क्या कुछ बदल गया कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में?

 शनिवार, 9 जून, 2012 को 02:15 IST तक के समाचार

डिंपल के खिलाफ किसी पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया

बात कुल तीन साल पुरानी भी नहीं है. 2009 के लोक सभा चुनाव में अखिलेश यादव दो सीटों- कन्नौज और फिरोजाबाद से लोक सभा के सदस्य चुने गए थे.

उन्होंने कन्नौज की सीट अपने पास रखते हुए फिरोजाबाद से त्यागपत्र दे दिया. उनकी पत्नी डिम्पल यादव फिरोजाबाद से लोक सभा की उम्मीदवार बनी.

अभिनेता राज बब्बर आम चुनाव में आगरा से हार गए थे. कांग्रेस ने फिरोजाबाद उप चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बना दिया.

राज बब्बर से हारीं

फिरोजाबाद में राज बब्बर की बिरादरी के वोटर गिनती भर के हैं. लेकिन मुलायम सिंह की बहू डिम्पल, यादव बहुल फिरोजाबाद में चुनाव हार गईं.

अपने ही गढ़ में यह हार मुलायम सिंह यादव और उनकी समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका थी.

लेकिन समय का फेर देखिए. अब तीन साल बाद मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और उनकी पत्नी डिम्पल यादव कन्नौज से निर्विरोध लोक सभा का चुनाव जीतने जा रही हैं.

सभी चकित

जिस उत्तर प्रदेश में राजनीतिक नेता दुश्मनी की हद तक एक-दूसरे का विरोध करते हैं, वहाँ ऐसा पारस्परिक सौहार्द राजनीतिक टीकाकारों को भी आश्चर्य में डाल रहा है.

कांग्रेस का बात तो समझ में आती है, बसपा और भाजपा ने क्यों नहीं दिए अपने उम्मीदवार?

राजनीतिक प्रेक्षक यह देखकर आश्चर्यचकित हैं कि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने कन्नौज में उम्मीदवार नही उतारा. दुविधाग्रस्त भारतीय जनता पार्टी ने इतनी देर से प्रत्याशी घोषित किया कि वह समय पर नामांकन करने ही नही पहुँच सका.

बाकी जो दो निर्दलीय उम्मीदवार थे वह भी मैदान से हट गए.

कन्नौज में हुआ क्या?

क्या उत्तर प्रदेश के विरोधी दल सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की ताकत से इतना घबराए गए हैं कि डिम्पल यादव के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा?

या फिर, अचानक उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों में इतना सौहार्द कायम हो गया है कि मुलायम की बहू और मुख्यमंत्री की पत्नी को निर्विरोध सांसद बनवा दिया?

या फिर, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी बहुजन समाज पार्टी के नेता मुकदमों से बचने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कृपा चाहते हैं?

या फिर, कांग्रेस पार्टी दिल्ली में अपनी सरकार चलाने के लिए समाजवादी पार्टी के एहसान का बदला कन्नौज में चुका रही है?

या फिर यह समय का फेर है. जब दिन अच्छे नहीं थे तो डिम्पल को फिरोजाबाद में अपमानजनक हार झेलनी पडी.

और अब जब अच्छे दिन आए हैं तो डिम्पल यादव न केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की पत्नी हैं बल्कि उनका नाम भारत के उन चुनिंदा 44 लोगों में शामिल हो गया है जो निर्विरोध लोक सभा चुनाव जीतने जा रहे हैं.

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