शरीर के भीतर बमः क्या ऐसा हो सकता है?

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Image caption हवाई अड्डे पर स्कैनर से शरीर के भीतर रखे गए बम को पकड़ना मुश्किल है

इस महीने यमन में अंतर्वस्त्र (अंडरवियर) में जो बम मिला था, उससे इस बात की चिंता होने लगी है कि अल कायदा के बम बनाने वाले इसे कहां और कैसे छुपा सकते हैं. प्रश्न है कि क्या वे बम को आदमी के शरीर में भी छुपा सकते हैं? फिर हमें इससे चिंतित होने की भी जरुरत है भी या नहीं.

अल कायदा और पश्चिमी देशों के सुरक्षा अधिकारियों के बीच चल रहे नुका-छिपी के खेल में शरीर में बम छुपे होने की बात उस वक्त सबसे प्रमुखता पाती है, जब मामला हवाई जहाज या उससे जुड़े जगहों की होती है.

दहशतगर्दों की हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे किसी तरह हवाई सुरक्षा के घेरे को तोड़कर वहां पहुंच जाएं. बॉक्स कटर का इस्तेमाल करके 9/11 के हमले को अंजाम दिए जाने के बाद कॉकपिट की सुरक्षा बहुत ही सख्त कर दी गई थी.

जूते में बम

लेकिन कुछ महीने बाद, जूते में छुपे बम ने तो जहाज को लगभग नीचे ही ला दिया था. इसके बाद ही जूते की सुरक्षा जांच शुरु की गई.

अल कायदा ने तो 2006 तक बम बनाने में इतनी दक्षता हासिल कर ली थी कि उन्होंने तरल पदार्थ से भी बम बनाया शुरु कर दिया. इसका परिणाम यह हुआ कि सामान के साथ शराब को ले जाने पर प्रतिबंधित करदिया गया.

और 2009 में एक नाइजीरियाई व्यक्ति द्वारा अंडरवियर में रखे हुए बम ने डेट्रोइट में जहाज को नीचे उतरने के लिए बाध्य कर दिया था. इस घटना से कुछ महीने पहले सऊदी अरब में आंतकवाद विरोधी कार्यक्रम चलाने वाले राजकुमार मोहम्मद बिन नायेफ के सामने एक व्यक्ति ने आत्मसमर्पन करने की बात कही थी.

उसने जोर देकर कहा था कि वह उनके सामने आकर ही आत्मसमर्पण करना चाहता है. जब वह जेदाह में राजकुमार से मिला तो फोन में छुपे बम का धमाका हुआ. बम रखे व्यक्ति का शरीर क्षत-विक्षत हो गया और उसका एक हाथ छिटककर महल के छत से टकराया, लेकिन राजकुमार की जान बच गई.

बम अंडरवियर में

वैसे ऐसे उपकरण के इस्तेमाल के बारे में विवाद है. कुछ लोगों का दावा है कि बम मलाशय में छुपा था तो कुछ का कहना है कि बम अंडरवियर में छुपा था. बम विस्फोट करने वाले अब्दुलाह अल असिरि ने जो उपकरण अपने साथ रखे थे, उसे उनके भाई इब्राहिम अल असिरि ने बनाया था.

इब्राहिम यमन में अल कायदा का प्रमुख बम बनाने वाला था. उनके बारे में माना जाता है कि वह अल कायदा के सबसे खतरनाक व्यक्तियों में शुमार किया जाता है जिनकी तलाश पुरी दुनिया में हो रही है.

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Image caption जूते में बम छुपे होने के बाद जूते की भी तलाशी ली जाने लगी

कहा जाता है कि उन्होंने ही प्रिंटर के कार्टेज में बम बना रखे थे जिसे कार्गो फ्लाइट से अमरीका भेजा जा रहा था (इसे बाद में सुरक्षा अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ लिया था).

सोमवार को साना में हुए बम विस्फोट में सौ लोगों के मारे जाने के बाद इस बात का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है कि वह उपकरण कितना खतरनाक रहा होगा.

बम की जगह नजदीक

क्लेरमॉंट ग्रेजुएट विश्वविद्यालय के डॉक्टर रॉबर्ट जे बंकर ने 2011 में अपनी रिपोर्ट में विस्तार से बताया है कि शरीर के नजदीक बम रखने की प्रवृति तेजी से बढ़ रही है और अगर इसे तार्किक विस्तार में ले जाएं तो बम शरीर के भीतर तक रखी जा सकती है.

नशा के तश्कर नशीली पदार्थ को समान्यतया शरीर के मलाशय में छुपाकर ले जाते हैं. दूसरे विश्व युद्ध में सीआईए का सबसे पहला दस्ता भी अपना उपकरण मलाशय में ही छुपाता था.

रॉबर्ट जे बंकर का कहना है, “अगर आप मिलिट्री इतिहास पर नजर डालें तो आपको पता चलेगा कि विस्फोटकों को शरीर के भीतर छुपा कर रखे जाने की बातें बहुत पुरानी हैं. इसे दूसरे विश्व युद्ध और वियतनाम युद्ध में धड़ल्ले से प्रयोग में लाया गया था.”

