क्यों मुबारक को मिली सजा ऐतिहासिक है..

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Image caption मुबारक के खिलाफ मुकदमा अगस्त 2011 से शुरू हुआ था

मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, उनके दो बेटों और आला सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ चले मुकदमे को इस सदी का मुकदमा बताया जा रहा है.उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई है.

वे अरब जगत के पहले नेता हैं जिन्हें उनकी मौजूदगी में सजा सुनाई गई है.-आम लोगों के खिलाफ अपराधों के मामले में.

मुबारक के खिलाफ मुकदमा राजधानी काहिरा के बाहरी इलाके में पुलिस अकादमी में चलाया जा रहा था. लेकिन सुरक्षा कारणों की वजह से न्यायाधीश ने फैसला पढ़ने में ज्यादा वक्त नहीं लगाया.

इस मुकदमे के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किय गए थे. पुलिस अकादमी परिसर के आसपास पुलिस और सेना के 22,000 जवानों को तैनात किया गया था.

मुबारक के खिलाफ मुकदमा अगस्त 2011 से शुरू हुआ था. तभी से उन्हें काहिरा के बाहर स्थित इंटरनेशनल मेडिकल सेंटर में हिरासत में रखा गया था.

इस सेंटर से उन्हें मुकदमे के लिए पुलिस अकादमी तक एक मेडिकल हेलीकॉप्टर से लाया गया था.

मुबारक की उम्र 84 वर्ष है. उनके खिलाफ तीन मुख्य आरोप थे और एक ही न्यायाधीश ने उनके खिलाफ मामले की सुनवाई की.

तीन गंभीर आरोप

मुबारक पर पहला आरोप ये था कि जनवरी 2011 में शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों की हत्या करवाने में उनका हाथ था. इस आरोप में मिस्र में मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान है.

दूसरा आरोप ये था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और सह-आरोपी अरबपति हुसैन सलीम से शर्म अल-शेख स्थित सलेम कंपनी के रिसोर्ट के लिए जमीन के बदले रिश्वत ली.

मुबारक पर तीसरा आरोप ये था कि उन्होंने हुसैन सलीम की ही कंपनी को मिस्र से इसराइल को प्राकृतिक गैस का निर्यात करने की अनुमति दी और इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम कीमत पर तय हुई थी.

मुबारक को इन तीनों ही आरोपों में दोषी पाया गया है और उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

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