'अल कायदा' के हमले में 90 लोगों की मौत

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Image caption अल कायदा ने कहा कि हमला उसके एक सदस्य ने किया

यमन की राजधानी साना में हुए एक आत्मघाती हमले में कम से कम 90 सैनिकों की मौत हो गई हैं. अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह आत्मघाती हमला उस वक्त हुआ जब सेना रिहर्सल के लिए जा रही थी.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आत्मघाती हमलावर सेना की वर्दी पहने हुआ था. उन्होंने राष्ट्रपति भवन के बगल में अल सबिन स्कैयर पर बम विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया.

अल कायदा के सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि उसके एक सदस्य ने ये हमला किया है.

परेड के वक्त हमला

इस साल फरवरी में नए राष्ट्रपति अब्दराबुह मंसूर हादी के सत्ता संभालने के बाद यमन की राजधानी में हुआ यह सबसे बड़ा हमला है.

कर्नल अमिन अल अलघाबति ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “जब हम पैरेड में शामिल थे तो हमने देखा कि एक जोरदार विस्फोट हुआ है. हमारे दर्जनों लोग इस हमले में मारे गए. हम उन्हें मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.”

एक दूसरे सैनिक अहमद सोभी ने समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस को बताया, “यह वास्तव में नरसंहार है. इस हमले के बाद लोगों के शरीर टुकड़े फैले पड़े हैं. यह हमला अविश्वसनीय है.”

अलग-अलग दावा

मेडिकल सूत्रों ने एएफपी को बताया कि इस हमले में कम से कम 96 लोग मारे गए हैं जबकि 300 सौ से अधिक लोग घायल हुए है, जिन्हें साना के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.”

यह अभी तक पता नहीं चला है कि हमलावर सेना के ड्रिल में हिस्सा ले रहे थे या फिर घटना स्थल पर विस्फोट करने से तुरंत पहले वहां आए थे.

यमन में लगातार हो रहे आत्मघाती हमले से वहां की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है.

ये हमला उस वक्त हुआ जब रक्षा मंत्री नसीर अहमद और सेना प्रमुख सलामी लेने वाले थे.

मरनेवालों में सबसे ज्यादा लोग केन्द्रीय सुरक्षा संगठन (सीएसओ) के थे.

एकता दिवस

परेड में शामिल सैन्यकर्मी मंगलवार को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस की तैयारी कर रहे थे. यह तैयारी 1990 में यमन के पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक बनने के लिए थी. इसे पहले दक्षिणी यमन और उत्तरी यमन के रुप में जाना जाता था.

बिग्रेडियर करीम नाहिल ने कहा, “यमनवासियों को इस घातक हमले को बर्दाश्त करने के लिए एकजुटता दिखानी चाहिए. हम मंगलवार को अपने वीर शहीदों के खून से एकता दिवस मनाएगें.”

यह हमला दस दिन पहले अल कायदा से जुड़े चरमपंथी संगठनों और अरबियन पेनिसुला (एक्यूएपी) के उपर दक्षिणी अबयान में चलाए गए अभियान के बाद हुआ है.

दस दिन पहले शुरु हुए इस अभियान में अबयान के जार शहर के नजदीक कम से कम 33 चरमपंथी और 19 सैनिक मारे जा चुके हैं, जो पहले अंसार-अल-शरिया के कब्जे में था.

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