मिस्र: ब्रदरहुड और मुबारक दौर के प्रधानमंत्री के बीच दौड़

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Image caption मुर्सी और शफीक के बीच होगा मुकाबला.

मिस्र में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में मुस्लिम ब्रदरहुड के उम्मीवार मोहम्मद मुर्सी और पूर्व शासक होस्नी मुबारक के दौर में कुछ समय प्रधानमंत्री रहे अहमद शफीक को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं.

इन्हीं दोनों में से अगले महीने राष्ट्रपति चुनाव के निर्याणक दौर में नया राष्ट्रपति चुना जाएगा.

इस बीच वामपंथी उम्मीदवार हमदीन सब्बाही ने मतो की दोबारा गिनती कराए जाने की मांग की है. उनका आरोप है कि चुनाव में कई गड़बड़ियां हुई थी. चुनाव के पहले दौर में सब्बाही तीसरे स्थान पर रहे थे.

पहले दौर में मुर्सी को जहां 25.3 प्रतिशत वोट मिले तो 24.9 प्रतिशत वोटों के साथ शफीक भी ज्यादा पीछे नहीं रहे.

इन दोनों उम्मीदवारों का संबंध मिस्र को दो परस्पर विरोधी खेमों से है, जिनके बीच दशकों से संघर्ष रहा है.

वैसे शफीक ने कहा है कि क्रांति से पहले वाली मुबारक की शासन व्यवस्था को फिर से लागू करने का सवाल ही नहीं उठता है.

समाचार एजेंसी एएफपी ने शफीक के हवाले से कहा है, “मैं सभी मिस्र वासियों के सामने संकल्प लेता हूं, हम नए दौर की शुरुआत करेंगे. वापस पीछे बिल्कुल नहीं जाएंगे.”

'खतरे में मिस्र'

मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर शफीक जीत जाते हैं तो 'मिस्र खतरे में पड़ जाएगा' और उनका संगठन शफीक को हराने के लिए बाकी उम्मीदवारों से बात करेगा.

मुस्लिम ब्रदरहुड ने होस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल करने की मुहिम का समर्थन करने वाली पार्टियों से कहा है कि वे मुर्सी को समर्थन दें.

मुबारक के दौर में प्रतिबंधित रहे मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि ‘अगर शफीक जीत जाते हैं तो पुरानी शासन व्यवस्था फिर से लागू हो जाएगी.’

मुस्लिम ब्रदरहुड ने शनिवार को कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बैठक के लिए आमंत्रित किया है.

वैसे चुनावी मुहिम के दौरान मुस्लिम ब्रदरहुड और शफीक एक दूसरे पर मिस्र की क्रांति पर कब्जा करने का आरोप लगाते रहे हैं.

शफीक के प्रवक्ता अहमद सरहन ने क्रांति-समर्थकों से अपने उम्मीदवार को वोट देने को कहा है. उनका कहना है कि शफीक ‘भविष्य’ की बात कर रहे हैं जबकि मुस्लिम ब्रदरहुड का जोर ‘एक इस्लामी साम्राज्य’ पर है.

किसे चनेंगे मिस्र के लोग

मिस्र की राजधानी काहिरा में बीबीसी संवाददाता जोन लिन का कहना है कि दूसरे चरण में होने वाले ध्रुवीकरण से मिस्र टकराव के नए दौर में दाखिल हो सकता है.

मिस्र के अखबार अल-अहराम ने धर्मनिरपेक्ष उदारवादी फ्री इजिप्शियन पार्टी के नेता अहमद खैरी से हवाले से कहा है, “पहले दौर के चुनाव का परिणाम सबसे खराब आया है.”

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Image caption मिस्र में इन्हें पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कहा जा रहा है.

उन्होंने मुर्सी को एक ‘इस्लामी फासीवादी’ कहा तो शफीक को ‘सैन्य फासीवादी’ बताया.

पहले दौर के चुनाव में क्रांति की समर्थक पार्टियों के वोट आपस में बंट गए. वामपंथी हमदिन सब्बाही 21.5 प्रतिशत वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे तो मुस्लिम ब्रदरहुड से टूट कर अलग हुए उदारवादी इस्लामपंथी अब्दुल मोनिम अब्दुल फतोह 19 प्रतिशत वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे.

अरब लीग के पूर्व महासचिव अम्र मूसा को पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा.

मिस्र के इतिहास में ये पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है जो पर्यवेक्षकों के मुताबिक शांतिपूर्ण तरीके से हुआ.

ऐतिहासिक मतदान

राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण का मतदान बुधवार और गुरुवार को हुआ.

आधिकारिक चुनाव परिणामों की घोषणा मंगलवार को होगी. लेकिन सरकारी मीडिया में देश भर के मतगणना केंद्रों से खबरें आ रही हैं और कुल 13 उम्मीदवारों से में शफीक और मुर्सी को सबसे ज्यादा वोट लेने वाले उम्मीदवार बताया गया है.

अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने मिस्र में मतदान को ऐतिहासिक बताया है. अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों का नेतृत्व कर रहे पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर का कहना है कि कुछ गड़बड़ियों के बावजूद चुनावी प्रक्रिया 'उत्साहजनक' रही.

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