जिन्ना के भाषण की प्रति के लिए भारत से अनुरोध

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Image caption 11 अगस्त 1947 को जिन्ना के दिए इस भाषण की रेकार्डिंग के लिए आकाशवाणी की टीम दिल्ली से कराची आई थी

पाकिस्तान ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन के महानिदेशक मुर्तुज़ा सोलंगी ने आकाशवाणी को लिखे एक पत्र में मोहम्मद अली जिन्ना के एक महत्वपूर्ण भाषण की प्रति देने का अनुरोध किया है.

पाकिस्तान बनने से तीन दिन पहले 11 अगस्त 1947 को कराची में दिए गए इस भाषण में जिन्ना ने भविष्य के ‘धर्मनिर्पेक्ष’ पाकिस्तान का जिक्र किया था.

माना जाता है कि इस भाषण की रिकॉर्डिंग आकाशवाणी के पास है.

इस भाषण में जिन्ना ने कहा था कि भविष्य के पाकिस्तान में धर्म, वर्ग और जबान को तरजीह दिए बिना सभी के पास बराबर के अधिकार होंगे और नए देश में इन बातों की कोई अहमियत नहीं होगी.

सोलंगी के मुताबिक एक हफ्ते पहले उन्हें आकाशवाणी प्रमुख की ओर से फोन पर बताया गया कि वो इस रिकार्डिंग को ढूँढ रहे हैं.

उधर आकाशवाणी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई पत्र नहीं मिला है.

एक अधिकारी का कहना था कि पहले भी पाकिस्तान की ओर से ऐसे ही अनुरोध किए गए हैं, लेकिन वो अभी तक मोहम्मद अली जिन्ना के इस भाषण की रिकॉर्डिंग नहीं ढूँढ पाए हैं.

‘कायदे आज़म’ मोहम्मद अली जिन्ना के इस भाषण को लेकर कई दक्षिणपंथी दल सवाल उठाते रहे हैं. उनका ये भी कहना रहा है कि जिन्ना ने ऐसा कोई भाषण दिया ही नहीं क्योंकि इसकी कोई रिकॉर्डिंग नहीं है.

इस भाषण की अहमियत पर मुर्तुज़ा सोलंगी ने बीबीसी को बताया, “इस भाषण के कागजात को भी कई सालों तक छिपाया जाता रहा, या ज्यादा सार्वजनिक नहीं किया गया. ये बेहद अहम भाषण है.”

वो कहते हैं कि जिस तरह से दोनो देशों के बीच संबंध बेहतर हो रहे हैं, ऐसे माहौल में इस भाषण के मिलने और पाकिस्तान पहुँचने से ताल्लुकात बेहतर ही होंगे.

कैसे हुई रेकॉर्डिंग

दरअसल, उस वक्त आकाशवाणी के स्टेशन दो तरह के होते थे - एक तरह के स्टेशनों को क्लास ए स्टेशन कहा जाता था, और दूसरों को क्लास बी स्टेशन. क्लास बी स्टेशनों के पास रिकार्डिंग की सुविधा नहीं थी जिनमें लाहौर और पेशावर शामिल थे.

उस जमाने में कराची में रेडियो स्टेशन नहीं था.

जिन्ना के भाषण की रिकार्डिंग की टीम दिल्ली से आई थी.

मुर्तुजा कहते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि इस भाषण की रिकार्डिंग बीबीसी के पास होगी, लेकिन बीबीसी की तरफ से उन्हें बताया गया कि ये रिकॉर्डिंग उनके पास नहीं है.

मुर्तुजा कहते हैं, “अगर ये भाषण मिलता है तो ऐसी राजनीतिक ताकतें जो पाकिस्तान को एक बहुवादी, लोकतंत्र देश बनाना चाहते हैं, उनके हाथों में एक बड़ा हथियार होगा.”

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