'अशांति बढ़ेगी, तानाशाह को भुगतना पड़ता है'

होस्नी मुबारक
Image caption इस फैसले के बाद मिस्र में कई प्रदर्शन हो रहे हैं

मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को उम्रकैद की सजा दी गई है. इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि लोगों ने अपने राजा को या राष्ट्रपति को सजा दी हो.

अगर इतिहास में जाएं तो आप देखेंगे फ्रांस की क्रांति में यही हुआ था. साल 1917 में रूस की बोल्शेविक क्रांति में भी ऐसा ही हुआ था.

तो यह फैसला इतना ऐतिहासिक नहीं है लेकिन हां इतना कह सकते हैं कि मिस्र के लिए यह एक ऐतिहासिक घटना है.

क्यों चुनावों से पहले आया फैसला?

यदि कोई आने वाले चुनावों को इस फैसले से जोड़ कर देखे तो ये सही नहीं. फैसले का टाइमिंग इतनी महत्वपूर्ण नहीं है. उम्मीदवार तो मैदान में उतर चुके हैं. एक उम्मीदवार मुबारक के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को संविधानिक समिति ने मंजूरी दे दी थी.

उधर उमर सुलेमान की उम्मीदवारी को रद्द कर दिया है. मुझे नहीं लगता इससे उम्मीदवारी पर कोई असर पड़ेगा.

प्रगति भी और जुल्म भी

सही तो वही है जो अदालत ने मंजूर किया है.

तीस साल से वे सत्ता में थे. उनके होते हुए देश ने काफी प्रगति की...फलस्तीनी शांति प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही.

दूसरी तरफ देखा जाए तो बहुत जुल्म भी हुए. हजारों की संख्या में लोग जेलों में रहे.

जो उनसे वाकिफ नहीं था या फिर उन्हें मंजूर नहीं था उसे जेल और जेल से भी सख्त सजा मिली.

इतिहास का यही कर्म है कि अपने किए पर कभी न कभी तो तानाशाह को भुगतना ही पड़ेगा.

अशांति बढ़ेगी

जैसे कि मैं टीवी पर देख रहा था उससे तो यही लग रहा है कि इस फैसले से आम जनता सहमत नहीं है.

मिस्र भर में लोग सजा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं कि यह सजा काफी नहीं है.

उनका कहना है कि उनके बेटों को और कई और लोगों को छोड़ दिया गया है. लगता है कि अगले दिनों में असंतोष और अशांति बढ़ेगी.

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