इसराइल ने सौंपे 91 फलस्तीनियों के अवशेष

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Image caption फलस्तीनी सुरक्षा बल रामल्लाह शहर में एक शव लाते हुए.

इसराइल ने फलस्तीनी अधिकारियों को उन 91 फलस्तीनियों के अवशेष सौंप दिए हैं जो इसराइल के खिलाफ लड़ाई में मारे गए थे.

इनमें 1975 से चल रही लड़ाई में मारे गए उन लोगों के अवशेष भी शामिल हैं जो आत्मघाती हमलावर थे और चरमपंथी थे.

ये कार्रवाई इसराइली जेलों में कैद सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों की भूख हड़ताल खत्म कराने के लिए किए गए समझौते के तहत हुई है.

इसराइली अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसा कायम करने के लिए ये कदम उठाया गया है.

इन अवशेषों को ताबूत में रखकर इसराइल के सैनिक कब्रिस्तान में दफना दिया गया था, जहां से निकालकर इन्हें अधिकारियों को सौंपा गया.

फलस्तीन की नागरिक मामलों की आम समिति के प्रमुख ने कहा का इन अवशेषों में से 79 को रामल्ला भेज दिया गया है जबकि 12 को गजा लाया गया है.

विशेष आयोजन

इन शवों को दोबारा दफनाने से पहले विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा.

इसराइली मीडिया के अनुसार, हमास इन अवशेषों का गजा में पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करेगा. सभी ताबूतों को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी.

उसके बाद इन ताबूतों को विभिन्न शहरों में दफनाने के लिए ले जाया जाएगा.

शुक्रवार को अंतिम संस्कार से पहले इन ताबूतों को रामल्ला में राष्ट्रपति अब्बास के घर के बाहर फलस्तीनी झंडों में लपेटकर रखा जाएगा.

रामल्ला में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन डॉनिसन का कहना है कि अवशेषों को सौंपने का मामला शुरू से ही संवेदनशील रहा है और कई बार बातचीत इसी वजह से आगे नहीं बढ़ सकी.

शहीद या चरमपंथी

फलस्तीनी इन मृतकों को शहीद मानते हैं जबकि इसराइली उन्हें आतंकवादी बताते हैं. इनके अवशेषों को मोल-भाव की वस्तु के तौर पर इस्तेमाल किया गया.

इस महीने की शुरुआत में इसराइल में फलस्तीनी कैदी दो महीने से ज्यादा से चली आ रही अपनी भूख हड़ताल खत्म करने पर सहमत हुए थे.

जेल में अपनी स्थिति में सुधार की माँग को लेकर 1500 से ज्यादा फलस्तीनी कैदियों ने कुछ भी खाने से इंकार कर दिया था.

मृतकों में से एक की मां उम रामेज ओबेद ने कहा कि शवों को सौंपे जाने से वो बहुत खुश हैं, “हम इस क्षण का पिछले 16 सालों से इंतजार कर रहे थे. जितनी ज्यादा बातें इन्हें सौंपने को होती थीं हम शवों को साथ लाने के लिए उतने रोमांचित होते थे.”

वहीं इसराइली सरकार के प्रवक्ता मार्क रेगेव का कहना था कि मानवीय दृष्टिकोण शांति प्रक्रिया को पटरी पर लाने में मदद करेगा. उन्होंने कहा, “इसराइल बिना शर्त शांति वार्ता की बहाली के लिए तैयार है.”

गौरतलब है कि दिसंबर 2010 में पश्चिमी किनारे पर बस्तियों का निर्माण रोकने से इंकार कर देने के कारण वार्ता प्रक्रिया स्थगित हो गई थी.

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