मुबारक को उम्र कैद, मिस्र में जश्न

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मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को पिछले साल देश में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों में 850 प्रदर्शनकारियों को जान से मारने की घटनाओं से संबंधित होने का दोषी पाया गया है. काहिरा में एक अदालत ने 84 वर्षीय मुबारक को उम्र कैद की सजा सुनाई है.

होस्नी मुबारक ने लगभग 30 साल तक मिस्र पर एकछत्र राज किया था. पिछले साल कई महीनों के लोकतंत्र समर्थक और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद होस्नी मुबारक को फरवरी में सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

क्यों मुबारक को मिली सजा ऐतिहासिक है...

होस्नी मुबारक: अर्श से फर्श तक का सफर

तस्वीरों में: मुबारक के सफर पर नजर

अरब जगत में ट्यूनिशिया से शुरु हुए सरकार विरोधी और लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन धीरे-धीरे यमन, लीबिया, सीरिया और अन्य देशों में फैल गए. लेकिन इस अरब क्रांति में मुबारक पहले नेता है जिनपर उनकी मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया और सजा दी गई है.

मुबारक और उनके सहयोगी तत्कालीन गृह मंत्री आदली को निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई रोक न पाने का दोषी पाया गया.

अदालत में झड़पें, बाहर जश्न

काहिरा की एक विशेष अदालत में मुबारक के खिलाफ़ दस महीने की सुनवाई के बाद दोषी पाया गया.

मुबारक अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का खंडन करते रहे हैं. मुबारक के ख़िलाफ़ सत्ता का दुरुपयोग करने समेत कई और आरोप भी थे लेकिन उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपमुक्त कर दिया गया है.

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Image caption मुबारक के चार सहयोगियों को रिहा किए जाने पर झड़पें भड़क उठीं

लेकिन फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत में झड़पें शुरु हो गईं.

कई संवाददाताओं का कहना है कि झड़पें तब हुईं जब तत्कालीन गृह मंत्री आदली के चार सहयोगी मंत्रियों को रिहा करने का आदेश दिया गया.

प्रदर्शनकारी इन लोगों को मुबारक प्रशासन की दमनकारी नीतियों को अंजाम देने का दोषी मानते हैं.

काहिरा में अदालत के बाहर मौजूद बीबीसी संवाददाता योलांद नेल का कहना था, "फैसले की घोषणा होते ही मारे गए प्रदर्शनकारियों के रिश्तेदारों में खुशी की लहर दोड़ गई. आतिशबाजी हुई. एक रिश्तेदार सोहा सईद ने बताया कि वे बहुत खुश हैं, बहुत ही ज्यादा."

लेकिन जैसे ही आदली के सहयोगी मंत्रियों के रिहा होने के आदेश की खबर आई, तो प्रदर्शनकारियों के रिश्तेदारी गुस्सा होकर चीखने-चिल्लाने लगे.

जज अहमद रिफात ने जोर देकर कहा कि अदालती कार्यवाही न्यायपूर्ण रही है.

उन्होंने 1981 से 2011 तक के मुबारक के दौर को 'तीस साल का अंधकार' बताया और प्रदर्शनकारियों को देश के सपूत बताया जो उनके अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से आजादी और न्याय के लिए लड़े.

मुबारक के दोनों पुत्रों - गमाल और आला को कथित भ्रष्टाचार के मामलों में निर्दोष पाया गया है. लेकिन वे जेल में रहेंगे और बुधवार को उनके और सात अन्य के खिलाफ स्टॉक मार्केट में धांधली का मामला लाया जाएगा.

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