अफगानिस्तान में आने वाले दिन मुश्किल: ओबामा

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Image caption नेटो सम्मेलन में ओबामा ने कहा, "हमने साझी सुरक्षा के लिए मिलकर कुर्बानियां दी हैं, हम इस मिशन को पूरा करने की प्रतिबद्धता में एकजुट रहेंगे."

अमरीका के शिकागो में हो रहे नेटो सम्मेलन के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में आने वाले दिन और मुश्किल हो सकते हैं.

ओबामा ने कहा कि आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए नेटो सदस्य देशों को अपने संसाधन एकजुट करने होंगे.

उन्होंने कहा, “हमने साझी सुरक्षा के लिए मिलकर कुर्बानियां दी हैं, हम इस मिशन को पूरा करने की प्रतिबद्धता में एकजुट रहेंगे.”

शिकागो में हो रहे दो दिनों के नेटो सम्मेलन में 28 सदस्य देशों की राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के अलावा अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भी हिस्सा ले रहे हैं.

सम्मेलन में पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने अमरीका से ड्रोन हमले बंद करने की मांग की है. लेकिन शिकागो में अफगानिस्तान से नेटो फौजों को वापस बुलाने का मामला मुख्य चर्चा का विषय है.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के साथ मुलाकात के बाद अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, “इस सम्मेलन से पता चलता है कि विश्व भर के देश अफगानिस्तान में हमारी रणनीति का समर्थन करते हैं. अब हमें इस रणनीति को सही तरीके से लागू करना है.”

इस मौके पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि उनके देश को जिम्मेदारियों का पूरा अंदाज़ा है.

अमरीका चाहता है कि इस सम्मेलन में सन 2014 के अंत तक अफगान सेना को देश की रक्षा की जिम्मेदारी देने से पहले नेटो में एक संयुक्त नीति बन जाए, जिससे अफगान सरकार को 2014 के बाद भी अफ़गान सुरक्षा बलों को तैयार करने के लिए आर्थिक मदद दी जा सके जिससे वह तालीबान लड़ाकों से निपट सकें.

इसमें हर वर्ष करीब 4 अरब डॉलर का खर्च आने की बात कही जा रही है. राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अफगान सुरक्षा बलों ने बेहतरीन प्रगति की है.

मिसाइल सुरक्षा कवच

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को हटाने के 10 साल से ज्यादा के बाद भी वहाँ हिंसा लगातार जारी है. अमरीका अफ़गान सरकार द्वारा तालिबान को शांति प्रक्रिया में शामिल करने के लिए बातचीत करने का भी समर्थन करता है.

लेकिन अमरीका समेत नेटो के कई सदस्य देशों के नेताओं को अफ़्गानिस्तान में युद्व को लेकर आम लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. इसी के चलते फ़्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड ने इस साल के अंत तक सेनाओं को वापस बुला लेने का वायदा किया है. नेटो सम्मेलन के पहले दिन नेटो के सदस्यों ने अपने देशों में एक मिसाइल सुरक्षा कवच लगाए जाने पर सहमति जताई.

नेटो महासचिव एंडर्स रासमसन ने इसका एलान करते हुए कहा, “18 महीने पहले हमने मिसाइल सुरक्षा कवच का लिस्बन के सम्मेलन में जो वादा किया था वह अब शिकागो में एक सच्चाई बन गया है. हम इसे नेटो के देशों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने की ओर पहला कदम मानते हैं.”

नेटो सम्मेलन का एक और अहम मुददा है पाकिस्तान द्वारा नेटो की सपलाई रोके जाने का.

सम्मेलन में आए पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से तो मुलाकात नहीं हुई है.

लेकिन अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन से उन्होंने मुलाकात करके पाकिस्तान में हो रहे ड्रोन हमलों को रोके जाने की मांग की है.

‘ड्रोन हमले रोके अमरीका’

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Image caption जरदारी ने कहा कि अमरीका पाकिस्तान पर ड्रोन हमलों पर रोक लगाए.

ज़रदारी का कहना था कि ड्रोन हमलों से पाकिस्तान की सीमाओं का उल्लंघन होता है. और इससे देश की जनता में रोष भी फैलता है. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने अमरीका से ड्रोन हमलों को रोके जाने का कोई तरीका खोजने की मांग की है.

इसके अलावा आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा कि चरमपंथ को खत्म करने के लिए सिर्फ़ सैन्य कार्रवाई ही काफ़ी नहीं है. उन्होंने अमरीका से ‘कोएलिशन सपोर्ट फंड’ के तहत पाकिस्तान को बकाया रकम दिए जाने की भी मांग की है.

अमरीकी विदेश मंत्री ने इस मौके पर कहा कि अमरीका पाकिस्तान को अपना साथी समझता है और उसकी सीमाओं का आदर भी करता है.

लेकिन अफगानिस्तान जाने वाली नेटो रसद पर पाकिस्तान द्वारा लगाई गई रोक के बारे में अमरीका और पाकिस्तान के बीच इस सम्मेलन के दौरान समझौते के आसार कम लग रहे हैं.

मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा हर अमरीकी ट्रक के गुज़रने पर 5 हज़ार डॉलर की रकम की मांग पर समझौता अभी नहीं हो पाया है. लेकिन नेटो महासचिव एंडर्स रासमसन ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान जल्द ही नेटो को रसद पहुंचाने वाला रास्ता खोल देगा.

सम्मेलन में सोमवार को अफगानिस्तान के मुददे पर विस्तार से चर्चा होनी है.

इसके अलावा विश्व में जारी आर्थिक मंदी के कारण आने वाली मुश्किलों को लेकर नेटो के खर्चों के बारे में भी चर्चा की जानी है

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