलियां मर गई हैं, पक्षी भी नहीं है, यहां अब कुछ नहीं बचा."

जनता की ताकत

स्थानीय निवासियों के मुताबिक कारखाने से इतना प्रदूषण हुआ है कि उन्हें इसके खिलाफ विरोध में पिछले साल नवंबर में सड़कों पर उतरना पड़ा. कुछ विरोध प्रर्दशन हिंसक भी हो गए जिनमें एक प्रदर्शनकारी मारा गया लेकिन फिर भी स्थानीय लोगों ने कारखाने को बंद करवा दिया.

ये आम लोगों की ताकत का वो नमूना है जो राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के शासनकाल में मुमकिन नहीं था. इस कारखाने में पिछले पांच महीने से उत्पादन नहीं हुआ है जिससे इसके मालिकों को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है और इसके कर्मचारी इसके आस-पास भी नहीं फटक सकते.

लेकिन कारखाने के उत्पादन मैनेजर सैद मशाल का दावा है कि उनके कारखाने से कभी भी प्रदूषण नहीं फैला.

मशाल का कहना था, "हमने कारखाने, इससे निकल रहे कचरे और आस-पास के पर्यावरण की जांच करवाई है जिसमें कुछ नहीं निकला. इस जांच में आया है कि कारखाने का असर पर्यावरण पर नहीं पड़ रहा."

लेकिन पास के एक गांव के लगभग सभी लोगों का कहना था कि जब कारखाना चालू था तब उन्हें हवा में अमोनिया गैस की दुर्गंध आती थी. इनमें से कई लोग उन प्रदर्शनों का हिस्सा थे जिनकी वजह से कारखाने को बंद कराया गया.

बदलाव

अब इन लोगों ने कारखाने की घेराबंदी कर रखी है और बारी-बारी से इसकी निगरानी करते हैं.

उमर अब्देल सलाम के मुताबिक होस्नी मुबारक के शासनकाल में इस तरह के विरोध के लिए उन लोगों को बहुत पहले ही गिरफ्तार कर लिया जाता.

उनका कहना था, "इससे पहले कोई हमारी बात नहीं सुनता, हमें सीधे जेल में डाल दिया जाता. लेकिन अब ऐसा नहीं है. ये एक बड़ा बदलाव है."

डेमिएटा के इस कारखाने का बंद होना इस बात का एक और उदाहरण है कि होस्नी मुबारक के हटने के बाद मिस्र में किस तरह के नाटकीय बदलाव आ रहे हैं.

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