सीरियाई गांव में दिल दहलाने वाले दृश्य

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Image caption सीरिया में हिंसा के बाद जली हुई कारें

बुधवार को सीरिया के कुबैर गाँव में हुए हत्याकांड के सबूतों से एक बीबीसी संवाददाता रूबरू हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र निगरानी दल के साथ चल रहे बीबीसी के पॉल डनहर ने पाया कि पश्चिमी नगर हमा के पास एक गाँव में इमारतें जला दी गई हैं. यह साफ नहीं हैं कि इस घटना के शिकार दर्जनों लोगों के शवों के साथ क्या हुआ.

सीरिया में अनेक जगहों पर हिंसा जारी है. होम्स से गोलाबारी और दूसरे इलाकों से सुरक्षा बलों पर बम हमलों की खबरें भी आईं.

संयुक्त राष्ट्र संघ का कहना है कि मार्च 2011 से शुरू हुए प्रजातंत्र समर्थक आँदोलन के शुरू होने के बाद से कम से कम 9000 लोग मारे जा चुके हैं.

रूस पर संदेह

उधर अमरीका ने इस संभावना पर चिंता जताई है कि रूस सीरियाई संस्थाओं की आर्थिक प्रतिबंधों से बचाव में मदद कर रहा हो सकता है.

बीबीसी संवाददाता के साथ मोस्को में बातचीत में अमरीकी वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डेविड कोहेन ने उन रिपोर्टों पर चिंता जताई कि रूसी बैंक सीरियाई केंद्रीय बैंक को मदद की पेशकश कर रहे हैं और रूसी-सीरिया आर्थिक रिश्ते प्रतिबंधों के कारगर होने ने रास्ते में बाधा बन रहे हैं.

चीन और रूस दोनों सीरिया के खिलाफ सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को रोक चुके हैं और इस संघर्ष में बाहरी सैनिक हस्तक्षेप के प्रति अपने विरोध को बार बार जताते रहे हैं.

अमरीका वहाँ पर एक निर्णायक कार्रवाई की माँग कर रहा है जबकि कोफी अन्नान महत्वपूर्ण देशों द्वारा दबाव डलवा कर हिंसा समाप्त करवाना चाह रहे हैं.

पंद्रह लाख जरूरतमंद

रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि करीब 15 लाख लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है.इससे पहले कुबैर नरसंहार की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गृह युद्ध के खतरे के बारे में आगाह किया.

अंतरराष्ट्रीय शाँति दूत कोफ़ी अन्नान ने भी कहा कि छह सूत्री शाँति योजना को अभी तक लागू नहीं किया गया है. विपक्ष ने राष्ट्रपति बशर अल-असद का साथ दे रहे सैनिकों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है जब कि सरकार का आरोप है कि नागरिकों को मारने के लिए ‘आतंकवादी’ जिम्मेदार हैं.

संयुक्त राष्ट्र निगरानी दल के सदस्य शुक्रवार को कुबैर पहुँचे. बीबीसी के पॉल डनहर उनके साथ थे. इससे पहले गुरुवार को जब उन्होंने वहाँ पहुँचने की कोशिश की थी तो उनके ऊपर गोली चलाई गई थी.

कुबैर हत्याकांड के दोषी सैनिकों को शाहिबा नाम से जाना जाता है जो राष्ट्रपति बशर अल-असद के अल्पसंख्यक अलावाइत समुदाय से आते हैं. इस घटना में मारे गए ज्यादातर लोग बहुसंख्यक सुन्नी मुसलमान लगते हैं.

जगह-जगह खून

इससे पहले विपक्षी सीरियन नेशनल काउंसिल ने मरने वालों की संख्या 78 बताई थी लेकिन ब्रिटेन स्थित एक दूसरे संगठन सीरियन ऑब्ज़रवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने मरने वालों की संख्या कम से कम 55 आंकी थी जबकि सरकारी प्रचार माध्यमों की मानी जाए तो यह संख्या मात्र 9 है.

बीबीसी संवाददाता पॉल डनहर के अनुसार पहला घर आग से नष्ट हुआ था. जले हुए माँस की गंध अभी भी हवा में थी. अगले घर का दृश्य इससे भी बदतर था. कमरे में जगह जगह खून फैला हुआ था और इधर उधर फैली हुई चीजों पर माँस के टुकड़े चिपके हुए थे.

लोगों को मारने के बाद भी हमलावरों की रक्त पिपासा शाँत नहीं हुई थी और उन्होंने मवेशियों को भी अपना निशाना बना लिया था.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी बलों ने कुबैर में मारे गए कई लोगों के शवों को हटा दिया था लेकिन उनके अनुसार कई लोगों को पास के गाँव मारज़फ़ में दफ़नाया गया था.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन्हें डर है कि सीरिया भी कहीं लेबनान की तरह की साप्रदायिक हिंसा का शिकार न हो जाए जिसने उसे दशकों तक चीर कर रख दिया था.

अमरीका वहाँ पर एक निर्णायक कार्रवाई की माँग कर रहा है जबकि कोफी अन्नान महत्वपूर्ण देशों द्वारा दबाव डलवा कर हिंसा समाप्त करवाना चाह रहे हैं.

चीन और रूस दोनों सीरिया के खिलाफ सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को रोक चुके हैं और इस संघर्ष में बाहरी सैनिक हस्तक्षेप के प्रति अपने विरोध को बार बार जताते रहे हैं.

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