मिस्र में अहम राष्ट्रपति चुनाव

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मिस्र में होस्नी मुबारक को सत्ता से निकाले जाने के 15 महीने बाद वहाँ पहला निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव हो रहा है. इस चुनाव में पाँच करोड़ लोग हिस्से ले सकते हैं और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

मुबारक के जाने के बाद फरवरी 2011 में सुप्रीम काउंसिल ऑफ आर्मिल फोर्सिस यानी सैन्य परिषद ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. परिषद ने कहा है कि निष्पक्ष चुनाव होगा जिसके बाद सेना हट जाएगी.

चुनाव में मुबारक के समय के कई मंत्री हैं तो कई क्रांतिकारी भी हैं. मुख्य उम्मीदवारों पर नजर डालें तो अहमद शफीक हैं जो वायु सेना के पूर्व कमांडर हैं और फरवरी 2011 के प्रदर्शनों में कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री भी थे.

अमर मूसा विदेश मंत्री और अरब लीग के प्रमुख रहे चुके हैं. मोहम्मद मुरसी भी दौड़ में शामिल हैं. वे मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिम पार्टी के नेता हैं.

मोहम्मद मुरसी शुरु में पार्टी के रिजर्व उम्मीदवार थे लेकिन असल उम्मीदवार खैरत अल शातेर के डिस्क्वालिफाई होने के बाद मुरसी को मैदान में उतारा गया. उनकी पढ़ाई अमरीका में हुई है और वे एक इंजीनियर हैं.

अब्दुल मोनिम अब्दुल फोतुह स्वतंत्र इस्लामी उम्मीदवार हैं.

अगर इस चुनाव में कोई विजेता बन कर नहीं उभरता है तो 16 और 17 जून को दूसरे चरण का चुनाव होगा.

बीबीसी में मध्य पूर्व मामलों के संपादक जेरेमी बावेन कहते हैं कि आशंका है कि सेना के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है क्योंकि सेना राष्ट्रपति के पीछे सत्ता का केंद्र बने रहना चाहती है.

जबकि मतदाताओं को जानकारी नहीं है कि राष्ट्रपति के पास कौन से अधिकार होंगे क्योंकि अभी नए संविधान में इसके बारे में बताया जाएगा.

मिस्र के पाँच हजार साल के रिकॉर्डिड इतिहास में लोग पहली बार अपना नेता चुनेंगे.

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