शरीर के किसी अंग के भीतर बम रखने के लिए मेडिकल प्रक्रिया से गुजरना जरुरी होता है. वैसे इसका प्रयोग जानवरों के उपर किया गया है.

अल कायदा इराक में 2010 में एक कुत्ते के शरीर में बम लगाकर उसे हवाई जहाज से अमरीका भेजकर वहां विस्फोट कराना चाहता था. लेकिन वह कुत्ता पहले ही मर गया जिसके चलते उसे अमरीका नहीं भेजा जा सका.

शरीर में बम लगाने के लिए चिकित्सा शास्त्र की अच्छी जानकारी होनी चाहिए और कहा जाता है कि अल कायदा के बम बनानेवाले अल असिरि डॉक्टरों की मदद से इस काम में लगे हुए हैं.

डॉक्टर मार्क मेलरोस ने एबीसी न्यूज को बताया, “सर्जन पेट को चीरकर उसमें विस्फोटक पदार्थ छुपा देगा, जबकि विस्फोटक पदार्थ को महिलाओं के स्तन में ऑपरेशन करके छुपाया जा सकता है."

अभी सबूत नहीं

हालांकि खाड़ी देश के एक सुरक्षा विशेषज्ञ का कहना है कि अभी तक उन्हें इसका कोई सबूत नहीं मिला है जिससे कि पता चले कि डॉक्टर सर्जरी करके विस्फोटक पदार्थ छुपा रहे हैं. इसलिए क्या अडरवियर के भीतर बम रखना संभव है?

जिस अंडरवियर बम को 2009 और 2012 में पकड़ा गया था, उसमें मेटल का कोई भी अंश नहीं था. वर्ष 2009 में अंडरवियर बम मिलने के बाद हवाई अड्डों पर शरीर की जांच में और सख्ती होने लगी.

हालांकि लोगों ने इसका काफी विरोध किया और कहा कि इससे उनकी निजता भंग हो रही है. फिर भी, अमरीका और यूरोप के कुछ हवाई अड्डों पर पूरे शरीर को स्कैन किया जाने लगा. लेकिन मध्य पूर्व एशिया के देशों में इस तरह की जांच अब भी नहीं होती है.

पकड़ना संभव नहीं

स्कैनर अंडरवियर के बम को तो पकड़ सकता है लेकिन शरीर के भीतर छुपे बम को पकड़ने की क्षमता उसमें नहीं होती है.

फिर प्रश्न उठता है कि ऐसे बमों को कैसे पकड़ा जाए?

मेडिसिन एक्स-से द्वारा बम को पकड़ा जा सकता है, लेकिन मुश्किल प्रश्न यह है कि यात्रियों को इस तरह के विकिरण का सामना क्यों करने देना चाहिए.

इसलिए जरुरी यह है कि सुरक्षा में लगे व्यक्तियों को चाहिए कि यात्रियों पर पैनी निगाह रखें, उनसे ‘थोड़ा-बहुत’ पूछताछ कर लें जैसा कि इसराइल में किया जाता है.

शरीर में बम रखना असंभव

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Image caption स्कैनर से अंडरवियर में छुपे सामान का पता चल सकता है, लेकिन शरीर के भीतर से बम का नहीं

बीबीसी से बात करते हुए एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि यह संभव नहीं है. उनका कहना था कि अल कायदा इस तरह के बम का इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन शरीर के भीतर सर्जरी करके रखे गए बम वाले व्यक्ति अपने हाल में किए सर्जरी को कैसे छुपा सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार बम बनाने वालों को भी परेशानी होगी क्योंकि उन्हें इसका ख्याल रखना पड़ेगा कि शरीर के भीतर कितना विस्फोटक रखा जा सकता है.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन बमों से सबसे ज्यादा खतरनाक बमों को विस्फोट करके उडा़ना है.

अगर टाइमर को शरीर के भीरत उपकरण के साथ लगा दिया जाता है, तो बम वाले उस वक्त क्या करेगें जब जहाज को उड़ने में देर हो जाए.

वर्ष 2009 के अंडरवियर बम को एक रासायनिक विस्फोटक से उड़ाया गया था लेकिन इसका असर सिर्फ बम लेकर चलने वाले व्यक्ति पर ही हुआ और विस्फोट में वही मारा गया.

लेकिन 2012 का बम उससे थोड़ा अलग है, इसे ज्यादा अच्छी तरह विकसित किया गया है, लेकिन इसके बारे में विस्तार से जानकारी अभी तक मुहैया नहीं कराई गई है.

जहाज में विस्फोट मुश्किल

फोन से विस्फोट कराना एक विकल्प है, लेकिन इसके लिए जहाज में फोन का नेटवर्क होना अनिवार्य है. जहाज में नेटवर्क का होना बहुत ही मुश्किल है.

शरीर के भीतर रखे गए बम के बारे में अभी तक ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं लेकिन अल कायदा और खासकर यमन में हुई कार्यवाई से पता चलता है कि यह प्रयोग काफी निर्दयी है और उनका मकसद किसी भी तरह अमरीका और हवाई जहाज को हमले का शिकार बनाना है.

बार-बार उन्होंने मारक हमले के लिए बहुत ही क्रुरता के साथ कई प्रयोग किए हैं.

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