चौबीस साल बाद देश से बाहर निकलीं सू ची

 मंगलवार, 29 मई, 2012 को 22:53 IST तक के समाचार

सान सू ची 24 वर्षों के बाद थाईलैंड पहुंची हैं

बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची लगभग 24 सालों के बाद पहली बार देश से बाहर निकली हैं. वे थाईलैंड के दौरे पर गई हैं.

वो थाईलैंड में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेने वहाँ गई हैं.

लगभग दो दशकों तक सू ची ने बर्मा छोड़ने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उन्हें डर था कि सेना के अधिकारी उन्हें देश में वापस नहीं लौटने देगें.

पति को कैंसर

इंग्लैंड में उनके पति जब कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे, तब भी सू ची ने बर्मा छोड़ने से इनकार कर दिया था.

लेकिन पिछले महीने संपन्न हुए संसद के चुनाव के बाद उन्हें लगने लगा है कि सरकार अब उन्हें देश वापस आने से नहीं रोक पाएगी.

लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची को मई महीने के शुरू में ही पासपोर्ट दिया गया था.

जैसे ही उन्होंने रंगून से उड़ान भरी, उन्होंने संवाद एजेंसी एएफपी को बताया, “यह यात्रा उनके काम का हिस्सा है. मैं वहां चार या पांच दिन ठहरने जा रही हूं. मैं वहां शरणार्थी शिविर भी देखने जाउंगीं.”

शरणार्थी शिविर में

बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची

"यह यात्रा उनके काम का हिस्सा है. मैं वहां चार या पांच दिन ठहरने जा रही हूं...मैं वहां शरणार्थी शिविर भी देखने जाउंगीं"

अपने देश बर्मा में गिरफ्तारी के डर से भागकर थाईलैंड में लगभग एक लाख 30 हजार लोग शरणार्थी शिविर में रह रहे हैं.

आंग सान सू ची थाईलैंड से बर्मा लौटेंगी और उसके बाद जून में फिर से यूरोप के दौरे पर जाएँगीं.

माना जाता है कि वे नॉर्वे जाकर औपचारिक रूप से नोबेल पुरस्कार ग्रहण करेंगी जो उन्हें वर्ष 1991 में दिया गया था. इसके अलावा वह इंगलैंड में रह रहे अपने परिवार के सदस्यों से भी मिलने के लिए जाएगीं.

भारत भी आएगीं

इस बात की भी जानकारी मिल रही है कि आनेवाले दिनों में वो जिनेवा, पेरिस और आयरलैंड भी जाएँगीं.

थाईलैंड रवाना होने से पहले उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भारत के पहले नेता हैं जिन्होंने 1987 के बाद बर्मा की यात्रा की है.

बीबीसी संवाददाता संजय मजूमदार ने रंगून से खबर दी है कि वह भारत आकर नेहरू मेमोरियल लेक्चर भी देंगीं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बर्मा यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई नए समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए हैं. इन समझौते के अनुसार भारत बर्मा को 500 मिलियन डॉलर का कर्ज देने का वायदा किया है.

दोनों देशों के सीमा से सटे क्षेत्रों को विकसित करने के अलावा हवाई सेवा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी समझौते हुए हैं.

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